Category: miscellaneous

  • डाटा सेंटर्स पर गंभीर जलवायु जोखिम

    डाटा सेंटर्स पर गंभीर जलवायु जोखिम

    नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के पीछे भाग रही है। तकनीकी कंपनियां नए डाटा सेंटर बना रही हैं। सरकारें डिजिटल अर्थव्यवस्था को भविष्य की ताकत बता रही हैं, लेकिन इस तकनीकी दौड़ के बीच एक नया सवाल सामने आया है। अगर भविष्य डाटा सेंटरों में बसने वाला है, तो…

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  • छोटा सा ई-मेल लिखने में एआई सोख जाता है आधा बोतल पानी

    छोटा सा ई-मेल लिखने में एआई सोख जाता है आधा बोतल पानी

    चेतावनीनई दिल्ली/कैलिफोर्निया, एजेंसी। जिस एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को हम अपनी सुविधा के लिए महज एक खिलौना समझ बैठे हैं, वह धीरे-धीरे हमारी धरती की प्यास बढ़ा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब आप खुद दिमाग न चलाकर किसी एआई प्लेटफॉर्म से मात्र 100 शब्दों का एक छोटा सा ई-मेल लिखवाते हैं, तो उसके सर्वर को…

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  • एकदिवसीय आयोजन से क्या होगा

    एकदिवसीय आयोजन से क्या होगा

    *युगल किशोर राही/ जब हवा जहर बन जाए, नदियां प्यास बुझाने के बजाय बीमारियां बांटने लगें और जून की धूप शरीर ही नहीं, जीवन को भी झुलसाने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि प्रकृति नाराज है। विडंबना यह है कि जिस पर्यावरण दिवस को हमें आत्ममंथन का अवसर बनाना चाहिए था, वह कई बार केवल…

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  • पर्यावरण दिवस की महत्ता समझिए

    पर्यावरण दिवस की महत्ता समझिए

    प्रतिवर्ष हम 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाते हैं। यह विडंबना ही है कि एक तरफ हम जल, थल और नभ, यहां तक कि भूगर्भ तक को प्रदूषित करने में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ एक दिवस मनाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ले रहे हैं। फिर भी, इस दिवस की सार्थकता कम नहीं…

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  • वैश्विक संकट: जलवायु परिवर्तन और भारत की चुनौती

    वैश्विक संकट: जलवायु परिवर्तन और भारत की चुनौती

    (विश्व पर्यावरण दिवस 2026 : 5जून) संजय कुमार/ आज पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है। इसके प्रभाव केवल प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जल स्रोत, वनस्पति और जीव-जंतु सभी प्रभावित हो रहे हैं। लगातार बदलते मौसम, वैश्विक तापमान में वृद्धि, असामान्य सर्दी और बारिश,…

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  • बिहार में मिला देश का सबसे पुराना वटवृक्ष

    बिहार में मिला देश का सबसे पुराना वटवृक्ष

    (विश्व पर्यावरण दिवस 2026 : 5जून) निशांत रंजन / इतिहास की किताबों में दर्ज कई साम्राज्य आए और चले गए. पीढ़ियां बदलीं, शहर का स्वरूप बदला, बिहार के मुंगेर में इन सारे बदलाव का साक्षी आज भी मौजूद है. दरअसल, मुंगेर में देश का सबसे पुराने पेड़ की पहचान की गयी है. वैज्ञानिक पद्धति (कार्बन…

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  • बढ़ते वैश्विक ताप से संकट में खेती

    बढ़ते वैश्विक ताप से संकट में खेती

    “संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने जिस खतरे की ओर ध्यान खींचा है, वह केवल तापमान बढ़ने की खबर नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता के सबसे महत्त्वपूर्ण आधार- कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराता संकट है।” नृपेंद्र अभिषेक नृप/ धरती जब सूरज के ताप से झुलसने लगे, तब केवल मौसम नहीं बदलता, जीवन का पूरा संतुलन…

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  • भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस से गोंडा में बचाव अभियान

    भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस से गोंडा में बचाव अभियान

    भारत की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस से एक गांगेय डॉल्फिन को पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में बचाया गया। गोंडा में एक सिकुड़ती हुई नहर में फंसी गंगा नदी की डॉल्फिन को भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस की मदद से 13 घंटे के ऑपरेशन के बाद बचाया लिया गया। यह मोबाइल यूनिट फंसे हुए डॉल्फिनों…

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  • हरियाली में छिपा इलाज: समय की मांग

    हरियाली में छिपा इलाज: समय की मांग

    मानव‌ कल्याण में एथनोबोटनी ( ETHNOBOTANY ) के उपयोग की आवश्यकता : आज के परिदृश्य में समय की मांग *प्रो. श्याम नंदन प्रसाद/ लोक वनस्पतिविज्ञान ( ETHNOBOTANY ) विज्ञान की वह शाखा है , जिसके अंतर्गत विभिन्न संस्कृतियों और आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा पौधों के पारंपरिक उपयोग जैसे दवा , भोजन और धार्मिक कार्यों…

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  • डायनासोर का साथी रहा कछुआ भी कहीं गायब न हो जाये

    डायनासोर का साथी रहा कछुआ भी कहीं गायब न हो जाये

    “विश्व कछुआ दिवस 23 मई “ संजय कुमार/ जी हां, कछुए इस धरती पर तब से हैं जब डायनासोर हुआ करते थे। कछुओं ने डायनासोर के साथ उल्कापिंड की टक्कर झेली, बर्फ युग देखा, महाद्वीपों को टूटते-बनते देखा। प्रकृति के खेल में आज डायनासोर नहीं हैं, लेकिन सच यह है कि इन्सान की वजह से…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन