Author: admin
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गौरैया के लिए कितना कारगर हैं रंगे कृत्रिम घोंसले?
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया का हमारे घर-आँगन से मुँह मोड़ने के पीछे आवासीय संकट एक बड़ा कारण है। बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के जंगलों ने गौरैया के प्राकृतिक ठिकानों को छीन लिया है। ऐसे में गौरैया की ‘घर वापसी’ के लिए कृत्रिम घोंसले लगाने का अभियान ज़ोर-शोर से चल रहा है। आज बाज़ार में प्लाईवुड,…
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100 में 80 मछलियों की किस्में विलुप्ति के कगार पर
संवाददाता, पटना/ बिहार की नदियों, चौर, आर्द्रभूमि और झीलों से समृद्ध बिहार में कभी 100 से अधिक छोटी-बड़ी देसी मछली प्रजातियां प्राकृतिक रूप से पायी जाती थीं. लेकिन, अब इनमें से कई प्रजातियां तेजी से गायब हो रही हैं. सौ में लगभग 20 प्रजाति की मछली ही बिहार में मिल रही है. वर्तमान में रोहू…
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जलवायु परिवर्तन से लड़ेंगी जीविका दीदी
संवाददाता ,पटना / ग्रामीण महिलाओं को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निबटने के लिए सशक्त बनाने की दिशा में एक पहल की गयी है. जीविका और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के बीच सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड लैंगिक समानता की स्थापना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है.यह केंद्र एलएमएनयू के गृह विज्ञान विभाग…
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गौरैया के लिए कितना कारगर हैं पेंटेड कृत्रिम घोंसले?
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया का हमारे घर-आँगन से मुँह मोड़ने के पीछे आवासीय संकट एक बड़ा कारण है। बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के जंगलों ने गौरैया के प्राकृतिक ठिकानों को छीन लिया है। ऐसे में गौरैया की ‘घर वापसी’ के लिए कृत्रिम घोंसले लगाने का अभियान ज़ोर-शोर से चल रहा है। आज बाज़ार में प्लाईवुड,…
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पर्यावरण मित्र सम्मान से नवाजे जाएंगे प्रो. श्याम नंदन प्रसाद
निशांत रंजन / पटना :18 मई 2026/ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट और उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. श्याम नंदन प्रसाद, पर्यावरणविद् का चयन समाजसेवा में अग्रणी, प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्था कमलादेवी जनसेवा संस्थान (रजि.) राजस्थान द्वारा अति प्रतिष्ठित ” पर्यावरण मित्र सम्मान , 2026 ” के लिए किया गया है । संस्था द्वारा राष्ट्रीय…
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गौरैया एक पत्नीक होती है
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया के रोचक पक्षी है। जो इंसान के बेहद करीब और कई मायने में मिलती – जुलती छवि लिए रहती है। गौरैया एक पत्नीक होती हैं, और वे अपने साथी के साथ एक मजबूत बंधन बनाती हैं। साथ ही वे अपने घोंसले के स्थान से भी बहुत जुड़ी हुई होती हैं। प्रजनन…
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टेक्नोलॉजी और नेचर-बेस्ड समाधानों से शहरों में जैव विविधता बढ़ाने पर एक दिवसीय विचार-मंथन सत्र”
पटना, 16 मई 2026/ राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना, अशोक राजपथ में शनिवार को “प्रौद्योगिकी संचालित एवं प्रकृति आधारित समाधानों के माध्यम से बुनियादी ढांचे और परिदृश्य वास्तुकला योजना में शहरी जैव विविधता का एकीकरण” विषय पर एक दिवसीय विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया गया।मौके पर एनआईटी पटना के एचएजी प्रोफेसर प्रो. रमाकर झा ने कहा…
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पर्यावरण संकट से जूझती पूरी दुनिया
प्रो. (डॉ.) श्याम नंदन प्रसाद/ आज सम्पूर्ण विश्व गंभीर पर्यावरण संकट का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन मानव अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुका है। यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि मुख्यतः मानव जनित गतिविधियों का परिणाम है। यदि समय रहते ठोस…
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गौरैया संरक्षण के लिए कानूनी ढाल है वन्यजीव(संरक्षण)अधिनियम
संजय कुमार/ घर-आँगन में चहकने-फुदकने, बचपन की साथ और किसान मित्र घरेलू गौरैया के संरक्षण को लेकर भारत में कोई अलग से ‘गौरैया अधिनियम’ यानि कानून नहीं बना है, लेकिन इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव कानून और विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। खेतों में बढ़ता कीटनाशक का…
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गौरैया एक सर्वहारा पक्षी है मांसाहारी नहीं
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया एक सर्वाहारी पक्षी है। मांसाहारी जीव नहीं है। इसके आहार में किट,पतंगा शामिल है। खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों का भक्षण करना गौरैया पसंद करती है और उसे अपने बच्चों को भी खिलाती हैं। साथ ही इन्सान के घरों में प्रवेश कर अनाज के साथ कीड़े-मकोड़े को खाती…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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