संजय कुमार / नर गौरैया के गले और स्तन पर अलग-अलग मात्रा में कालापन होता है। जबकि मादा गौरैया के गले कोई बिब नहीं होता है। सबसे बड़े काले धब्बे (बिब) वाले गौरैया में टेस्टोस्टेरोन का स्तर उच्चतम होता है और वे मादा गौरैया के लिए अधिक आकर्षक होते हैं। प्रजनन के मौसम के बाहर, बिब भूरे पंखों से ढका रहता है।
आखिय बिब है क्या ? नर गौरैया का ‘काला टाई’ है जो चोंच के ठीक नीचे, गले से लेकर छाती तक फैला काला धब्बा है। आकार सबका अलग होता है । किसी का बिब छोटा-सा तिलक जैसा, किसी का पूरी शर्ट जैसी काली। बिब यानि टेस्टोस्टेरोन, वैज्ञानिकों ने 1960 से इस पर रिसर्च की है और जितना बड़ा बिब, उतना ज्यादा टेस्टोस्टेरोन-मर्दाना हॉर्मोन। बड़े बिब वाले नर में इसका लेवल 2-3 गुना ज्यादा होता है। इसका मतलब है ज्यादा दबंग, ज्यादा स्वस्थ । बीमारी, भूख या परजीवी हों तो बिब छोटा रह जाता है। यानी बिब ‘हेल्थ सर्टिफिकेट’ है।
मादा गौरैया सीधे बड़े बिब वाले नर को चुनती है। जो प्रजनन के लिए बेहतर होते हैं। प्रजनन काल फरवरी-जुलाई के दौरान नर की चोंच काली हो जाती है, और बिब के पंखों की भूरी नोक झड़ जाती है। अंदर का एकदम काला हिस्सा दिखने लगता है। काला धब्बा दूर से चमकता है, भूरा रंग छाल जैसा लगता है। पुराना बिब नया नहीं उगता पंख वही रहते हैं, बस नोक का रंग बदलता है। अगले सीजन में नोक घिसकर फिर काला बिब बाहर आ जाता है। अक्सर बड़े बिब वाला गौरैया दूसरे नर के आते ही उसके सामने सीना फुलाकर खड़ा हो जाता है, छोटा बिब वाला खुद भाग जाता है।
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