Category: miscellaneous
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डॉल्फिन बचेंगी तो नदियाँ बचेंगी
“राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस: 5 अक्टूबर” राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य देश की डॉल्फिन प्रजातियों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है। भारत में 5 अक्टूबर को राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस मनाने की सिफारिश राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने 2022 में की थी। डॉल्फिन को स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र…
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भू-दृश्य बदलते बदलती है वन्यजीवन की दुनिया
हिमालय की ऊँचाइयों से लेकर हमारे तटीय जल तक, भू-दृश्य बदलते हैं और उनके साथ बदलती है वन्यजीवन की दुनिया। इस Wildlife Week, उन अनगिनत प्राकृतिक संसारों का जश्न मनाएँ जो भारत को इतना खास बनाते हैं। भारत की विविध भौगोलिक संरचना के कारण यहाँ का वन्यजीवन दुनिया के सबसे समृद्ध और अनोखे पारिस्थितिकी तंत्रों…
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गांधी और पर्यावरण : प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का दर्शन
महात्मा गांधी का पर्यावरण चिंतन आज के जलवायु संकट, बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के दौर में विशेष प्रासंगिकता रखता है। गांधी ने पर्यावरण संरक्षण को आधुनिक पर्यावरणवाद की तरह किसी स्वतंत्र राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, लेकिन उनके सादगी, संयम, स्वदेशी, ग्राम स्वराज, ट्रस्टीशिप और सीमित…
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वन्यजीव सप्ताह : प्रकृति के साथ जीने का संकल्प
2 से 8 अक्टूबर : वन्यजीवों के संरक्षण के साथ अपने भविष्य की रक्षा का अवसर संजय कुमार /जंगल में बाघ की दहाड़, नदी में डॉल्फिन की छलांग, आकाश में उड़ते गिद्ध, पेड़ों पर चहचहाते गौरैया सहित दूसरे पक्षी और घास के मैदानों में विचरण करते हिरण-ये केवल प्रकृति की सुंदर तस्वीरें नहीं हैं। बल्कि…
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कहां ‘भंवरा’ बन गया है करोड़ों के कारोबार का सूत्रधार..!!
“सिक्किम में बड़ी इलायची के खेत कई बार खेत कम और जंगल का हिस्सा ज्यादा लगते हैं। बड़ी इलायची यहां केवल कृषि की कहानी नहीं, जैव-विविधता और आजीविका के रिश्ते की कहानी भी है।” संजीव शर्मा / गीतकार आनंद बख्शी, संगीतकार हेमंत कुमार और गायक मोहम्मद रफी और आशा भोंसले की टीम जब फिल्म ‘आराधना’…
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हिंदूकुश हिमालय में फैल रहा सूक्ष्म प्लास्टिक प्रदूषण: जीवन- जल सुरक्षा पर बढ़ा खतरा
अरुणाचल प्रदेश। दुनिया के सबसे दुर्गम और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल हिंदूकुश हिमालय अब प्लास्टिक प्रदूषण की चपेट में है। बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों, ग्लेशियरों, नदियों, झीलों और पर्वतीय मिट्टी में सूक्ष्म प्लास्टिक की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और समुद्रों तक सीमित नहीं…
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नीम कॉरिडोर से पश्चिमी चंपारण में बदल रही है तस्वीर
पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा प्रखंड की सुगहा भवानीपुर पंचायत में पर्यावरण संरक्षण की एक पहल अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। सड़क के दोनों किनारों पर करीब 10 माह पहले लगाए गए लगभग 1,000 नीम के पौधे सामुदायिक सहयोग, नियमित देखभाल और लगातार निरीक्षण के कारण तेजी से विकसित हो रहे हैं। पौधों…
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गैंडा संरक्षण की कोशिशों से बढ़ी उम्मीद, लेकिन कई प्रजातियां अब भी संकट में
22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस संजय कुमार/ ‘वर्ल्ड राइनो डे’ (विश्व गैंडा दिवस) पर भारत गैंडों के संरक्षण में मिली एक बड़ी कामयाबी का जश्न मना रहा है। एक सींग वाले गैंडों को विलुप्त होने की कगार से बचाकर उनकी आबादी को फिर से बढ़ाना। उनके रहने की जगहों (हैबिटैट) को सुरक्षित रखने और…
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विश्व ओजोन दिवस : धरती की सुरक्षा कवच को बचाने की जिम्मेदारी
हर साल 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय है, “वैश्विक प्रयासों के माध्यम से ओजोन परत का संरक्षण, एक शीतल ग्रह के लिए” । यह दिन हमें उस अदृश्य परत की याद दिलाता है, जो धरती पर जीवन को सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणों से बचाने में महत्वपूर्ण…
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शाडू मिट्टी से भगवान गणेश की मूर्तियों का निर्माण पर्यावरण संरक्षण का सन्देश
महाराष्ट्र के जालना जिले में पांच हजार 348 लोगों ने एक साथ पर्यावरण अनुकूल शाडू मिट्टी से भगवान गणेश की मूर्तियों का निर्माण कर उल्लेखनीय विश्व कीर्तिमान बनाया है। इस उपलब्धि को गिनीज विश्व रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। यह आयोजन जालना में जे.ई.एस महाविद्यालय में आयोजित किया गया।…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन










