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  • बिहार में मिला देश का सबसे पुराना वटवृक्ष

    बिहार में मिला देश का सबसे पुराना वटवृक्ष

    (विश्व पर्यावरण दिवस 2026 : 5जून) निशांत रंजन / इतिहास की किताबों में दर्ज कई साम्राज्य आए और चले गए. पीढ़ियां बदलीं, शहर का स्वरूप बदला, बिहार के मुंगेर में इन सारे बदलाव का साक्षी आज भी मौजूद है. दरअसल, मुंगेर में देश का सबसे पुराने पेड़ की पहचान की गयी है. वैज्ञानिक पद्धति (कार्बन…

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  • बढ़ते वैश्विक ताप से संकट में खेती

    बढ़ते वैश्विक ताप से संकट में खेती

    “संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने जिस खतरे की ओर ध्यान खींचा है, वह केवल तापमान बढ़ने की खबर नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता के सबसे महत्त्वपूर्ण आधार- कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराता संकट है।” नृपेंद्र अभिषेक नृप/ धरती जब सूरज के ताप से झुलसने लगे, तब केवल मौसम नहीं बदलता, जीवन का पूरा संतुलन…

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  • गौरैया की हुई घर वापसी

    गौरैया की हुई घर वापसी

    पटना। गौरैया के पलायन के पीछे ध्वनि प्रदूषण अहम है। वाहनों हो या डीजे की कानफाड़ू शोर। इससे घरेलू गौरैया प्रभावित होती है। पटना के रामकृष्णनगर में साहित्यकार अशोक कुमार के घर और आसपास सैकड़ो की संख्या में गौरैया थी । सालों से अशोक कुमार दाना-पानी रखते थे।  लेकिन वर्ष 2024 में गौरैया इलाके को…

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  • पक्षियों के  कृत्रिम घोंसले को लेकर उठा सवाल

    पक्षियों के कृत्रिम घोंसले को लेकर उठा सवाल

    संजय कुमार/ घर-आंगन और इंसान बीच रहने वाली घरेलू गौरैया यानी हाउस स्पैरो की विलुप्ति की दास्ताँन के बीच उसकी घर वापसी की पहल दुनिया भर में चल रही है। विलुप्ति के कारणों में से आवासीय संकट और पेड़ों का लगातार कम होना ने गौरैया सहित दूसरी चिड़ियों को संकट में डाल, पलायन या विलुप्ति…

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  • गौरैया: नाम की कहानी और भाषाई यात्रा

    गौरैया: नाम की कहानी और भाषाई यात्रा

    संजय कुमार / घर आँगन में चहकने-फुदकने वाली नन्ही चिड़ियाँ को हिंदी में गौरैया तो  अंग्रेजी में स्पैरो और उर्दू में चिडियां से पुकारा जाता है यों तो भारत में लोकल भाषा/बोलियों में इसके कई नाम है। सिंधी  में  झिरकी, भोजपुरी  में  चिरई, बुन्देली  में  चिरैया  कहते हैं। कई राज्यों में भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता…

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  • पक्षियों की चहचहाहट बताएगी संख्या, एआई करेगा गणना

    पक्षियों की चहचहाहट बताएगी संख्या, एआई करेगा गणना

    मोहन भट्ट/ हल्द्वानी। उत्तराखंड में पहली बार पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की संख्या का पता लगाने के लिए ‘वाइल्डलाइफ एकॉस्टिक रिकॉर्डर’ और एआई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।हल्द्वानी वन प्रभाग में करीब एक सप्ताह पहले शुरू की गईइस अनूठी पहल के तहत चार विशेष रिकॉर्डर खरीदे गए हैं। इन्हें वन प्रभाग की पांचों…

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  • घरेलू गौरैया IUCN रेड लिस्ट में, श्रेणी कम चिंताजनक

    घरेलू गौरैया IUCN रेड लिस्ट में, श्रेणी कम चिंताजनक

    संजय कुमार / घरेलू गौरैया (House Sparrow – Passer domesticus) मनुष्य के सबसे निकट रहने वाले पक्षियों में से एक है। कभी यह हर आँगन, छत और खपरैल वाले घर की पहचान हुआ करती थी, लेकिन आज कई शहरों,गाँवों और कस्बों में इसकी चहचहाहट सुनाई देना दुर्लभ होता जा रहा है। यही कारण है कि…

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  • सोनपुर मंडल ने चलाया  जल एवं ऊर्जा संरक्षण जागरूकता अभियान

    सोनपुर मंडल ने चलाया जल एवं ऊर्जा संरक्षण जागरूकता अभियान

    सोनपुर,01 जून 2026/ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को बढ़ावा देने हेतु सोनपुर रेल मंडल द्वारा विभिन्न जागरूकता एवं संरक्षणात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस क्रम में उत्पादन इकाइयों तथा अन्य रेलवे प्रतिष्ठानों में जहां भी संभव हो, जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया…

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  • भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस से गोंडा में बचाव अभियान

    भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस से गोंडा में बचाव अभियान

    भारत की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस से एक गांगेय डॉल्फिन को पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में बचाया गया। गोंडा में एक सिकुड़ती हुई नहर में फंसी गंगा नदी की डॉल्फिन को भारत की पहली डॉल्फिन एम्बुलेंस की मदद से 13 घंटे के ऑपरेशन के बाद बचाया लिया गया। यह मोबाइल यूनिट फंसे हुए डॉल्फिनों…

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  • वैंकूवर में है गौरैया की विशालकाय मूर्ति

    वैंकूवर में है गौरैया की विशालकाय मूर्ति

    संजय कुमार / ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा में समुद्री किनारे पर स्थित ‘द बर्ड्स’ शहर से चर्चित शहर वैंकूवर है, जहाँ गौरैया- हाउस  स्पैरो  की विशालकाय मूर्ति लगी है। द बर्ड्स में मायफैनवी मैकलेओड द्वारा घरेलू गौरैया को चित्रित करने वाली बाहरी मूर्तियों की एक जोड़ी शामिल है, जिसे 2010 के शीतकालीन ओलंपिक के बाद दक्षिणपूर्व…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन