Category: Blog
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पहाड़ों में गुम हो रही गौरैया की चीं-चीं
ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरणीय बदलावों से गुम हो रही है गौरैया सहित अन्य चिड़ियों की आवाज संजय कुमार/ घरेलू गौरैया का कम दिखाई देना या कुछ इलाकों से उसका गायब हो जाना केवल मैदानी क्षेत्रों की समस्या नहीं है। पहाड़ी इलाकों में भी गौरैया और अन्य पक्षियों की मौजूदगी और उनके प्राकृतिक आवास को लेकर…
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रसेट गौरैया: भूरे मुकुट और आकर्षक पंखों वाली खूबसूरत चिड़िया
संजय कुमार / रसेट गौरैया (Passer rutilans) गौरैया परिवार का एक सुंदर पक्षी है, जो अपने आकर्षक रंग-रूप और विशिष्ट पहचान के कारण पक्षी प्रेमियों का ध्यान खींचता है। इसके सिर पर भूरे रंग का मुकुट जैसा हिस्सा और छाती पर दिखाई देने वाली भूरी आभा इसे दूसरी गौरैयाओं से अलग पहचान देती है। इसके…
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जलवायु परिवर्तन से गौरैया को खतरा
संजय कुमार / गौरैया की संख्या में कमी या विलुप्ति के पीछे के कारणों में आहार की कमी, बढ़ता आवासीय संकट, कीटनाशक का व्यापक प्रयोग, जीवनशैली में बदलाव, प्रदूषण और मोबाइल फोन टावर से निकलने वाले रेडिएशन को दोषी बताया जाता रहा है, वहीँ एक बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन भी है। केवल गौरैया ही नहीं,…
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शुभंकर-गौरैया : संरक्षण का देता सन्देश
संजय कुमार/ घर आँगन से विलुप्त होती बचपन की नन्ही साथी, किसान मित्र, गौरैया का संरक्षण करने के लिए विश्व भर में मुहिम चल रहे हैं। संरक्षण को लेकर 20 मार्च 2010 को घोषित विश्व गौरैया दिवस से लगातार गौरैया संरक्षण से जन भागीदारी के साथ-साथ सरकारें भी जुड़ चुकी हैं। ‘आई लव स्पैरो’, स्लोगन…
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लोहे की गौरैया: संरक्षण का संदेश
संजय कुमार / बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया की चहचहाहट पटना के कंकड़बाग के कई इलाकों में सुनाई पड़ती है, फिर भी पहले वाली बात नहीं है। गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित करती खुद गौरैया लोगों के बीच आई है। पटना के कंकड़बाग चौराहे, टैम्पू स्टैंड के पास पिलर पर 2021 से बैठी लोहे की…
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गौरैया प्रजनन काल में ही घोंसला बनाती है
संजय कुमार / गौरैया प्रजनन काल (मुख्यतः मार्च से अगस्त) में ही घोंसला बनाती गौरैया या अन्य पक्षी घोंसला तभी बनाते हैं जब उन्हें अंडे देने और परिवार बढ़ाने होते हैं। सामान्यतः गौरैया सहित अधिकांश पक्षी दिन में पेड़ों या अन्य सुरक्षित ठिकानों पर आराम करते हैं और वहीं रात भी गुजारते हैं, जबकि घोंसले…
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फिल्मों में जीवन की राह दिखाती गौरैया
संजय कुमार / इंसानों के बीच रहने वाली विलुप्ति या गायब की कहानी बनी नन्ही चिड़िया गौरैया को साहित्य में बहुत स्थान मिला है। लोकगीतों में भी गौरैया ने स्थान पाया है। घर आंगन में फ़ुदकने वाली गौरैया को कहानी-कविता-गीत–संगीत में पिरो कर जीवंत किया गया है। देखा जाए तो साहित्य में गौरैया का विशेष…
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साहित्य में गौरैया
संजय कुमार / दुनिया भर में लोकगीतों, लोककथाओं और साहित्य में जिस पक्षी को सबसे ज्यादा जगह मिली है, वह ‘गौरैया’ है। देश के चर्चित साहित्यकारों ने कहानी, कविता, गीत-गजलों या यूं कहें हर विधा में गौरैया को जगह दी है। कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘नादान दोस्त’, प्रसिद्ध उपन्यासकार भीष्म साहनी की कहानी ‘दो…
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गौरैया के हैं कई नाम चिरैया,फुदकी,चेर,चिड़ी,चरूई
संजय कुमार / घर आँगन में चहकने-फुदकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया हमसे रूठ कर कही दूर चली गई है। कई गाँव, शहर यों कहे गली मोहल्लों में अब दिखाती ही नहीं। एक समय आएगा जब इसे इंटनेट पर देख आहे भरेंगे। गौरैया को हिंदी में गौरैया कहते हैं, तो वहीं, अंग्रेजी में स्पैरो और उर्दू…
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गौरैया की संख्या में कमी के पीछे कई कारण
मोबाइल फोन टावरों की भूमिका नहीं संजय कुमार / गौरैया की संख्या में कमी के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। इनमें मोबाइल टावर से निकलने वाली रेडियो तरंगों को भी एक संभावित कारण माना जाता है। हालांकि, यह कहना कि गौरैया की संख्या में गिरावट का मुख्य या निर्णायक कारण मोबाइल टावर ही हैं,…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन










