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प्रकृति के संग लद्दाख की गौरैया ‘चिपा ग्याओ’
संजय कुमार/ गौरैया / केंद्र शासित राज्य लद्दाख के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ‘चिपा ग्याओ’ पाई जाती है। लद्दाख में घरेलू गौरैया को दिलचस्प नाम ‘चिपा ग्याओ’ से पुकारा जाता है। हिमायल रेंज की पहाड़ियों से घिरे लद्दाख के लोग भले ही घरेलू गौरैया को ‘चिपा ग्याओ’ से पुकारते हैं लेकिन…
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गौरैया सिर्फ पक्षी नहीं पारिस्थितिक संकेतक है
संजय कुमार /गौरैया / छोटे आकार वाली खूबसूरत गौरैया का ज़िक्र आते ही बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं। कभी घर-आंगन का अभिन्न हिस्सा रही यह चिड़िया आज कंक्रीट के जंगलों में अपना अस्तित्व तलाश रही है। 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ के रूप में मना कर हम इसके संरक्षण का संकल्प लेते…
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यादों के झरोखे में गौरैया
संजय कुमार/ शायद ही कोई हो जिसने नन्ही गौरैया के साथ अपना बचपन न गुजारा हो। घर-आँगन में जमीन पर पड़े दाने को चुगने आने वाली गौरैया को टोकरी में फंसा कर उसे पकड़ना और फिर उस पर रंग लगा कर उड़ा देना। और, जब दूबारा आती तो ताली बजा-बजा कर बताना, मेरी वाली गौरैया।…
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तपती धरती:कारण और समाधान
निर्मल रानी/ पर्यावरण / उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,ओडिशा व प. बंगाल जैसे राज्य इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इन राज्यों में कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री से लेकर 44 डिग्री तक पहुंच गया है। पिछले दिनों भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा हीटवेव अलर्ट भी…
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सपनों को पंख देना मैंने गौरैया से सीखा : आशा प्रसाद
गौरैया संरक्षक /आशा प्रसाद : बिहार, पटना, के अंबेडकर पथ की आशा प्रसाद जो आम्रपाली इनर व्हील क्लब की प्रेसिडेंट रही हैं। जो पिछले 6 सालों से “Save Sparrow” प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया है। शुरुआत में मेरे घर पर सिर्फ़ तीन या चार गौरैया आती थीं। वे बताती हैं कि छह महीने की…
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मेघालय में जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की हुई खोज
मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स (East Khasi Hills) में हाल ही में वैज्ञानिकों ने जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की खोज की है। यह खोज लगभग 100 साल के लंबे अंतराल के बाद हुई है, जिसने भारत में जुगनुओं के संरक्षण और शोध की एक नई राह खोली है। दुर्लभ जुगनू में पहला…
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“सालभर में डेनमार्क जितना जंगल खत्म”
*मैरीलैंड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने किया अहम विश्लेषण* मैरीलैंड, एजेंसी। साल 2025 में दुनिया ने करीब 43 लाख हेक्टेयर (1.06 करोड़ एकड़) वर्षावन खो दिए। यह लगभग पूरे डेनमार्क देश के आकार के बराबर का क्षेत्र है। मैरीलैंड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया ने हर मिनट 11 फुटबॉल मैदानों जितने बड़े वन खत्म हो…
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कबूतरों के आतंक से घरेलू गौरैया सहित अन्य चिड़िया प्रभावित
संजय कुमार/शहरों में कबूतरों की बढ़ती संख्या ने जहां इंसान को परेशान कर रखा है वहीँ घर -आंगन की चिड़ियां घरेलू गौरैया और दूसरी चिड़ियों को हमसे दूर कर रहा है। शहरी इलाकों में कबूतर को दाना डालने की प्रवृत्ति ने इंसान और गौरैया का जीना मुहाल कर रखा है। गांव में घर के बाहर…
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गौरैया का आहार में प्राकृतिक आहार
संजय कुमार/ गौरैया / घरेलू गौरैया के आहार में प्राकृतिक रूप से कच्चे अनाज और बीज प्रमुखता से शामिल है। इसे वह पसंद से खाती है।प्राकृतिक-शारीरिक तौर से गौरैया का पाचन तंत्र कच्चे दानों को पचाने के लिए बेहतर तरीके से अनुकूलित होता है। जबकि कुछ लोग पका हुआ चावल आदि गौरैया को आहार में…
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गौरैया बचाओ, जीवन बचाओ
संजय कुमार / गौरैया / पर्यावरण संरक्षण में सिर्फ इंसानों की भूमिका अहम् नहीं है बल्कि इस प्रकृति में वास करने वाले हर जीव-जंतुओं की भूमिका अहम् है। और, इसमें नन्ही चिड़ियाँ गौरैया को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। अक्सर हम जब पर्यावरण संरक्षण की बात करते हैं तो पृथ्वी का आवरण-पर्यावरण, वायुमंडल ,…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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