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घरेलू गौरैया के विलुप्त होने के पीछे सामूहिक हत्या बड़ा कारण
संजय कुमार / कई देशों से घरेलू गौरैया के विलुप्त होने के पीछे कई कारणों में एक बड़ा कारण गौरैया की सामूहिक हत्या भी शामिल है। चौंकाने वाली बड़ी बात यह है कि इतिहास में गौरैया को “कीट” मानकर बड़े पैमाने पर सामूहिक हत्या/कत्लेआम की घटना दर्ज हैं। चीन में “चार कीट अभियान” 1958 से…
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घरेलू गौरैया के विलुप्त होने के पीछे सामूहिक हत्या बड़ा कारण
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बचपन में चिड़ियाँ मतलब दो ही पक्षी होते थे – गौरैया और कौआ
संजय कुमार / बचपन में चिड़ियाँ मतलब दो ही पक्षी होते थे – गौरैया और कौआ। अंग्रेजी में क्रमश: हाउस स्पैरो और हाउस क्रो। दोनों ही ‘हाउस’ पक्षी यानि कि घरेलू जैसे। कौआ हमें बचपन में शायद उतना नहीं लुभा पाया, जितनी नन्ही गौरैया ने। कारण चाहे जो भी हो – कौए की कांव-कांव हो…
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घरेलू गौरैया के विलुप्त होने के पीछे सामूहिक हत्या बड़ा कारण
संजय कुमार / कई देशों से घरेलू गौरैया के विलुप्त होने के पीछे कई कारणों में एक बड़ा कारण गौरैया की सामूहिक हत्या भी शामिल है। चौंकाने वाली बड़ी बात यह है कि इतिहास में गौरैया को “कीट” मानकर बड़े पैमाने पर सामूहिक हत्या/कत्लेआम की घटना दर्ज हैं। चीन में “चार कीट अभियान” 1958 से…
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मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम पर संसदीय परामर्श समिति की बैठक
नई दिल्ली ,5 अगस्त/ पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कई राज्यों में मानव -वन्यजीव टकराव को कम करने और स्थान-विशिष्ट प्रबंधन दृष्टिकोण की जरूरत पर बल दिया है। आज नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति…
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“बेजोड़ टॉक्स” का 18वां एपिसोड बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया संरक्षक संजय कुमार पर
पटना:2-8-2026/ राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नितिन नीरा चंद्रा की चंपारण टॉकीज के ‘बेजोड़ टॉक्स, बिहार के जानेमाने हस्ताक्षर और गुमनाम प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दे रहा है। ‘बेजोड़ टॉक्स का 18 वां एपिसोड दो अगस्त को यूट्यूब पर रिलीज किया गया । इस एपिसोड में बिहार की राजकीय पक्षी “गौरैया” के संरक्षण में सक्रिय संजय कुमार…
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खतरे में प्रवासी पक्षियों की तीन सौ प्रजातियां: टूट रही है प्रकृति की वैश्विक कड़ी
हर साल अरबों प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हुए महाद्वीपों, महासागरों और अलग-अलग पारिस्थितिकी तंत्रों को जोड़ते हैं। ये पक्षी केवल मौसम बदलने के संकेतक नहीं हैं, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। लेकिन अब इन पर मंडराता खतरा तेजी से बढ़ रहा है। एक नए वैश्विक…
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अंतर्राष्ट्रीय बादलदार चीता दिवस : भारत ने प्रजाति संरक्षण को सुदृढ़ किया
नयी दिल्ली, चार अगस्त / भारत ने एशिया के सबसे कम दिखाई देने वाले जानवर में से एक बादलदार तेंदुए (क्लाउडेड लेपर्ड) के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उसके लिए संरक्षण कार्य योजना (सीएपी) शुरू की है। पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।यह घोषणा हर साल चार अगस्त को…

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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें 📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com
🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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