Author: admin
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डॉल्फिन संरक्षण पर वेबिनार का आयोजन
“राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र पटना ने राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर बिहार में डॉल्फिन संरक्षण व्यावहारिक बचाव तैयारी, निगरानी और समन्वित नदी संरक्षण पर वेबिनार का आयोजन किया”। पटना / राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र, की ओर से 05.10.2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर बिहार में डॉल्फिन संरक्षण…
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ध्वनि प्रदूषण का बढ़ता खतरा : शोर में दबती जिंदगी
संजय कुमार/ घटना उत्तर प्रदेश के भगौतीगंज स्थित के एक स्कूल की है जहाँ पढ़ने वाली कक्षा दो की एक छात्रा 22 सितंबर को उस समय कक्षा में गिर गई, जब स्कूल के पास से गुजर रहे जुलूस में तेज आवाज में लाउडस्पीकर/डीजे बजाया जा रहा था। छात्रा को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया…
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कूनो नेशनल पार्क में 5 स्वस्थ शावकों का जन्म
भारत में चीतों की आबादी 60 हुई । भारत में चीतों की अगली पीढ़ी के उद्भव में महत्वपूर्ण मील का पत्थर: श्री भूपेंद्र यादव। नई दिल्ली / प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पारकरते हुए, 32 महीने की भारतीय मूल की मादा चीता केजेपी 21 ने 5 अक्तूबर को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जिससे भारत में चीतोंकी कुल आबादी 60 हो गई है, जिसमें 41 भारतीय मूल के चीते शामिल हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल डॉटमीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस घटनाक्रम को साझा करते हुएकहा कि मुखी और केजीपी12 के बाद केजेपी21 भारत में जन्मी तीसरी मादाचीता है जिसने बच्चे को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि यह विकास भारत में चीते की आबादी की अगली पीढ़ी के उद्भव में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। श्री यादव ने कहा कि पांच शावकों का जन्म भारत में बोत्सवाना वंश की शुरुआतका भी प्रतीक है, क्योंकि उनके पिता बोत्सवाना नर चीता हैं। उन्होंने कहा कि यहभारत में चीते की बढ़ती आबादी में एक नई आनुवंशिक वंशावली जोड़ता है। केंद्रीय मंत्री ने इस विकास को भारतीय धरती पर पैदा हुए चीतों की एक औरपीढ़ी के रूप में वर्णित किया, जिसने भारत में चीते के पुनर्वास की कहानी में एकनया अध्याय जोड़ दिया है।श्री यादव ने पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ, प्रबंधकों और प्रोजेक्ट चीता से जुड़ेसभी लोगों को हार्दिक बधाई दी, जिनके समर्पण, प्रतिबद्धता और अथक प्रयासोंने विकास को संभव बनाया है। ***
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डॉल्फिन बचेंगी तो नदियाँ बचेंगी
“राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस: 5 अक्टूबर” राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य देश की डॉल्फिन प्रजातियों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है। भारत में 5 अक्टूबर को राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस मनाने की सिफारिश राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने 2022 में की थी। डॉल्फिन को स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र…
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डेजर्ट नेशनल पार्क जैसलमेर में पाले गए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू
जैसलमेर / गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, वन्यजीव सप्ताह 2026 के दौरान केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा (वीसी के माध्यम से) ने आज जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में कल…
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भू-दृश्य बदलते बदलती है वन्यजीवन की दुनिया
हिमालय की ऊँचाइयों से लेकर हमारे तटीय जल तक, भू-दृश्य बदलते हैं और उनके साथ बदलती है वन्यजीवन की दुनिया। इस Wildlife Week, उन अनगिनत प्राकृतिक संसारों का जश्न मनाएँ जो भारत को इतना खास बनाते हैं। भारत की विविध भौगोलिक संरचना के कारण यहाँ का वन्यजीवन दुनिया के सबसे समृद्ध और अनोखे पारिस्थितिकी तंत्रों…
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“बिहार के पर्यावरण स्तंभ” पुस्तक राज्यपाल को की गई भेंट
पटना / बिहार के पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले 35 पर्यावरणविदों के जीवन एवं कार्यों को संकलित कर, तैयार की गई पुस्तक “बिहार के पर्यावरण स्तंभ” बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) को पुस्तक के लेखक निशांत रंजन के द्वारा पिछले दिनों राजभवन, पटना में एक कार्यक्रम…
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बाघ अभ्यारण्य में पहली बाघिन को छोड़ा गया
“इस बाघ T138 को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व से बक्सा लाया गया है“नई दिल्ली / भारत में बाघ संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, 2 अक्तूबर को बुक्सा बाघ अभ्यारण्य (पश्चिम बंगाल) में एक बाघिन को छोड़ा गया। यह भारत के ‘वन्यजीव सप्ताह 2026’ की एक उपयुक्त शुरुआत है। इसके साथ…
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गांधी और पर्यावरण : प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का दर्शन
महात्मा गांधी का पर्यावरण चिंतन आज के जलवायु संकट, बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के दौर में विशेष प्रासंगिकता रखता है। गांधी ने पर्यावरण संरक्षण को आधुनिक पर्यावरणवाद की तरह किसी स्वतंत्र राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, लेकिन उनके सादगी, संयम, स्वदेशी, ग्राम स्वराज, ट्रस्टीशिप और सीमित…
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वन्यजीव सप्ताह : प्रकृति के साथ जीने का संकल्प
2 से 8 अक्टूबर : वन्यजीवों के संरक्षण के साथ अपने भविष्य की रक्षा का अवसर संजय कुमार /जंगल में बाघ की दहाड़, नदी में डॉल्फिन की छलांग, आकाश में उड़ते गिद्ध, पेड़ों पर चहचहाते गौरैया सहित दूसरे पक्षी और घास के मैदानों में विचरण करते हिरण-ये केवल प्रकृति की सुंदर तस्वीरें नहीं हैं। बल्कि…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन










