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  • अमेरिका में गौरैया का आना

    अमेरिका में गौरैया का आना

    संजय कुमार/ 1800 के दशक में, यूरोप की कई पक्षी प्रजातियों को अमेरिका में लाने की कोशिशें की गईं। इनमें से कुछ ही प्रजातियां बच पाईं, लेकिन घरेलू गौरैया (हाउस स्पैरो) एक अपवाद रहा। 1850 के दशक में, न्यूयॉर्क शहर के सेंट्रल पार्क में घरेलू गौरैया को इसलिए लाया गया था ताकि कीड़ों से पेड़ों…

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  • गावं के लिए जानकी तांती ने कुआं को ए.टी.एम तो तालाब को बैंक बनाया

    गावं के लिए जानकी तांती ने कुआं को ए.टी.एम तो तालाब को बैंक बनाया

    संजय कुमार / बिहार का जमुई जिला का केडिया गाँव के ग्रामीण कुआं को अपना ए.टी.एम और तालाब को अपना बैंक मानते हुये इसका जल संरक्षण करते हैं। गाँव को पानी की समस्या से उबारने और जल संचय-संरक्षण के लिए संघर्षरत केडिया के ग्रामीण जानकी बाबा से चर्चित जानकी तांती ने ग्रामीणों की मदद से…

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  • गौरैया  830 से ज़्यादा तरह की चीज़ें खाती हैं

    गौरैया  830 से ज़्यादा तरह की चीज़ें खाती हैं

    संजय कुमार / घरेलू गौरैया सहभोजी पक्षी (कमैन्सल बर्ड) यानी इंसान पर निर्भर रहने वाली चिड़िया हैं। गौरैया अपना 90 प्रतिशत समय घोंसले और भोजन स्थल से दो से पांच किलोमीटर के दायरे में ही बिताती है। गौरैया के आहार में प्रमुख बीज होता है लेकिन 830 से ज़्यादा तरह की चीज़ें खाती है। कस्टो…

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  • ‘एक ही चिड़िया,दो अलग जिंदगी’ गाँव-शहर की घरेलू गौरैया

    ‘एक ही चिड़िया,दो अलग जिंदगी’ गाँव-शहर की घरेलू गौरैया

    संजय कुमार/ घरेलू गौरैया जो पासर डोमेस्टिकस परिवार की एक छोटी पक्षी है, दुनिया के अधिकांश हिस्सों में ग्रामीण और शहरी इलाकों में पायी जाती है। भले ही एक चिड़ियाँ है लेकिन गाँव और शहर की गौरैया की अलग-अलग जिन्दगी है। बदलते परिवेश में पिछले दो दशक में गांव और शहर की गौरैया की लाइफस्टाइल…

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  • प्रवास बदल रही है घरलू गौरैया

    प्रवास बदल रही है घरलू गौरैया

    संजय कुमार / हमारे घर आंगन में चहकने-फुदकने वाली घरेलू गौरैया नन्ही चिड़ियाँ बचपन की साथी आज कई गाँव और शहर  के घर-आँगन से रूठ कर कहीं और चली गयी है। आमतौर पर दिखने वाली गौरैया कही बड़ी तादाद में दिखती है। कहीं बमुश्किल से दिखती है, तो कहीं बिलकुल नहीं। देश की राजधानी दिल्ली…

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  • मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए कोयंबटूर में उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत

    मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए कोयंबटूर में उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत

    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया उद्घाटन, राष्ट्रीय पोर्टल भी लॉन्च; सह-अस्तित्व को बताया पारिस्थितिक स्थिरता का आधार कोयंबटूर, 10 जुलाई: मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने के उद्देश्य से केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कोयंबटूर स्थित भारतीय वन्यजीव…

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  • दिल्ली में गौरैया : प्रयास को चाहिये पंख

    दिल्ली में गौरैया : प्रयास को चाहिये पंख

    संजय कुमार/ हमारे घर आंगन में चहकने-फुदकने वाली घरेलू गौरैया की स्थिति देश भर में अच्छी नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली की राजकीय पक्षी गौरैया की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। कुछ इलाकों में ही यह दिखती। हाल बेहाल है। खासकर शहरी इलाकों में । ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं है तो कहीं नहीं।…

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  • सीबीआई-डीआरआई की  कार्रवाई में वन्यजीव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश

    सीबीआई-डीआरआई की कार्रवाई में वन्यजीव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश

    53 संरक्षित जानवरों/पक्षियों को बचाया गया नई दिल्ली : 09.07.2026 / सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) और डीआरआई (DRI), मुंबई ने वाइल्डलाइफ़ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB), मुंबई/कोलकाता की मदद से एक संयुक्त ऑपरेशन में 15 स्लो लोरिस, 2 बिंटुरोंग, 28 स्टार कछुए, 6 इजिप्टियन गिद्ध और 2 शिकरा पक्षियों को बरामद किया और बचाया। ये…

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  • भारत के बाघ क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत, प्रबंधन और संरक्षण पर चर्चा

    भारत के बाघ क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत, प्रबंधन और संरक्षण पर चर्चा

    कोयंबटूर में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की 29वीं बैठक की में भारत के बाघ क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करने, प्रबंधन के तरीकों को बेहतर बनाने और संरक्षण पर चर्चा की गई नई दिल्ली 9 जुलाई 26 / राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 29वीं बैठक आज केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी (सीएएसएफओएस),  कोयंबटूर,  तमिलनाडु में…

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  • दो बहनें: चुनिया और मुनिया

    दो बहनें: चुनिया और मुनिया

    कहानी / आशा प्रसाद :  बहुत समय पहले की बात है। हरे-भरे एक गाँव में दो चिड़ियाँ रहती थीं—चुनिया और मुनिया। दोनों बहनें थीं और हमेशा साथ-साथ रहतीं। सुबह सूरज की किरणों के साथ उड़ान भरतीं, खेतों में दाना चुगतीं, तालाब के किनारे पानी पीतीं और शाम को अपने छोटे-से मिट्टी और खपरैल वाले घर…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन