बिहार में इकोटूरिज्म की है अपार संभावना

इसे विकसित करने को लेकर निवेशकों के साथ हुई अहम् बैठक पटना, 24 मई। बिहार में इकोटूरिज्म को लेकर अपार संभावना है । पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 27 डैम साइट्स तथा 247 तालाब एवं पोखर स्थलों को चिन्हित किया है ताकि इन्हें इकोटूरिज्म के लिए विकसित किया जाए । इसी के मद्देनजर…

इसे विकसित करने को लेकर निवेशकों के साथ हुई अहम् बैठक

पटना, 24 मई। बिहार में इकोटूरिज्म को लेकर अपार संभावना है । पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 27 डैम साइट्स तथा 247 तालाब एवं पोखर स्थलों को चिन्हित किया है ताकि इन्हें इकोटूरिज्म के लिए विकसित किया जाए । इसी के मद्देनजर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से रविवार को अरण्य भवन में निवेशकों के साथ बैठक का आयोजन किया गया। विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों एवं निवेशकों ने भाग लिया। बैठक में बिहार में इकोटूरिज्म की अपार संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई तथा राज्य में विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना विकसित करने की दिशा में विचार-विमर्श हुआ।

कार्यक्रम में विभाग के पीसीसीएफ हॉफ अरविंदर सिंह ने बताया कि भीमबांध परियोजना का आरएफपी पहले ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके साथ ही विभाग द्वारा ईओआई भी जारी किया गया है, जिसमें 27 डैम साइट्स तथा 247 तालाब एवं पोखर स्थलों को चिन्हित किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग इन स्थलों पर निजी निवेशकों को आमंत्रित करना चाहता है, ताकि बड़े पैमाने पर इकोटूरिज्म को विकसित किया जा सके।

उन्होंने बताया कि विभाग की योजना इन स्थलों को मानकों के अनुरूप विश्वस्तरीय अवसंरचना के साथ विकसित करने की है। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा और परियोजनाओं को “बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर” मॉडल पर संचालित किया जाएगा।

बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल ही में अपलोड किए गए आरएफपी एवं ईओआई के संबंध में निवेशकों और संबंधित पक्षों को जानकारी उपलब्ध कराना था। साथ ही आगामी 9 जून को आयोजित होने वाली बैठक के लिए उद्योग एवं व्यापार संगठनों, चैंबर ऑफ कॉमर्स, सीआईआई तथा बड़े निवेशकों को आमंत्रित करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। विभाग ने निजी निवेशकों से राज्य में इकोटूरिज्म विकास में सहयोग की अपील की।

कार्यक्रम मे इंवेस्टर्स अनिल कुमार, सचिव, बीआईए, शोभित राज, निदेशक, CKCPL architects, एस.पी. सिन्हा, सीनियर एडवाइजर, बिहार होटल्स, रिचा सिन्हा, बिहार होटल्स, मणिकांत, स्टेट चेयरमैन BIA, मनीष कुमार, लेमन ट्री आदि उपस्थित हुए।

बैठक में करीब 25 निवेशकों एवं विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर बिहार स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक नंद किशोर, विभाग के विशेष सचिव सह सीसीएफ आलोक कुमार, सीसीएफ अमित, बिहार इकोटूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नेशामणि, वन संरक्षक (मुख्यालय) सत्यजीत कुमार, सीएफ (वर्किंग प्लान) श्री आलोक कुमार, पटना जू के निदेशक हेमंत पाटिल, सहित विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन