Category: Blog

  • गौरैया की संख्या में कमी के पीछे कई कारण

    गौरैया की संख्या में कमी के पीछे कई कारण

    मोबाइल फोन टावरों की भूमिका नहीं संजय कुमार / गौरैया की संख्या में कमी के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। इनमें मोबाइल टावर से निकलने वाली रेडियो तरंगों को भी एक संभावित कारण माना जाता है। हालांकि, यह कहना कि गौरैया की संख्या में गिरावट का मुख्य या निर्णायक कारण मोबाइल टावर ही हैं,…

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  • संग्रहालयों में भी सुरक्षित है गौरैया

    संग्रहालयों में भी सुरक्षित है गौरैया

    संजय कुमार / कभी क्रिकेट मैदान की घटना की गवाह बनी गौरैया, तो कभी महान पक्षी विज्ञानी सालिम अली के जीवन की दिशा बदलने वाली चिड़िया। गौरैया हमारे घर-आंगन, खिड़कियों और छतों पर चहचहाने वाली बेहद परिचित चिड़िया है। लेकिन गौरैया की कहानी केवल हमारे आसपास तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई संग्रहालयों में…

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  • गौरैया का परिवार सिर्फ दो पक्षियों का नहीं, पूरे मोहल्ले का समाज

    गौरैया का परिवार सिर्फ दो पक्षियों का नहीं, पूरे मोहल्ले का समाज

    संजय कुमार/ भारत के बर्डमैन डॉ. सालिम अली की आत्मकथा ‘The Fall of a Sparrow’ (1985) में एक घटना वर्णित है, जो आज भी मौजू है, जो लोग आज भी गौरैया का शिकार करते हैं। 10 साल के सालिम ने अपनी एयरगन से गौरैया का शिकार 1906-07 में किया था। शिकार के बाद उन्होंने अपनी…

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  •  सूरत के उधना स्टेशन है “स्पैरो जोन”

     सूरत के उधना स्टेशन है “स्पैरो जोन”

    संजय कुमार/ घर-आंगन की प्यारी सी नन्ही जान गौरैया को संरक्षित करने की दिशा में रेलवे ने ‘स्पैरो जोन’ बना कर मिसाल कायम किया है। गुजरात के सूरत का उधना स्टेशन को स्पैरो जोन (गौरैया का इलाका) बना कर गौरैया संरक्षण का अलख रेलवे जगा रहा है। यहाँ स्पैरो ज़ोन का बोर्ड लगा है जिस…

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  • खुद से बनाएं गौरैया का घोंसला

    खुद से बनाएं गौरैया का घोंसला

    संजय कुमार / गौरैया के लिए तरह-तरह के रंग-बिरंगे, साधारण-डिजाइनदार महंगे-सस्ते कृत्रिम घोंसला (60 रूपये से दो हजार रूपये तक) यों तो बाजार में मिल जाते हैं लेकिन खुद से भी बनाया जा सकता हैं। गौरैया का घोंसला बनाते समय सबसे जरूरी है कि वह गौरैया के लिए अनुकूल एवं सुरक्षित हो। कैसी लकड़ी लें?…

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  • डाक टिकट पर गौरैया की उड़ान

    डाक टिकट पर गौरैया की उड़ान

    संजय कुमार / ‘विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च 2010’ के मद्देनजर भारतीय डाक विभाग के द्वारा 9 जुलाई 2010 को विलुप्त होती गौरैया को संरक्षण देने और लोगों में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए डाक टिकट जारी किया था। यह डाक टिकट दो पक्षियों ‘गौरैया और रॉक कबूतर’ के सेट में जारी किया गया…

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  • प्राचीन ग्रंथों में गौरैया

    प्राचीन ग्रंथों में गौरैया

    संजय कुमार / गौरैया को देखकर शायद ही किसी के मन में यह विचार आता हो कि छोटी-सी नन्ही चिड़िया हजारों वर्ष पुरानी धार्मिक और साहित्यिक परंपराओं का भी हिस्सा रही है। घर-आंगन, मुंडेर, खिड़की, छज्जे और पेड़ों के बीच चहकने फुदकने वाली गौरैया लंबे समय से इंसान की जिंदगी के बेहद करीब रही है।…

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  • गौरैया के तीन स्नान: पानी, धूल और धूप

    गौरैया के तीन स्नान: पानी, धूल और धूप

    संजय कुमार / गौरैया सिर्फ चहचहाती नहीं, स्नान भी करती है और एक नहीं, तीन तरह से स्नान करती है।मसलन, पानी, धूल और धूप स्नान । घर आँगन में रखा/जमा पानी, सड़क किनारे जमा पानी, नल के पास जमा पानी या आपके रखे सकोरे के कम गहरे बर्तन में वह फुदक कर उतरती है। सर…

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  • नन्ही गौरैया की अद्भुत क्षमता उड़ान के दौरान नहीं टकराती किसी से

    नन्ही गौरैया की अद्भुत क्षमता उड़ान के दौरान नहीं टकराती किसी से

    संजय कुमार/ नन्ही गौरैया हो या कोई भी चिड़िया, उड़ते हुए सामने आने वाली बाधा को पहचान कर बच निकलने की अद्भुत क्षमता रखती है। जो उसे प्रकृति से मिली है।  लेकिन तेज उड़ान, कम रोशनी, कांच की इमारत, पतंग का मांझा और घनी वनस्पति के बीच कभी-कभी यह क्षमता चूक जाती है और नन्ही…

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  • गौरैया का जीवन चक्र और बच्चों की परवरिश

    गौरैया का जीवन चक्र और बच्चों की परवरिश

    संजय कुमार / सभी जीवजंतुओं का अपना -अपना जीवन काल होता है। साथ ही आकस्मिक -प्राकृतिक मौत भी। बात हमारे घर आँगन में चकने फुदकने वाली पबचपन की नन्ही साथी गौरैया की।  गौरैया का सामान्य जीवन काल परिस्थितियों के अनुसार लगभग 3 से 7 वर्ष तक माना जाता है। हालांकि, जंगल या प्राकृतिक वातावरण में…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन