Category: miscellaneous
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विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए कछुए
*विश्व कछुआ दिवस,23 मई* *हृतेश मिश्र / कछुआ पृथ्वी के प्राचीनतम जीवों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि 22 करोड़ वर्ष पहले से यह धरती पर मौजूद है। इसका अर्थ है कि इसने डायनासोर का उदय और अंत भी देखा है। इसका अनोखा कवच इसके जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। ऐसे…
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The Silent Crash
*Raj Kumar / Let’s be honest: when most of people hear the word “Biodiversity”, they picture a distant rainforest, a rare tiger, or a boring textbook chapter they had to memorize for an exam. It feels totally disconnected from your Actual life. But Today is International Biodiversity Day, and it’s time to bust a massive…
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Silent Symphony: Save Biodiversity
*Amisha Kumari / Every morning, before the world fully awakens, nature begins its silent performance. Birds sing from hidden branches, sunlight slips gently through leaves, rivers continue their endless journey, and flowers bloom without seeking applause. These small moments, often ignored in the rush of human life, are not ordinary occurrences — they are living…
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जैव विविधता: धरती की सांस, हमारी ज़िंदगी
*रिम्पी ऐश्वर्य/ जैव विविधता (Biodiversity) एक ऐसी प्रणाली जिसमें विभिन्न प्रकार के जीव (जैसे- पौधे, जानवर, सूक्ष्म जीव, कवक, इत्यादि) एक-दूसरे के साथ परस्पर संबंध स्थापित कर हमारे आस-पास के परिस्थितिक तंत्र(Ecosystem)और पर्यावरण को स्वस्थ और अनुकूल बनाते हैं। हम सभी की जिंदगी एक दूसरे के बराबर सहयोग पर आश्रित है। इसके बहुत उदहरण हैं…
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पर्यावरण संकट से मुक्ति में आम नागरिकों की भागीदारी
प्रो. श्याम नंदन प्रसाद / आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है । इस संकट से मुक्ति पाने की दिशा में सरकारी स्तर पर निःसंदेह प्रयास किए जा रहे हैं, किंतु आम नागरिकों की भागीदारी के बिना इस लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51- A (g) के अंतर्गत…
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पर्यावरण संकट से जूझती पूरी दुनिया
प्रो. (डॉ.) श्याम नंदन प्रसाद/ आज सम्पूर्ण विश्व गंभीर पर्यावरण संकट का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन मानव अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुका है। यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि मुख्यतः मानव जनित गतिविधियों का परिणाम है। यदि समय रहते ठोस…
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अमेरिकी जादूगर के नीले जादू की क़ैद में हिमाचल..!!
संजीव शर्मा / दुनिया भर के लोगों को अपने श्वेत-बर्फीले हुस्न, आकाश छूते चीड़-देवदार और प्रकृति के हरियाली भरे श्रृंगार से अपनी ओर खींचने वाला हिमाचल प्रदेश इन दिनों एक अमेरिकी जादूगर के नीले जादू के मोहपाश में बंधा हुआ है। आमतौर पर जादूगर वैसे तो काला जादू करते हैं लेकिन इस विदेशी जादूगर ने…
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देश भर में गूंजेगी ‘प्रोजेक्ट बिग कैट’ की दहाड़
नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बड़ी बिल्लियों (Big Cats) के संरक्षण में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित करने के लिए एक मेगा अभियान की शुरुआत की है। मंत्रालय देश के विभिन्न हिस्सों में पांच प्रमुख प्रजातियों—बाघ, एशियाई शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता—पर आधारित विशेष विषयगत कार्यक्रमों का…
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तपती धरती:कारण और समाधान
निर्मल रानी/ पर्यावरण / उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,ओडिशा व प. बंगाल जैसे राज्य इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इन राज्यों में कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री से लेकर 44 डिग्री तक पहुंच गया है। पिछले दिनों भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा हीटवेव अलर्ट भी…
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सपनों को पंख देना मैंने गौरैया से सीखा : आशा प्रसाद
गौरैया संरक्षक /आशा प्रसाद : बिहार, पटना, के अंबेडकर पथ की आशा प्रसाद जो आम्रपाली इनर व्हील क्लब की प्रेसिडेंट रही हैं। जो पिछले 6 सालों से “Save Sparrow” प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया है। शुरुआत में मेरे घर पर सिर्फ़ तीन या चार गौरैया आती थीं। वे बताती हैं कि छह महीने की…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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