Author: admin
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव बने नरेंद्र भूषण
नई दिल्ली ,01 अक्तूबर 2026/ उत्तर प्रदेश कैडर के 1992 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी नरेंद्र भूषण ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव का पदभार संभाल लिया है। श्री भूषण को केंद्र और राज्य सरकारों में तीन दशकों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है। उन्हें ऊर्जा, बुनियादी…
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पर्यावरणीय योद्धाओं को मिला ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार
नई दिल्ली /केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 29 सितम्बर को नई दिल्ली में चौथे ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार समारोह और ‘इको वॉरियर’ सम्मेलन की अध्यक्षता की। इन कार्यक्रमों को भारतीय वन सेवा संघ (आईएफएसए) और ‘इंडियन मास्टरमाइंड्स’ ने आयोजित किया। वन, वन्यजीवन और पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने…
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गौरैया प्रजनन काल में ही घोंसला बनाती है
संजय कुमार / गौरैया प्रजनन काल (मुख्यतः मार्च से अगस्त) में ही घोंसला बनाती गौरैया या अन्य पक्षी घोंसला तभी बनाते हैं जब उन्हें अंडे देने और परिवार बढ़ाने होते हैं। सामान्यतः गौरैया सहित अधिकांश पक्षी दिन में पेड़ों या अन्य सुरक्षित ठिकानों पर आराम करते हैं और वहीं रात भी गुजारते हैं, जबकि घोंसले…
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दिल्ली में वायु प्रदूषण पर केंद्र और दिल्ली सरकार की उच्चस्तरीय बैठक
37 हॉटस्पॉट पर 10 अक्टूबर तक जनभागीदारी, प्रदूषण के स्रोतों पर समन्वित कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान नई दिल्ली, 28 सितंबर। दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली की मुख्यमंत्री के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर वायु…
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कहां ‘भंवरा’ बन गया है करोड़ों के कारोबार का सूत्रधार..!!
“सिक्किम में बड़ी इलायची के खेत कई बार खेत कम और जंगल का हिस्सा ज्यादा लगते हैं। बड़ी इलायची यहां केवल कृषि की कहानी नहीं, जैव-विविधता और आजीविका के रिश्ते की कहानी भी है।” संजीव शर्मा / गीतकार आनंद बख्शी, संगीतकार हेमंत कुमार और गायक मोहम्मद रफी और आशा भोंसले की टीम जब फिल्म ‘आराधना’…
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फिल्मों में जीवन की राह दिखाती गौरैया
संजय कुमार / इंसानों के बीच रहने वाली विलुप्ति या गायब की कहानी बनी नन्ही चिड़िया गौरैया को साहित्य में बहुत स्थान मिला है। लोकगीतों में भी गौरैया ने स्थान पाया है। घर आंगन में फ़ुदकने वाली गौरैया को कहानी-कविता-गीत–संगीत में पिरो कर जीवंत किया गया है। देखा जाए तो साहित्य में गौरैया का विशेष…
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हिंदूकुश हिमालय में फैल रहा सूक्ष्म प्लास्टिक प्रदूषण: जीवन- जल सुरक्षा पर बढ़ा खतरा
अरुणाचल प्रदेश। दुनिया के सबसे दुर्गम और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल हिंदूकुश हिमालय अब प्लास्टिक प्रदूषण की चपेट में है। बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों, ग्लेशियरों, नदियों, झीलों और पर्वतीय मिट्टी में सूक्ष्म प्लास्टिक की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और समुद्रों तक सीमित नहीं…
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साहित्य में गौरैया
संजय कुमार / दुनिया भर में लोकगीतों, लोककथाओं और साहित्य में जिस पक्षी को सबसे ज्यादा जगह मिली है, वह ‘गौरैया’ है। देश के चर्चित साहित्यकारों ने कहानी, कविता, गीत-गजलों या यूं कहें हर विधा में गौरैया को जगह दी है। कथा सम्राट प्रेमचंद की कहानी ‘नादान दोस्त’, प्रसिद्ध उपन्यासकार भीष्म साहनी की कहानी ‘दो…
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नीम कॉरिडोर से पश्चिमी चंपारण में बदल रही है तस्वीर
पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा प्रखंड की सुगहा भवानीपुर पंचायत में पर्यावरण संरक्षण की एक पहल अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। सड़क के दोनों किनारों पर करीब 10 माह पहले लगाए गए लगभग 1,000 नीम के पौधे सामुदायिक सहयोग, नियमित देखभाल और लगातार निरीक्षण के कारण तेजी से विकसित हो रहे हैं। पौधों…
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खतरे में बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर !
बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर पर खतरा मंडराने लगा है। यहां आसपास खनन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जुलाई के बाद से महज दो महीनों में चौथी कोयला परियोजना को मंजूरी मिली है। इनमें एक खदान कॉरिडोर से सिर्फ 53 मीटर दूर है। बाघों की आवाजाही और जैव विविधता के लिए अहम इस कॉरिडोर के आसपास…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन










