Author: admin
-

पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में गौरैया और पर्यावरण
संजय कुमार / पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में गौरैया और पर्यावरण अहम मुद्दा है। विश्व भर में गौरैया की विलुप्त का सवाल उठता रहता है तो वही पर्यावरण के ऊपर बढ़ते खतरे ने विश्व को चिंतित कर रखा है। प्रकृति का फेंफड़ा यानी पेड़ों की बेइंतहा कटाई और उजड़ते वन क्षेत्र से जलवायु परिवर्तन जैसी…
-

वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की अहम भूमिका, 1134 संरक्षित क्षेत्र अधिसूचित
नई दिल्ली। 8 -3 -2026 / भारत की वन स्थिति रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 के अनुसार, देश का वन और वृक्ष आवरण 8,27,356.95 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17 प्रतिशत है। आईएसएफआर 2021 के पिछले आकलन की तुलना में देश के वन और वृक्ष आवरण में 1445.81 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि…
-

अमेरिका से यूरोप तक धधक रहे जंगल, आग से रिकॉर्ड नुकसान
चिंताजनक: स्पेन में खतरा कम हुआ, लेकिन टला नहीं, फ्रांस में आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका, बड़े पैमाने पर जंगलों और खेती की जमीन बर्बाद किया लाकानाउ/वॉशिंगटन, एजेंसी। करीब 20 दिन से ज्यादा समय से यूरोप के जंगल धधक रहे हैं। फ्रांस, स्पेन में आग का खतरा कम हुआ है लेकिन…
-

“बेजोड़ टॉक्स” का 18वां एपिसोड बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया संरक्षक संजय कुमार पर
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नितिन नीरा चंद्रा की चंपारण टॉकीज के ‘बेजोड़ टॉक्स, बिहार के जानेमाने हस्ताक्षर और गुमनाम प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दे रहा है। ‘बेजोड़ टॉक्स का 18 वां एपिसोड दो अगस्त को यूट्यूब पर रिलीज किया गया । इस एपिसोड में बिहार की राजकीय पक्षी “गौरैया” के संरक्षण में सक्रिय संजय कुमार पर…
-

खास अंदाज से सृजन करती है गौरैया
संजय कुमार / अकसर गौरैया झुण्ड में दिखती है। झुण्ड में इनकी संख्या चार से लेकर सौ तक रहती है। अकेले या इक्का – दुक्का वहीं जाती है जहां वह परिचित होती है। दाना-पानी के लिये एक आती भी है तो दूसरी भी पहुंच जाती है। जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में ये झुण्ड में…
-

विश्व में डाक टिकट से गौरैया संरक्षण
संजय कुमार / गौरैया पर भारत सहित तीन दर्जन से अधिक देशों ने डाक टिकट जारी कर गौरैया संरक्षण का सन्देश देने का काम किया है। इनमें भारत, इटली, बांग्लादेश, बेलारूस, एल्डर्नी वेस्ट कोस्ट, बहरीन, असेंशियन द्वीप, बोस्ना और, हर्सेगोविना, बेल्जियम, बुल्गारिया, काबो वर्दे, सेंट यूस्टैटियस, कैरेबियन नीदरलैंड, क्यूबा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, इस्टोनिया, फ़ोरयार (फ़ैरो…
-

‘सोनकंठी गौरैया’
संजय कुमार / ‘सोनकंठी गौरैया’ की कहानी कुछ अलग ही है। बिहार के मुंगेर में इसे बड़े झुंड में देखकर पक्षी प्रेमी उत्साहित हैं। यह भारत में दिखती तो है लेकिन इसकी पहुंच हमारी पारम्परिक घरेलू गौरैया की तरह घरों तक नहीं है। हां, इसे छत्तीसगढ़, बस्तर और उड़ीसा आदि के जंगलों में कभी कभार…
-

संशोधित पीएम उत्सर्जन मानकों की समय-सीमा 1 अक्टूबर तक बढ़ी
दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों को राहत नई दिल्ली, 31 जुलाई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए संशोधित पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन मानकों के कार्यान्वयन की समय-सीमा बढ़ा दी है। आयोग ने अपने वैधानिक निदेश संख्या-98 में संशोधन करते…
-

गाय, गोबर और गौरैया
संजय कुमार / गाय और गोबर का संबंध गौरैया संरक्षण में अति महत्वपूर्ण है। जहां गाय और गोबर होगा वहाँ गौरैया होगी बल्कि दिखती है। वजह हैं, गौरैया गाय के गोबर से निकले अपचे भोजन को तो खाती ही है, बाद में जब वह सड़ जाता है तो उसमें से जो निकलने वाले कैटरपिलर्स यानी…
Latest News

संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें 📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com
🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
You May Have Missed












