Author: admin
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शुभंकर-गौरैया : संरक्षण का देता सन्देश
संजय कुमार/ घर आँगन में चहकने-फुदकने वाली गौरैया भी शुभंकर बन चुकी है। इसके विलुप्त के मद्देनजर बचपन की नन्ही साथी, किसान मित्र, गौरैया का संरक्षण करने के लिए विश्व भर में मुहिम चल रहे हैं। संरक्षण को लेकर 20 मार्च 2010 को घोषित विश्व गौरैया दिवस से लगातार गौरैया संरक्षण से जन भागीदारी के…
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प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय मिजोरम 21वें निर्दिष्ट भंडार
मिजोरम के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय को जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत भारत के 21वें निर्दिष्ट भंडार के रूप में अधिसूचित किया गया नई दिल्ली,7जुलाई26 / पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल स्थित प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएचएम) को जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के अंतर्गत निर्दिष्टम भंडार के रूप…
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लौटे गीत सारस के
पूर्वी उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में संयुक्त प्रयासों की बदौलत राज्य पक्षी सारस की आबादी पिछले 12 वर्षों में करीब पांच गुणा बढ़ गई है पूर्वी उत्तर प्रदेश के वेटलैंड्स में पिछले 12 वर्षों में सारस की संख्या में कई गुणा वृद्धि दर्ज की गई है। फोटो: अरशद हुसैन/डब्ल्यूटीआई Bhagirath योगेंद्र कुमार कनौजिया को…
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गौरैया का असली घर खोह, दीवार के छेद
संजय कुमार/ गौरैया सदियों से इंसानों के सबसे करीब रहने वाला पक्षी रही है। इन्हें अपने घोंसले के लिए इंसान के घरों के अंदर-बाहर, दीवारों के खोह (सुराख) और वेंटिलेटर जैसी जगहें सबसे ज्यादा पसंद आती हैं। गौरैया को यह जगह इसलिए पसंद आती है क्योंकि उसे सुरक्षा मिलती है। दीवारों के खोह या घरों…
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WHEN THE NIGHT BEGAN TO GLOW: A Firefly Walk in Southern Patna
By Amisha Kumari / With the arrival of the monsoon, nature quietly unveils some of its most fascinating wonders. Among them are fireflies—tiny, glowing beetles whose enchanting flashes have inspired curiosity and admiration for generations. Once commonly seen across many parts of India, fireflies have become increasingly rare in urban landscapes due to habitat loss,…
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जुगनू देख खिल खिला उठे बच्चों के चेहरे
पटना 6 जुलाई 2026 / विश्व जुगनू दिवस पर एनवायरमेंट वॉरियर्स तथा हमारी गौरैया का संयुक्त तत्वाधान में दक्षिणी पटना के क्षेत्र में जुगनू वॉक का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों के साथ माता-पिता ने भी भाग लिया। जुगनू को देख बच्चों के चेहरे खिल उठे,बच्चों ने पहली बार किसी पतिंगे यानि जुगनू को…
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लाइट बंद, जुगनू ऑन अंधेरे में चमकता जीवन : विलुप्त नहीं पर संकट में
संजय कुमार / अँधेरे होते ही घर आँगन, बाग़-बगीचा में एक फतिंगा प्रकाश छोड़ता उड़ता दिखता है। प्रकाश लगातार नहीं जलता है, बल्कि जलता बुझता टिमटिमाता रहता है। इसलिए इसे जुगनू कहते है। जुगनू कीट नहीं बल्कि भृंग (बीटल) परिवार (लैम्पाइरिडी) का है। दुनिया में इसके 2000 प्रजातियाँ हैं। इसे शीशे के छोटे बोतल में…
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शिकारी पक्षियों से गौरैया की घटती आबादी
संजय कुमार / घरेलू गौरैया के संख्या में कमी के पीछे शिकारी पक्षी भी एक कारण हैं। देखा गया है कि इन्सान के आसपास जहाँ-जहाँ गौरैया रहने लगी, वहां देर सवेर शिकारी मांसाहारी पक्षी भी पहुँच जाते हैं। यह सच है कि गौरैया इंसान के साथ और उसके आसपास रहती है क्योंकि यहाँ उसे सुरक्षा…
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पूरे यूरोप में भीषण गर्मी का कहर भीषण गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त
जलवायु परिवर्तन एक बड़ा कारण : मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंकापूरे यूरोप में इस समय भीषण गर्मी और जानलेवा लू का भयंकर कहर जारी है, जिसके कारण अब तक महाद्वीप में 5,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘हीट डोम’ (Heat Dome) के कारण गर्म हवाएं यूरोपीय देशों…
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दुनिया भर में सबसे अधिक घरेलू गौरैया की है आबादी तकरीबन 50 करोड़ से 150 करोड़
संजय कुमार/ “स्टेट ऑफ इंडियंस बर्ड्स 2023” ने अपनी रिपोर्ट में भारत के कई पक्षियों की प्रजातियां को खतरे में बता कर सबको चौंका दिया है। साथ ही चिड़ियों के 178 प्रजातियों को संरक्षित करने की बात भी कही है। विलुप्ति के सवालों से लिपटी गौरैया के ऊपर भी मंडराते खतरे की चर्चा होती रहती…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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