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गौरैया की आँखें है कमाल: बिना मुड़े देख लेती है दायें-बाएं
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया की छोटी और मासूम दिखने वाली आँखें वास्तव में प्रकृति की एक बेहतरीन इंजीनियरिंग हैं। इसकी आँखें गौरैया की असाधारण जीवनशैली को समझने में मदद करते हैं। आइए, इसकी आँखों की बनावट और देखने की क्षमता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं:- 3 लाख फोटोरिसेप्टर्स का असली मतलब: “हाई-डेफिनिशन” विज़न…
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गौरैया की आँखें है कमाल: बिना मुड़े देख लेती है दायें-बाएं
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पापा गौरैया जिंदाबाद : घोंसला बनाने से उड़ान सिखाने तक
संजय कुमार / गौरैया का जीवन भी इन्सान की तरह है। पापा और माँ गौरैया की भूमिका इन्सान की तरह होता है। वे घर-परिवार, बच्चों का लालन-पालन, सुरक्षा सहित हर दायित्व का निर्वहन करते हैं। नर और मादा गौरैया इन्सान की तरह ही पहले जोड़ा बनाते हैं। जोड़ा बनते ही हर वक्त साथ-साथ रहते है।…
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संजय कुमार/ घरेलू गौरैया की छोटी और मासूम दिखने वाली आँखें वास्तव में प्रकृति की एक बेहतरीन इंजीनियरिंग हैं। इसकी आँखें गौरैया की असाधारण जीवनशैली को समझने में मदद करते हैं। आइए, इसकी आँखों की बनावट और देखने की क्षमता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं:- 3 लाख फोटोरिसेप्टर्स का असली मतलब: “हाई-डेफिनिशन” विज़न…
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एक छत के नीचे दो दुनिया: कबूतर की दबंगई के बीच गौरैया का घर
संजय कुमार/ झारखण्ड के गोड्डा जिले के दिग्गी गाँव में घरेलू गौरैया और कबूतरों को साथ-साथ रहते, 14 जून 2026 को देखने को मिला। कबूतरों के लिए घर के बाहर बने लकड़ी के घरों में गौरैया ने भी घोसला बना लिया था। और मजे से कबूतर और गौरैया रह रहे थे। अमूमन कबूतर, गौरैया को…
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डाटा सेंटर्स पर गंभीर जलवायु जोखिम
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के पीछे भाग रही है। तकनीकी कंपनियां नए डाटा सेंटर बना रही हैं। सरकारें डिजिटल अर्थव्यवस्था को भविष्य की ताकत बता रही हैं, लेकिन इस तकनीकी दौड़ के बीच एक नया सवाल सामने आया है। अगर भविष्य डाटा सेंटरों में बसने वाला है, तो…
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पसंदीदा है गौरैया का गेहूँ चुगना
संजय कुमार / गेंहू चुगना घरेलू गौरैया का सबसे पसंदीदा काम है। कुछ किसान और कुछ लोग गौरैया को ‘खेत की दोस्त-दुश्मन’ दोनों मानते हैं। जबकि सच यह है कि जहाँ घरेलू गौरैया दाना चुगे, समझो वहां बरकत है। क्योंकि वह गिरा हुआ दाना ही खाती है, किसान का भंडार नहीं। बल्कि फसल में लगे…
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गौरैया की काला टाई ‘बिब’ है नर की पहचान
संजय कुमार / नर गौरैया के गले और स्तन पर अलग-अलग मात्रा में कालापन होता है। जबकि मादा गौरैया के गले कोई बिब नहीं होता है। सबसे बड़े काले धब्बे (बिब) वाले गौरैया में टेस्टोस्टेरोन का स्तर उच्चतम होता है और वे मादा गौरैया के लिए अधिक आकर्षक होते हैं। प्रजनन के मौसम के बाहर,…

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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें 📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com
🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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