Author: admin
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अमेरिकी जादूगर के नीले जादू की क़ैद में हिमाचल..!!
संजीव शर्मा / दुनिया भर के लोगों को अपने श्वेत-बर्फीले हुस्न, आकाश छूते चीड़-देवदार और प्रकृति के हरियाली भरे श्रृंगार से अपनी ओर खींचने वाला हिमाचल प्रदेश इन दिनों एक अमेरिकी जादूगर के नीले जादू के मोहपाश में बंधा हुआ है। आमतौर पर जादूगर वैसे तो काला जादू करते हैं लेकिन इस विदेशी जादूगर ने…
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‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम गुजरात के सासन गिर में
“शेर भारत के गौरव, साहस और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है; प्रोजेक्ट लायन गिर क्षेत्र में एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण को मजबूत कर रहा है: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री” नई दिल्ली: 14 MAY 2026 / अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन 2026 से पहले आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला के…
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‘Lion’ Species Spotlight Programme at Sasan Gir Gujarat,
*‘Gir’ a living example of how Economic Progress can go hand in hand with Wildlife Conservation through an Ecological Approach: Chief Minister (Gujarat)*. Lion is a symbol of India’s pride, courage and natural heritage; Project Lion strengthening Long-Term Conservation of Asiatic Lions in Gir Landscape: Bhupender Yadav,Union Minister for Environment, Forest and Climate Change. New…
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लौट आओ नन्हे दोस्त गौरैया
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया और इंसान की दोस्ती नई नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी है। इन्सान जहाँ-जहाँ गया पीछे-पीछे नन्ही गौरैया उसके घर-आँगन या आसपास चली आई और साथ-साथ रहने लगी। बच्चों का बचपन उसके साथ गुजरा, तो खेतों में लगी फसलों एवं बाग़-बगीचा के फल-फूल-सब्जी को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों को अपना आहार बना…
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देश भर में गूंजेगी ‘प्रोजेक्ट बिग कैट’ की दहाड़
नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बड़ी बिल्लियों (Big Cats) के संरक्षण में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित करने के लिए एक मेगा अभियान की शुरुआत की है। मंत्रालय देश के विभिन्न हिस्सों में पांच प्रमुख प्रजातियों—बाघ, एशियाई शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता—पर आधारित विशेष विषयगत कार्यक्रमों का…
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गौरैया के लिए मोबाइल फोन टावर कितना खतरनाक ?
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया की संख्या में कमी के पीछे के कारणों में एक बड़ा कारण मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन को बताया जाता है। स्टेट ऑफ इंडियंस बर्ड्स ने इसे पुख्ता सबूत नहीं माना है। जबकि गौरैया की संख्या में कमी के पीछे आहार की कमी, बढ़ता आवासीय संकट, कीटनाशक का व्यापक प्रयोग,…
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बिग कैट्स के संरक्षण के लिए जुटेगा विश्व
1 और 2 जून को ‘इंटरनेशनल बिग कैट्स एलाइंस समिट‘ दिल्ली में नई दिल्ली: भारत वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। आगामी 1 और 2 जून को देश की राजधानी नई दिल्ली में ‘इंटरनेशनल बिग कैट्स एलाइंस (IBCA) समिट‘ का आयोजन किया जाएगा। इस महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य…
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पटना कॉलेज में पौधारोपण-सकोरा वितरण
पटना:12-5-2026 / पटना कॉलेज में एनवायरनमेंट वॉरियर्स एवं हमारी गौरैया के द्वारा वृक्षारोपण एवं पक्षियों के लिए घोंसला एवं सकोरा लगाने का कार्यक्रम रजनीश कुमार के नेतृत्व में मंगलवार को किया गया। जिसमें पटना कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार के द्वारा वृक्षारोपण किया गया साथ ही महाविद्यालय परिसर में पक्षियों के लिए दाना-पानी के…
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गौरैया: नेचुरल कीटनाशक है
संजय कुमार / गौरैया कीट-पतंगे खाकर किसानों की मदद करती है। एक गौरैया एक दिन में कई कीड़े खा जाती है। इसके आहार में 60 प्रतिशत हिस्सा कीड़े होते हैं। खासकर बच्चों को प्रोटीन के लिए कैटरपिलर, कीड़ा-मकोड़ा, गमला या मिटटी में लगे छोटे कीड़े आदि ही खिलाती है। खेतों में फसल और सब्जी में…
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अब विज्ञापन में भी ‘गौरैया’
संजय कुमार/सिनेमा, साहित्य, लोक गीत कला-कथा के बाद अब विज्ञापन में भी गौरैया नजर आने लगी है। कई शहर-गाँव-मोहल्ला के घर-आँगन में चहकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया के साथ गायब या विलुप्ति जैसे शब्द जुड़ चुकें है तो वही, उसकी घर वापसी के लिए संरक्षण अभियान भी जोरशोर से चल रहा है। और,सफलता भी मिल…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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