Author: admin

  • गौरैया पूंछ को बार-बार पटक देती है संकेत

    गौरैया पूंछ को बार-बार पटक देती है संकेत

    संजय कुमार/ गौरैया जब उदास अवस्था में होती है या तनाव में रहती है तो पूंछ को बार-बार पटकती है, हालाँकि कई बार उसे ख़ुशी के क्षण में भी ऐसा करते देखा जा सकता है। गौरैया की पूंछ ही उसकी “बॉडी लैंग्वेज” है। वो बोल नहीं सकती, इसलिए पूंछ हिलाकर ही साथियों को अपने भाव…

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  • पक्षियों पर भारी  पतंगबाजी

    पक्षियों पर भारी पतंगबाजी

    धारदार मांझे की चपेट में रोज घायल हो रहे दर्जनों परिंदे इन्सान भी आ रहे हैं चपेटे में नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने की परंपरा भले ही दिल्ली और दिल्ली एनसीआर के आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों का नजारा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हो, लेकिन पतंगबाजी का यह शौक पक्षियों के साथ…

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  • गौरैया गन्दा या सड़ा हुआ पानी नहीं पीती

    गौरैया गन्दा या सड़ा हुआ पानी नहीं पीती

    गौरैया गन्दा या सड़ा हुआ पानी नहीं पीती। वह बहुत समझदार और साफ-सफाई पसंद करने वाली छोटी चिड़िया है। गन्दा और सड़ा पानी में बैक्टीरिया, कीड़े आदि होते हैं । गलती से गौरैया ने अगर एक बार गंदा पानी पी ली तो इंफेक्शन या बीमारी होना तय है। प्रकृति ने उसे खतरों से बचने का…

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  • गौरैया को भी पसंद है आजादी

    गौरैया को भी पसंद है आजादी

    संजय कुमार/ गौरैया को भी आजादी पसंद है? सुबह की पहली किरण के साथ जब गाँव – शहर पूरी तरह जागा भी नहीं होता, तब गौरैया की ची…ची की आवाज सुनायी पड़ने लगती है। छत की मुंडेर, बिजली के तार और पेड़ की डाल आदि पर नन्ही गौरैया अपनी मौजूदगी दर्ज ची…ची…चूं-चूं, चूं-चूं..चीर-चीर..चीप-चीप कराती है।…

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  • गौरैया ख़ुद तय करती है कहाँ रहना है उसे

    गौरैया ख़ुद तय करती है कहाँ रहना है उसे

    संजय कुमार / सारण जिले के गरखा में सैकड़ों की तादाद में गौरैया का होना लोगों को चौंकाता है। क्योंकि इस इलाके में गौरैया संरक्षण को लेकर न तो कृत्रिम घोंसला है और न ही दानाघर लगा हुआ है और न ही कोई अभियान। गौरैया ग्रामीण परिवेश में रह रही है, जहाँ उसे प्रकृति से…

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  • भारत हाथी संरक्षण के प्रति  प्रतिबद्ध

    भारत हाथी संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध

    नई दिल्ली,12 अगस्त/ केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व हाथी दिवस 2026 के अवसर पर हाथियों और मनुष्यों के लिए साझा भविष्य सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। केन्द्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि भारत में 14 राज्यों में 33 हाथी…

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  • लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हाथी

    लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हाथी

    (विश्व हाथी दिवस) विश्व हाथी दिवस पर आज का सबसे बड़ा सवाल है आखिर लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हैं हाथी ? सवाल को खंगाला है जिला धमतरी, छत्तीसगढ़ के हाथी शुभचिंतक वैभव जगने ने ।आज पूरा भारत, केंद्र हो या राज्य—विश्व हाथी दिवस मनाने के लिए तत्पर है। जगह-जगह कार्यक्रम होंगे, भाषण होंगे,…

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  • स्वस्थ जंगल, संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतीक हैं हाथी

    स्वस्थ जंगल, संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतीक हैं हाथी

    “विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त“ भारत दुनिया के 60 प्रतिशत एशियाई हाथियों का घर है। हिमालय की तलहटी से लेकर पश्चिमी और पूर्वी घाटों तक, हाथियों ने भारत के विविध प्राकृतिक परिदृश्यों में अपना घर बनाया है। हाथी केवल जंगल का सबसे विशाल जीव ही नहीं है, बल्कि भारतीय प्रकृति, संस्कृति और पारिस्थितिकी का अभिन्न…

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  • चोंच को पंखों के नीचे दबा आराम करती है गौरैया

    चोंच को पंखों के नीचे दबा आराम करती है गौरैया

    संजय कुमार / गौरैया आराम करते समय अपनी चोंच को पंखों के नीचे दबा लेती है। इसे “head-tucking” कहते हैं। गौरैया यह इसलिए करती है ताकि अपने शरीर को गर्म रख सकें । गौरैया के चोंच और सिर सबसे ज्यादा गर्मी छोड़ते हैं,इसलिए वह ऐसा करती है । चोंच को पंखों के नीचे दबाने से…

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  • ग्रीन इंडिया मिशन  के तहत 1.84 लाख हेक्टेयर भूमि का हुआ पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन

    ग्रीन इंडिया मिशन के तहत 1.84 लाख हेक्टेयर भूमि का हुआ पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) के तहत देश में क्षरित वन एवं गैर-वन भूमि के पुनर्स्थापन की दिशा में बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है। वर्ष 2015-16 से अब तक 17 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 1,84,467 हेक्टेयर भूमि पर पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन का कार्य किया गया है।…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन