Author: admin
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प्रवास बदल रही है घरलू गौरैया
संजय कुमार / हमारे घर आंगन में चहकने-फुदकने वाली घरेलू गौरैया नन्ही चिड़ियाँ बचपन की साथी आज कई गाँव और शहर के घर-आँगन से रूठ कर कहीं और चली गयी है। आमतौर पर दिखने वाली गौरैया कही बड़ी तादाद में दिखती है। कहीं बमुश्किल से दिखती है, तो कहीं बिलकुल नहीं। देश की राजधानी दिल्ली…
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मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए कोयंबटूर में उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया उद्घाटन, राष्ट्रीय पोर्टल भी लॉन्च; सह-अस्तित्व को बताया पारिस्थितिक स्थिरता का आधार कोयंबटूर, 10 जुलाई: मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने और वैज्ञानिक समाधान विकसित करने के उद्देश्य से केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कोयंबटूर स्थित भारतीय वन्यजीव…
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दिल्ली में गौरैया : प्रयास को चाहिये पंख
संजय कुमार/ हमारे घर आंगन में चहकने-फुदकने वाली घरेलू गौरैया की स्थिति देश भर में अच्छी नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली की राजकीय पक्षी गौरैया की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। कुछ इलाकों में ही यह दिखती। हाल बेहाल है। खासकर शहरी इलाकों में । ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं है तो कहीं नहीं।…
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सीबीआई-डीआरआई की कार्रवाई में वन्यजीव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश
53 संरक्षित जानवरों/पक्षियों को बचाया गया नई दिल्ली : 09.07.2026 / सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) और डीआरआई (DRI), मुंबई ने वाइल्डलाइफ़ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB), मुंबई/कोलकाता की मदद से एक संयुक्त ऑपरेशन में 15 स्लो लोरिस, 2 बिंटुरोंग, 28 स्टार कछुए, 6 इजिप्टियन गिद्ध और 2 शिकरा पक्षियों को बरामद किया और बचाया। ये…
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भारत के बाघ क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत, प्रबंधन और संरक्षण पर चर्चा
कोयंबटूर में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की 29वीं बैठक की में भारत के बाघ क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करने, प्रबंधन के तरीकों को बेहतर बनाने और संरक्षण पर चर्चा की गई नई दिल्ली 9 जुलाई 26 / राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 29वीं बैठक आज केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी (सीएएसएफओएस), कोयंबटूर, तमिलनाडु में…
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दो बहनें: चुनिया और मुनिया
कहानी / आशा प्रसाद : बहुत समय पहले की बात है। हरे-भरे एक गाँव में दो चिड़ियाँ रहती थीं—चुनिया और मुनिया। दोनों बहनें थीं और हमेशा साथ-साथ रहतीं। सुबह सूरज की किरणों के साथ उड़ान भरतीं, खेतों में दाना चुगतीं, तालाब के किनारे पानी पीतीं और शाम को अपने छोटे-से मिट्टी और खपरैल वाले घर…
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शुभंकर-गौरैया : संरक्षण का देता सन्देश
संजय कुमार/ घर आँगन में चहकने-फुदकने वाली गौरैया भी शुभंकर बन चुकी है। इसके विलुप्त के मद्देनजर बचपन की नन्ही साथी, किसान मित्र, गौरैया का संरक्षण करने के लिए विश्व भर में मुहिम चल रहे हैं। संरक्षण को लेकर 20 मार्च 2010 को घोषित विश्व गौरैया दिवस से लगातार गौरैया संरक्षण से जन भागीदारी के…
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प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय मिजोरम 21वें निर्दिष्ट भंडार
मिजोरम के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय को जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत भारत के 21वें निर्दिष्ट भंडार के रूप में अधिसूचित किया गया नई दिल्ली,7जुलाई26 / पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल स्थित प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएचएम) को जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के अंतर्गत निर्दिष्टम भंडार के रूप…
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लौटे गीत सारस के
पूर्वी उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में संयुक्त प्रयासों की बदौलत राज्य पक्षी सारस की आबादी पिछले 12 वर्षों में करीब पांच गुणा बढ़ गई है पूर्वी उत्तर प्रदेश के वेटलैंड्स में पिछले 12 वर्षों में सारस की संख्या में कई गुणा वृद्धि दर्ज की गई है। फोटो: अरशद हुसैन/डब्ल्यूटीआई Bhagirath योगेंद्र कुमार कनौजिया को…
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गौरैया का असली घर खोह, दीवार के छेद
संजय कुमार/ गौरैया सदियों से इंसानों के सबसे करीब रहने वाला पक्षी रही है। इन्हें अपने घोंसले के लिए इंसान के घरों के अंदर-बाहर, दीवारों के खोह (सुराख) और वेंटिलेटर जैसी जगहें सबसे ज्यादा पसंद आती हैं। गौरैया को यह जगह इसलिए पसंद आती है क्योंकि उसे सुरक्षा मिलती है। दीवारों के खोह या घरों…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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