Category: miscellaneous

  • विलुप्त न हो जाएं गिद्ध

    विलुप्त न हो जाएं गिद्ध

    (अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस प्रतिवर्ष सितंबर के पहले शनिवार को दुनिया भर में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनके संरक्षण को बढ़ावा देना है।)  संजय कुमार / देश में पक्षियों के कई प्रकार की प्रजातियों पर संकट मंडराने की चिंता पर्यावरणविदों…

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  • नेपाल त्रासदी : प्रकृति के आगे इंसान बेबस !

    नेपाल त्रासदी : प्रकृति के आगे इंसान बेबस !

    नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त 2026 को बड़े पैमाने पर भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सैकड़ों लोग मारे गए हैं या लापता हैं। बड़े पैमाने पर नुक़सान की आशंका जताई गयी है। तलाश और बचाव अभियान जारी है। बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि, नेपाल के विदेश मंत्री…

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  • अद्भूत नज़ारे से लबरेज है लोनार क्रेटर झील

    अद्भूत नज़ारे से लबरेज है लोनार क्रेटर झील

    प्रकृति जितनी खूबसूरत है उतनी ही रहस्यों से भरी भी है। मिसाल के तौर पर महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित अद्भूत लोनार क्रेटर देश की धरती पर एक अनोखा प्राकृतिक नजारा है। यह क्रेटर लगभग 35 हजार से 50 हजार साल पहले किसी उल्कापिंड के टकराने से बना था। शुरू में इसे ज्वालामुखी क्रेटर…

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  • अरुणाचल प्रदेश में मिली तितलियों की दुर्लभ प्रजातियां

    अरुणाचल प्रदेश में मिली तितलियों की दुर्लभ प्रजातियां

    ईटानगर / अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले में दो दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान तितलियों की लगभग 85 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। यह खोज जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में किए गए एक दो दिवसीय सर्वेक्षण में प्रकृति प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों की टीम ने तितलियों की…

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  • पक्षियों पर भारी  पतंगबाजी

    पक्षियों पर भारी पतंगबाजी

    धारदार मांझे की चपेट में रोज घायल हो रहे दर्जनों परिंदे इन्सान भी आ रहे हैं चपेटे में नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने की परंपरा भले ही दिल्ली और दिल्ली एनसीआर के आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों का नजारा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हो, लेकिन पतंगबाजी का यह शौक पक्षियों के साथ…

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  • लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हाथी

    लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हाथी

    (विश्व हाथी दिवस) विश्व हाथी दिवस पर आज का सबसे बड़ा सवाल है आखिर लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हैं हाथी ? सवाल को खंगाला है जिला धमतरी, छत्तीसगढ़ के हाथी शुभचिंतक वैभव जगने ने ।आज पूरा भारत, केंद्र हो या राज्य—विश्व हाथी दिवस मनाने के लिए तत्पर है। जगह-जगह कार्यक्रम होंगे, भाषण होंगे,…

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  • स्वस्थ जंगल, संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतीक हैं हाथी

    स्वस्थ जंगल, संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतीक हैं हाथी

    “विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त“ भारत दुनिया के 60 प्रतिशत एशियाई हाथियों का घर है। हिमालय की तलहटी से लेकर पश्चिमी और पूर्वी घाटों तक, हाथियों ने भारत के विविध प्राकृतिक परिदृश्यों में अपना घर बनाया है। हाथी केवल जंगल का सबसे विशाल जीव ही नहीं है, बल्कि भारतीय प्रकृति, संस्कृति और पारिस्थितिकी का अभिन्न…

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  • खामोश होती शेरों की दहाड़, संरक्षण से फिर गूँजे जंगल

    खामोश होती शेरों की दहाड़, संरक्षण से फिर गूँजे जंगल

    “विश्व शेर दिवस” 10 अगस्त संजय कुमार/ भारत में कभी जिस शेर की दहाड़ खामोश होने के कगार पर पहुंच चुकी थी, आज तस्वीर बदल रही हैं। दहाड़ अब गूंजने लगी है। 16वें शेर जनसंख्या अनुमान के अनुसार शेरों की आबादी में वृद्धि हुई है, वर्ष 2025 में अनुमानित संख्या 891 है, जबकि वर्ष 2020 में यह 674 और 2010 के 411 ही थी।  गुजरात के…

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  • ग्लॉ झील बनी भारत की 101वीं रामसर साइट

    ग्लॉ झील बनी भारत की 101वीं रामसर साइट

    पूर्वी हिमालय की अनछुई खूबसूरती को मिली वैश्विक पहचान,अरुणाचल प्रदेश का अपना पहला रामसर स्थल संजय कुमार / अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट के रूप में ग्लॉ झील का चयन, 150 से अधिक वृक्ष और 49 ऑर्किड प्रजातियों का समृद्ध प्राकृतिक संसार से लबरेज अरुणाचल प्रदेश की पूर्वी हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच प्रकृति…

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  • खतरे में प्रवासी पक्षियों की तीन सौ प्रजातियां: टूट रही है प्रकृति की वैश्विक कड़ी

    खतरे में प्रवासी पक्षियों की तीन सौ प्रजातियां: टूट रही है प्रकृति की वैश्विक कड़ी

    हर साल अरबों प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हुए महाद्वीपों, महासागरों और अलग-अलग पारिस्थितिकी तंत्रों को जोड़ते हैं। ये पक्षी केवल मौसम बदलने के संकेतक नहीं हैं, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। लेकिन अब इन पर मंडराता खतरा तेजी से बढ़ रहा है। एक नए वैश्विक…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन