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  • कविता ‘गौरैया’

    कविता ‘गौरैया’

    गौरैया,आँगन की रौनक” – डॉ.अश्वनी नन्ही सी चिड़िया, प्यारी सी गौरैया,आँगन की रौनक, खुशियों की छैया।चहचहाती थी जो हर सुबह-सवेरे,अब क्यों हो गई दूर हमसे धीरे-धीरे?छतों के कोने, दीवारों की दरार,वहीं था उसका छोटा सा संसार।पर कंक्रीट के जंगल, मोबाइल की तरंग,ले गई उसकी खुशियों के सब रंग।आओ मिलकर एक प्रयास करें,उसके लिए फिर से…

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  • दुनिया के 80 फीसदी धरोहर स्थलों को जलवायु परिवर्तन से खतरा

    दुनिया के 80 फीसदी धरोहर स्थलों को जलवायु परिवर्तन से खतरा

    संयुक्त राष्ट्र, एजेंसी। अभी तक युद्ध को राष्ट्रीय धरोहरों के लिए बड़े खतरे के तौर पर देखा जाता था। लेकिन एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया कि बढ़ता पारा दुनिया की प्रतिष्ठित ऐतिहासिक विरासतों को नष्ट कर रहा है। दुनिया की 80 फीसदी धरोहर जलवायु परिवर्तन के खतरे का सामना कर रही है। यूनेस्को,…

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  • घर-आँगन की नन्ही परी गौरैया

    घर-आँगन की नन्ही परी गौरैया

    संजय कुमार/ गौरैया / अनायास ही वह दौर याद आता है जब नींद किसी अलार्म या मोबाईल के रिंग टोन से नहीं, बल्कि घर-आँगन,मुंडेर, खिड़की या बाग़-बगीचा में बैठी नन्ही गौरैया की ‘चीं-चीं’ से खुला करती थी। वह नन्ही सी चिड़ियाँ हमें केवल नींद से जगती ही नहीं बल्कि घर-आंगन में उसका फुदकना, चहकना, फुर्र …

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  • कहाँ खो गई गौरैया की चीं-चीं 

    कहाँ खो गई गौरैया की चीं-चीं 

    संजय कुमार/ गौरैया / वह भी क्या दिन थे, जब सुबह की पहली किरण के साथ खिड़की के रोशनदान या आँगन या फिर मुंडेर या घर से सटे बाग़-बाड़ी के पेड़ों पर से एक  मधुर संगीत  गूँजा करता  था, ‘चीं-चीं, चीं-चीं’। यह हमारी नन्ही दोस्त गौरैया की चहचाहट होता थी। गौरैया की ‘चीं-चीं, चीं-चीं’ सिर्फ…

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  • *कहानी “दो गौरैया” – भीष्म साहनी

    *कहानी “दो गौरैया” – भीष्म साहनी

    घर में हम तीन ही व्यक्ति रहते हैं-मां, पिताजी और मैं। पर पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है। हम तो जैसे यहां मेहमान हैं, घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं। आंगन में आम का पेड़ है।  तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं।  जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों…

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  • भारत में हुआ 99 रामसर साइट, जल्द होगा 100 का आंकड़ा

    भारत में हुआ 99 रामसर साइट, जल्द होगा 100 का आंकड़ा

    संजय कुमार/ भारत में जल्द ही रामसर साइट का आंकड़ा 100 छूने वाला है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की शेखा झील बर्ड सेंक्चुरी को भारत का 99 वां अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि, रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया है। इस घोषणा के साथ ही देश में रामसर साइट्स की कुल संख्या बढ़कर 99 हो…

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  • गौरैया संरक्षण क्यों ?

    गौरैया संरक्षण क्यों ?

    गौरैया एक छोटा और आकर्षक पक्षी है, जो अपने चहचहाने और झुंड में रहने के लिए जाना जाता है। यह पक्षी लगभग 10-15 सेमी लंबा होता है और इसका वजन लगभग 20-30 ग्राम होता है। गौरैया की सबसे बड़ी विशेषता इसका भूरे और सफेद रंग का पंख होता है, जो इसे एक अनोखा और आकर्षक…

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  • आई  लव  स्पैरो

    आई  लव  स्पैरो

     “आई  लव  स्पैरो” कोई राजनीतिक  नारा नहीं है बल्कि इंसान के घर-आँगन में चह्कने – फुदकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया को संरक्षित करने का सन्देश  है। इसकी शुरुआत 2010 में तब हुआ था, जब नेचर फॉर एवर सोसाइटी ऑफ इंडिया और इको-सिस एक्शन फाउंडेशन ऑफ फ्रांस ने 20 मार्च 2010 को विश्व गौरैया दिवस की…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन