Category: Literature
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पर्यावरण के खतरों से आगाह करती संजय कुमार की पुस्तक : जल जीवन हरियाली
निशांत रंजन/ विकास की अंधी दौड़, नये-नये आविष्कारों की स्पर्धा, जनसंख्या की निरंतर वृद्धि, औद्योगीकरण एवं शहरीकरण की आपाधापी से प्रकृति के संतुलन में बिगाड़ आदि परिस्थितियों ने पर्यावरण को खतरे में डाल दिया गया है। ऐसे ही अनेक सवालों को उठाती गौरैयाविद लेखक संजय कुमार की पुस्तक “जल जीवन हरियाली” आई है। पर्यावरण संरक्षण…
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FOR FEARLESS FLIGHT OF SPARDOWS
“IIS officer Sanjay Kumar champions the survival of the humble house sparrow with unwavering dedication and innovative efforts, writes Ramashankar” THE SUNDAY STANDARD. NEW DELHI SUNDAY. 25 AUGUST 2024 / IN the serene corners of Bihar, where the old old world charm meets the relentless pace of mo-dernity, a story, both touching and inspira-tional, unfolds.…
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‘I Love Sparrow’ important book on sparrow conservation
Aditi Roy/This book ‘I Love Sparrow’ has covered each and every dimension of the sparrows, which is a small bird having unique appearance holding significant place in the life of people. This book consists of thirty-two sub-topics or chapters covering sparrow holistically. First of its kind, this book put forwards all the efforts a man…
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🌿 विश्व जैव विविधता दिवस
जब धरती थक जाती है,और हवाएँ मौन हो जाती हैं,तब कुछ वृक्ष चुपचापजीवन का दीप जलाते हैं। वटवृक्ष अपनी विशाल बाँहों मेंधरती को छाँव देता है,और पीपल अपनी हर पत्ती सेजीवन का गीत सुनाता है। ये केवल वृक्ष नहीं,प्रकृति की धड़कन हैं,जहाँ पक्षियों के घर बसते हैं,और हर जीव को अपना आसमान मिलता है। इनकी…
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प्रफुल्ल भाई पटेल ने जन्म दिन पर नि:शुल्क घोंसला वितरित कर बनाई पहचान
हिम्मतनगर / यह कहानी है गुजरात राज्य के अरवली जिले के साढंबा के पास में आए हुए एक छोटे से गांव दोलपुरा में जन्मे प्रफुल्ल भाई पटेल की उनको बचपन से ही पंछियों के प्रति लगाव था। जैसे-जैसे बड़े होते गए वैसे-वैसे पंछियों के प्रति उनका प्यार बढ़ता गया। पंछियों के लिए कुछ करना है…
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कविता ‘गौरैया’
गौरैया,आँगन की रौनक” – डॉ.अश्वनी नन्ही सी चिड़िया, प्यारी सी गौरैया,आँगन की रौनक, खुशियों की छैया।चहचहाती थी जो हर सुबह-सवेरे,अब क्यों हो गई दूर हमसे धीरे-धीरे?छतों के कोने, दीवारों की दरार,वहीं था उसका छोटा सा संसार।पर कंक्रीट के जंगल, मोबाइल की तरंग,ले गई उसकी खुशियों के सब रंग।आओ मिलकर एक प्रयास करें,उसके लिए फिर से…
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*कहानी “दो गौरैया” – भीष्म साहनी
घर में हम तीन ही व्यक्ति रहते हैं-मां, पिताजी और मैं। पर पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है। हम तो जैसे यहां मेहमान हैं, घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं। आंगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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