Author: admin

  • सरदार वल्लभ भाई पटेल मेमोरियल अवॉर्ड से नवाजे गए श्याम नंदन प्रसाद

    सरदार वल्लभ भाई पटेल मेमोरियल अवॉर्ड से नवाजे गए श्याम नंदन प्रसाद

    पीपल मैन‌ फाउंडेशन,दिल्ली ने दिया “सरदार वल्लभ भाई पटेल मेमोरियल अवॉर्ड 2026” निशांत रंजन/ पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट और उल्लेखनीय योगदान के लिए ख्याति प्राप्त पीपल मैन‌‌ फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा पटना के प्रो. श्याम नंदन प्रसाद को “सरदार वल्लभ भाई पटेल मेमोरियल अवॉर्ड 2026” से नवाजा गया है। प्रो. प्रसाद ने बताया कि इस अति…

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  • बिहार का शिवकुंड गांव बना “गौरैया गाँव”

    बिहार का शिवकुंड गांव बना “गौरैया गाँव”

    दिल्ली के बाद यह दूसरा “गौरैया गाँव” है शिवकुंड गांव का “स्पैरो विलिज” संजय कुमार /  बिहार के मुंगेर जिले के शिवकुंड गांव की पहचान के साथ अब “स्पैरो विलिज” यानि गौरैया गाँव के रूप में हो गई है। दिल्ली के बाद यह दूसरा “गौरैया गाँव” है। 20 मई 2022 को दिल्ली में देश का…

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  • बिहार में इकोटूरिज्म की है अपार  संभावना

    बिहार में इकोटूरिज्म की है अपार संभावना

    इसे विकसित करने को लेकर निवेशकों के साथ हुई अहम् बैठक पटना, 24 मई। बिहार में इकोटूरिज्म को लेकर अपार संभावना है । पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 27 डैम साइट्स तथा 247 तालाब एवं पोखर स्थलों को चिन्हित किया है ताकि इन्हें इकोटूरिज्म के लिए विकसित किया जाए । इसी के मद्देनजर…

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  • हरियाली में छिपा इलाज: समय की मांग

    हरियाली में छिपा इलाज: समय की मांग

    मानव‌ कल्याण में एथनोबोटनी ( ETHNOBOTANY ) के उपयोग की आवश्यकता : आज के परिदृश्य में समय की मांग *प्रो. श्याम नंदन प्रसाद/ लोक वनस्पतिविज्ञान ( ETHNOBOTANY ) विज्ञान की वह शाखा है , जिसके अंतर्गत विभिन्न संस्कृतियों और आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा पौधों के पारंपरिक उपयोग जैसे दवा , भोजन और धार्मिक कार्यों…

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  • गौरैया में परजीवी मिलते हैं पर उससे मौत नहीं होती

    गौरैया में परजीवी मिलते हैं पर उससे मौत नहीं होती

    संजय कुमार / गौरैया में परजीवी मिलते हैं। यह बात सही है कि गौरैया परजीवियों से संक्रमित होकर बीमार होती है लेकिन उससे उनकी मौत नहीं होती । मौत के पीछे कीटनाशक, खाना न मिलना आदि कारण हो सकते हैं । वेब साईट pubmed.ncbi.nlm.nih.gov की माने तो तुर्की में 48 गौरैया की जांच में 85.4%…

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  • डायनासोर का साथी रहा कछुआ भी कहीं गायब न हो जाये

    डायनासोर का साथी रहा कछुआ भी कहीं गायब न हो जाये

    “विश्व कछुआ दिवस 23 मई “ संजय कुमार/ जी हां, कछुए इस धरती पर तब से हैं जब डायनासोर हुआ करते थे। कछुओं ने डायनासोर के साथ उल्कापिंड की टक्कर झेली, बर्फ युग देखा, महाद्वीपों को टूटते-बनते देखा। प्रकृति के खेल में आज डायनासोर नहीं हैं, लेकिन सच यह है कि इन्सान की वजह से…

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  • दुर्लभ जीव की सुरक्षा के हो रहे प्रयास

    दुर्लभ जीव की सुरक्षा के हो रहे प्रयास

    सुमन सिंह/ कछुआ एक ऐसा जीव है, जिसके शरीर पर हड्डियों और केराटिन से बना खोल होता है, जो उसे शिकारियों से बचाता है। निस्संदेह, पृथ्वी के इस सबसे पुराने जीव का जीवन प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, आवास के विनाश और अवैध तस्करी के कारण खतरे में है और इसकी कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार…

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  • सोनपुर मंडल ने पर्यावरण संरक्षण पर चलाया विशेष अभियान

    सोनपुर मंडल ने पर्यावरण संरक्षण पर चलाया विशेष अभियान

    सोनपुर,23-5-2026/ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पूर्व मध्य रेलवे के सोनपुर मंडल द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अभियान के अंतर्गत मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर स्थापित प्लास्टिक बोतल क्रशर मशीनों के रख-रखाव, कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता की विस्तृत समीक्षा की…

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  • विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए कछुए

    विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए कछुए

    *विश्व कछुआ दिवस,23 मई* *हृतेश मिश्र / कछुआ पृथ्वी के प्राचीनतम जीवों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि 22 करोड़ वर्ष पहले से यह धरती पर मौजूद है। इसका अर्थ है कि इसने डायनासोर का उदय और अंत भी देखा है। इसका अनोखा कवच इसके जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। ऐसे…

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  • The Silent Crash

    The Silent Crash

    *Raj Kumar / Let’s be honest: when most of people hear the word “Biodiversity”, they picture a distant rainforest, a rare tiger, or a boring textbook chapter they had to memorize for an exam. It feels totally disconnected from your Actual life. But Today is International Biodiversity Day, and it’s time to bust a massive…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन