दिल्ली के बाद यह दूसरा “गौरैया गाँव” है शिवकुंड गांव का “स्पैरो विलिज”
संजय कुमार / बिहार के मुंगेर जिले के शिवकुंड गांव की पहचान के साथ अब “स्पैरो विलिज” यानि गौरैया गाँव के रूप में हो गई है। दिल्ली के बाद यह दूसरा “गौरैया गाँव” है। 20 मई 2022 को दिल्ली में देश का पहला गौरैया गाँव का उद्घाटन किया गया था। गौरैया के संरक्षण और उन्हें वापस लाने के लिए पूर्वी दिल्ली के गढ़ी मांडू सिटी फॉरेस्ट में दिल्ली का पहला ‘गौरैया ग्राम’ विकसित किया गया है। यह पहल दिल्ली सरकार के वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) द्वारा शुरू की गई थी।
तेजी से गाँव में भी फूस-खपरैल घर की जगह कंक्रीट ने ले ली है। और, गौरैया का प्रकृतिक आवास छिन जाने से, पलायन हुआ। इसे रोकने के लिए शिवकुंड गांव के ग्रामीणों ने अपने-अपने पक्के मकानों के बाहर गौरैया के घोंसले लगाकर नन्ही चिड़िया को प्रतिदिन भोजन और पानी दे कर घर वापसी की है। गांव में अब नन्ही चिड़ियों की चहचहाट सुनाई पड़ती है। गौरैया संरक्षण पहल ने शिवकुंड गांव को गौरैया गाँव बना दिया है।
शिवकुंड गांव के युवकों की टोली ने विगत कई वर्षों से लगातार प्रयास कर शिवकुंड गांव में अब तक 200 से जयादा घरों के बाहर कृत्रिम घोंसला (लकड़ी के घोंसलों) लगाया है। शिवकुंड ने गौरैया और पर्यवरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर सन्देश दिया है कि स्वच्छ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। यदि गांव के लोग मिलकर प्रयास करें तो शिवकुंड पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल बन सकता है। बल्कि बन कर उभरा है ।इस पहल से जुड़े नीतीश कुमार और अनिल कुमार की माने तो गांव के लगभग हर घर में गौरैया के लिए घोंसले बनाए गए हैं। इससे बड़ी संख्या में गौरैया का संरक्षण हो रहा है और पक्षियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी भी देखी जा रही है। निकट भविष्य में शिवकुंड में गौरैया अध्ययन केंद्र स्थापित करने की भी योजना बनी है। इससे पक्षी संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और गांव की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर एक पर्यावरण मित्र गांव के रूप में स्थापित हो सकेगी। दूसरी और शिवकुंड को इको मॉडल गांव के लिए अमेरिकी संस्था ‘रिज्यूवेनेट’ ने पिछले दिनों इसे गोद लिया है।

मुंगेर के धरहरा प्रखंड का शिवकुंड गांव गौरैया संरक्षण से लेकर पर्यावरण संरक्षण का नया मॉडल बन रहा है, जिससे यह इको मॉडल विलेज उन्होंने कहा कि गंगा किनारे बसे इस गांव में पहले से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों को अब व्यापक रूप देकर इसे देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। स्वच्छ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। यदि गांव के लोग मिलकर प्रयास करें तो शिवकुंड पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल बन सकता है।
इस पहल में रिज्यूवेनेट गंगा, बायोएंजाइम एंटरप्रेन्योर्स एकेडमी आफ इंडिया, स्विच फार चेंज फाउंडेशन, गंगाजली, देव वृक्ष महायज्ञ और भोजपुर महिला कला केंद्र सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही है। शिवकुंड को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के अनुकूल गांव बनाने का संकल्प ग्रामीणों ने लिया है।
—















