Category: miscellaneous

  • शांत दिवाली : चमगादड़ों की हिफाजत के लिए ग्रामीण नहीं छोड़ते पटाखे

    शांत दिवाली : चमगादड़ों की हिफाजत के लिए ग्रामीण नहीं छोड़ते पटाखे

    “तमिलनाडु के पल्लेनाहल्ली गांव में पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपरा, हजारों चमगादड़ों के संरक्षण के लिए दिवाली और दूसरे उत्सवों में भी नहीं होता आतिशबाजी का शोर; प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की मिसाल पेश कर रहे ग्रामीण” दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों, मिठाइयों और आतिशबाजी के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या किसी…

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  • बढ़ता प्रदूषण  दम तोड़ती स्वच्छ हवा

    बढ़ता प्रदूषण दम तोड़ती स्वच्छ हवा

    दीपावली रोशनी, खुशियों और उल्लास का पर्व है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की विजय का संदेश देता है। लेकिन बदलते समय के साथ दीपावली मनाने के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। दीपों और सजावट के इस पर्व में आतिशबाजी का चलन इतना बढ़ गया है कि…

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  • बिनसर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

    बिनसर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

    “प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए”…(11) संजय कुमार/बिनसर की पहचान केवल जंगलों और हिमालयी दृश्यों तक सीमित नहीं है। इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है।कुमाऊं के चंद शासकों के समय बिनसर का विशेष महत्व था। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार, यह चंद राजवंश की पूर्ववर्ती ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा है। यहां का बिनेश्वर महादेव…

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  • अक्टूबर का सुहावना मौसम और जंगल की खामोशी

    अक्टूबर का सुहावना मौसम और जंगल की खामोशी

    प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(9) संजय कुमार / हमने अक्टूबर के मध्य में बिनसर की यात्रा की। मौसम सुहावना था। सुबह और शाम हल्की ठंड महसूस हो रही थी, जबकि दिन में तेज धूप का आनंद लेने का अवसर मिला। ऐसे मौसम में पहाड़ों की खूबसूरती और भी निखरती मिली। पेड़ों के बीच…

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  • जल सुरक्षा का संकल्प: जन भागीदारी अहम् पहल

    जल सुरक्षा का संकल्प: जन भागीदारी अहम् पहल

    संजय कुमार / जल ही जीवन है। जल है तो हरियाली है। हरियाली है तो स्वच्छ पर्यावरण है। यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और सतत विकास की बुनियादी आवश्यकता है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के बीच जल संसाधनों का संरक्षण आज पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी…

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  • इंडोनेशिया से भारत तक तस्करी का नया कॉरिडोर: विलुप्ति की कगार पर गंभीर लुप्तप्राय मैलियो पक्षी

    इंडोनेशिया से भारत तक तस्करी का नया कॉरिडोर: विलुप्ति की कगार पर गंभीर लुप्तप्राय मैलियो पक्षी

    इंडोनेशिया के अद्भुत और स्थानीय वन्यजीवों के पीछे एक बढ़ता हुआ संकट है, जिस पर तुरंत वैश्विक ध्यान देने की आवश्यकता है। ‘जर्नल ऑफ एशियन ऑर्निथोलॉजी’ में 2026 में प्रकाशित दो नए अध्ययन एक चिंताजनक प्रवृत्ति को सामने लाते हैं: इंडोनेशिया से सीधे भारत तक अवैध वन्यजीव व्यापार के रास्तों का विस्तार। WTI की उत्तरा…

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  • वन्यजीव और जैव विविधता का अद्भुत संगम है बिनसर

    वन्यजीव और जैव विविधता का अद्भुत संगम है बिनसर

    प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(8) संजय कुमार / कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय की गोद में बसा बिनसर एक खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र है, जो अपने जंगलों, शांत वातावरण, पक्षियों और हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचकर ऐसा महसूस हुआ मानो शहरों की भागदौड़ से दूर किसी दूसरी दुनिया…

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  • बिनसर: जंगल, हिमालय और जैव विविधता का संसार

    बिनसर: जंगल, हिमालय और जैव विविधता का संसार

    प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(7) संजय कुमार / हमारी यात्रा का पहला प्रमुख पड़ाव बिनसर था। कुमाऊँ क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले में स्थित बिनसर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और हिमालय के मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार, बिनसर लगभग 2,420 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां…

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  • सरदार वल्लभभाई : किसान चेतना और पर्यावरण संरक्षण के अग्रदूत

    सरदार वल्लभभाई : किसान चेतना और पर्यावरण संरक्षण के अग्रदूत

    संजय कुमार / 21वीं सदी के तीसरे दशक में हम आज जिस ‘विकास’ शब्द की चर्चा करते हैं तो उसके साथ अनचाहे ही लेकिन सही मायने में विनाश की परछाइयाँ भी जेहन में उभरने लगती हैं। खेत-खलिहान, किसान और पर्यावरण—ये तीन शब्द आज वैश्विक विमर्श के केंद्र में हैं। विडंबना यह है कि इनकी चर्चा…

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  • पक्षियों की आवाज में छिपा प्रकृति का संगीत

    पक्षियों की आवाज में छिपा प्रकृति का संगीत

    “प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए”…(6) संजय कुमार / बिनसर पहाड़ों की यात्रा का सबसे सुखद अनुभव केवल दूर दिखाई देने वाली चोटियां या घने जंगल नहीं थे बल्कि पेड़ों के बीच से सुनाई देने वाली पक्षियों की आवाजें भी इस अनुभव को खास बनाती मिली। रात में आसमान में टिमटिमाते तारे और धरती…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन