Category: miscellaneous
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गैंडा संरक्षण की कोशिशों से बढ़ी उम्मीद, लेकिन कई प्रजातियां अब भी संकट में
22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस संजय कुमार/ ‘वर्ल्ड राइनो डे’ (विश्व गैंडा दिवस) पर भारत गैंडों के संरक्षण में मिली एक बड़ी कामयाबी का जश्न मना रहा है। एक सींग वाले गैंडों को विलुप्त होने की कगार से बचाकर उनकी आबादी को फिर से बढ़ाना। उनके रहने की जगहों (हैबिटैट) को सुरक्षित रखने और…
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विश्व ओजोन दिवस : धरती की सुरक्षा कवच को बचाने की जिम्मेदारी
हर साल 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय है, “वैश्विक प्रयासों के माध्यम से ओजोन परत का संरक्षण, एक शीतल ग्रह के लिए” । यह दिन हमें उस अदृश्य परत की याद दिलाता है, जो धरती पर जीवन को सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणों से बचाने में महत्वपूर्ण…
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शाडू मिट्टी से भगवान गणेश की मूर्तियों का निर्माण पर्यावरण संरक्षण का सन्देश
महाराष्ट्र के जालना जिले में पांच हजार 348 लोगों ने एक साथ पर्यावरण अनुकूल शाडू मिट्टी से भगवान गणेश की मूर्तियों का निर्माण कर उल्लेखनीय विश्व कीर्तिमान बनाया है। इस उपलब्धि को गिनीज विश्व रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। यह आयोजन जालना में जे.ई.एस महाविद्यालय में आयोजित किया गया।…
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विलुप्त न हो जाएं गिद्ध
(अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस प्रतिवर्ष सितंबर के पहले शनिवार को दुनिया भर में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनके संरक्षण को बढ़ावा देना है।) संजय कुमार / देश में पक्षियों के कई प्रकार की प्रजातियों पर संकट मंडराने की चिंता पर्यावरणविदों…
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नेपाल त्रासदी : प्रकृति के आगे इंसान बेबस !
नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त 2026 को बड़े पैमाने पर भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सैकड़ों लोग मारे गए हैं या लापता हैं। बड़े पैमाने पर नुक़सान की आशंका जताई गयी है। तलाश और बचाव अभियान जारी है। बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि, नेपाल के विदेश मंत्री…
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अद्भूत नज़ारे से लबरेज है लोनार क्रेटर झील
प्रकृति जितनी खूबसूरत है उतनी ही रहस्यों से भरी भी है। मिसाल के तौर पर महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित अद्भूत लोनार क्रेटर देश की धरती पर एक अनोखा प्राकृतिक नजारा है। यह क्रेटर लगभग 35 हजार से 50 हजार साल पहले किसी उल्कापिंड के टकराने से बना था। शुरू में इसे ज्वालामुखी क्रेटर…
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अरुणाचल प्रदेश में मिली तितलियों की दुर्लभ प्रजातियां
ईटानगर / अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले में दो दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान तितलियों की लगभग 85 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। यह खोज जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में किए गए एक दो दिवसीय सर्वेक्षण में प्रकृति प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों की टीम ने तितलियों की…
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पक्षियों पर भारी पतंगबाजी
धारदार मांझे की चपेट में रोज घायल हो रहे दर्जनों परिंदे इन्सान भी आ रहे हैं चपेटे में नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने की परंपरा भले ही दिल्ली और दिल्ली एनसीआर के आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों का नजारा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हो, लेकिन पतंगबाजी का यह शौक पक्षियों के साथ…
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लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हाथी
(विश्व हाथी दिवस) विश्व हाथी दिवस पर आज का सबसे बड़ा सवाल है आखिर लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हैं हाथी ? सवाल को खंगाला है जिला धमतरी, छत्तीसगढ़ के हाथी शुभचिंतक वैभव जगने ने ।आज पूरा भारत, केंद्र हो या राज्य—विश्व हाथी दिवस मनाने के लिए तत्पर है। जगह-जगह कार्यक्रम होंगे, भाषण होंगे,…
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स्वस्थ जंगल, संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतीक हैं हाथी
“विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त“ भारत दुनिया के 60 प्रतिशत एशियाई हाथियों का घर है। हिमालय की तलहटी से लेकर पश्चिमी और पूर्वी घाटों तक, हाथियों ने भारत के विविध प्राकृतिक परिदृश्यों में अपना घर बनाया है। हाथी केवल जंगल का सबसे विशाल जीव ही नहीं है, बल्कि भारतीय प्रकृति, संस्कृति और पारिस्थितिकी का अभिन्न…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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