Category: miscellaneous

  • भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस से गोंडा में बचाव अभियान

    भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस से गोंडा में बचाव अभियान

    भारत की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस से एक गांगेय डॉल्फिन को पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में बचाया गया। गोंडा में एक सिकुड़ती हुई नहर में फंसी गंगा नदी की डॉल्फिन को भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस की मदद से 13 घंटे के ऑपरेशन के बाद बचाया लिया गया। यह मोबाइल यूनिट फंसे हुए डॉल्फिनों…

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  • हरियाली में छिपा इलाज: समय की मांग

    हरियाली में छिपा इलाज: समय की मांग

    मानव‌ कल्याण में एथनोबोटनी ( ETHNOBOTANY ) के उपयोग की आवश्यकता : आज के परिदृश्य में समय की मांग *प्रो. श्याम नंदन प्रसाद/ लोक वनस्पतिविज्ञान ( ETHNOBOTANY ) विज्ञान की वह शाखा है , जिसके अंतर्गत विभिन्न संस्कृतियों और आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा पौधों के पारंपरिक उपयोग जैसे दवा , भोजन और धार्मिक कार्यों…

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  • डायनासोर का साथी रहा कछुआ भी कहीं गायब न हो जाये

    डायनासोर का साथी रहा कछुआ भी कहीं गायब न हो जाये

    “विश्व कछुआ दिवस 23 मई “ संजय कुमार/ जी हां, कछुए इस धरती पर तब से हैं जब डायनासोर हुआ करते थे। कछुओं ने डायनासोर के साथ उल्कापिंड की टक्कर झेली, बर्फ युग देखा, महाद्वीपों को टूटते-बनते देखा। प्रकृति के खेल में आज डायनासोर नहीं हैं, लेकिन सच यह है कि इन्सान की वजह से…

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  • विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए कछुए

    विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए कछुए

    *विश्व कछुआ दिवस,23 मई* *हृतेश मिश्र / कछुआ पृथ्वी के प्राचीनतम जीवों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि 22 करोड़ वर्ष पहले से यह धरती पर मौजूद है। इसका अर्थ है कि इसने डायनासोर का उदय और अंत भी देखा है। इसका अनोखा कवच इसके जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। ऐसे…

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  • The Silent Crash

    The Silent Crash

    *Raj Kumar / Let’s be honest: when most of people hear the word “Biodiversity”, they picture a distant rainforest, a rare tiger, or a boring textbook chapter they had to memorize for an exam. It feels totally disconnected from your Actual life. But Today is International Biodiversity Day, and it’s time to bust a massive…

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  • Silent Symphony: Save Biodiversity

    Silent Symphony: Save Biodiversity

    *Amisha Kumari / Every morning, before the world fully awakens, nature begins its silent performance. Birds sing from hidden branches, sunlight slips gently through leaves, rivers continue their endless journey, and flowers bloom without seeking applause. These small moments, often ignored in the rush of human life, are not ordinary occurrences — they are living…

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  • जैव विविधता: धरती की सांस, हमारी ज़िंदगी

    जैव विविधता: धरती की सांस, हमारी ज़िंदगी

    *रिम्पी ऐश्वर्य/ जैव विविधता (Biodiversity) एक ऐसी प्रणाली जिसमें विभिन्न प्रकार के जीव (जैसे- पौधे, जानवर, सूक्ष्म जीव, कवक, इत्यादि) एक-दूसरे के साथ परस्पर संबंध स्थापित कर हमारे आस-पास के परिस्थितिक तंत्र(Ecosystem)और पर्यावरण को स्वस्थ और अनुकूल बनाते हैं। हम सभी की जिंदगी एक दूसरे के बराबर सहयोग पर आश्रित है। इसके बहुत उदहरण हैं…

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  • पर्यावरण संकट से  मुक्ति  में आम नागरिकों की  भागीदारी

    पर्यावरण संकट से मुक्ति में आम नागरिकों की भागीदारी

    प्रो. श्याम नंदन प्रसाद / आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है । इस संकट से मुक्ति पाने की दिशा में सरकारी स्तर पर निःसंदेह प्रयास किए जा रहे हैं, किंतु आम नागरिकों की भागीदारी के बिना इस लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51- A (g) के अंतर्गत…

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  • पर्यावरण संकट से जूझती पूरी दुनिया

    पर्यावरण संकट से जूझती पूरी दुनिया

    प्रो. (डॉ.) श्याम नंदन प्रसाद/ आज सम्पूर्ण विश्व गंभीर पर्यावरण संकट का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन मानव अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुका है। यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि मुख्यतः मानव जनित गतिविधियों का परिणाम है। यदि समय रहते ठोस…

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  • अमेरिकी जादूगर के नीले जादू की क़ैद में हिमाचल..!!

    अमेरिकी जादूगर के नीले जादू की क़ैद में हिमाचल..!!

    संजीव शर्मा / दुनिया भर के लोगों को अपने श्वेत-बर्फीले हुस्न, आकाश छूते चीड़-देवदार और प्रकृति के हरियाली भरे श्रृंगार से अपनी ओर खींचने वाला हिमाचल प्रदेश इन दिनों एक अमेरिकी जादूगर के नीले जादू के मोहपाश में बंधा हुआ है। आमतौर पर जादूगर वैसे तो काला जादू करते हैं लेकिन इस विदेशी जादूगर ने…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन