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शांत दिवाली : चमगादड़ों की हिफाजत के लिए ग्रामीण नहीं छोड़ते पटाखे
“तमिलनाडु के पल्लेनाहल्ली गांव में पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपरा, हजारों चमगादड़ों के संरक्षण के लिए दिवाली और दूसरे उत्सवों में भी नहीं होता आतिशबाजी का शोर; प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की मिसाल पेश कर रहे ग्रामीण” दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों, मिठाइयों और आतिशबाजी के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या किसी…
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बढ़ता प्रदूषण दम तोड़ती स्वच्छ हवा
दीपावली रोशनी, खुशियों और उल्लास का पर्व है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की विजय का संदेश देता है। लेकिन बदलते समय के साथ दीपावली मनाने के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। दीपों और सजावट के इस पर्व में आतिशबाजी का चलन इतना बढ़ गया है कि…
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“तमिलनाडु के पल्लेनाहल्ली गांव में पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपरा, हजारों चमगादड़ों के संरक्षण के लिए दिवाली और दूसरे उत्सवों में भी नहीं होता आतिशबाजी का शोर; प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की मिसाल पेश कर रहे ग्रामीण” दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों, मिठाइयों और आतिशबाजी के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या किसी…
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विकास..प्रकृति के लिए विनाशकारी नहीं होना चाहिए-डॉ. राजेंद्र सिंह
विजयवाड़ा, 5 नवंबर 2026 / भारत के जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह और पर्यावरण कार्यकर्ता बोलिशेट्टी सत्यनारायण ने आह्वान किया है कि विकास ऐसा होना चाहिए जो लोगों के जीवन स्तर को बढ़ाए, न कि उनके भविष्य को खतरे में डाले। जंगलों, नदियों, तालाबों, कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट करके हासिल किया गया विकास…
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नुक्कड़ नाटक द्वारा पर्यावरण संरक्षण का संदेश
पटना / दीपावली के दौरान वायु एवं ध्वनि प्रदूषण में संभावित वृद्धि के कारण हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर होने वाले प्रभावों के प्रति जन-सामान्य में जागरूकता अभिवर्धित करने के लिए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा 05नवम्बर से 07 सात नवम्बर 26 तक बिहार राज्य के 13 जिलों, भागलपुर, अररिया, समस्तीपुर, बेगूसराय, पटना, सासाराम,…
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चितई गोलू देवता मंदिर :पर्चियों में फरियाद-घंटियों में गूंजता न्याय
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बिनसर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें 📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com
🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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