पक्षियों की दुनिया है खूबसूरत, इंसानों से कम रंगीन नहीं

संजय कुमार / पक्षियों की अपनी अलग दुनिया है। बनावट में इन्सान से बिलकुल अलग,लेकिन कई मामलों में एक सा। गौरैया, कौआ, तोता, मैना,पंडुक, बुलबुल, दहियर आदि लगभग 77 चिड़ियों का संसार प्यार -रोमांस,खानपान,झड़प आदि में माहिर है। पक्षी यानि जिसके पंख होते हैं, दांत रहित, चोंच वाले जबड़े होते हैं और अंडे देते हैं’।…

संजय कुमार / पक्षियों की अपनी अलग दुनिया है। बनावट में इन्सान से बिलकुल अलग,लेकिन कई मामलों में एक सा। गौरैया, कौआ, तोता, मैना,पंडुक, बुलबुल, दहियर आदि लगभग 77 चिड़ियों का संसार प्यार -रोमांस,खानपान,झड़प आदि में माहिर है।

पक्षी यानि जिसके पंख होते हैं, दांत रहित, चोंच वाले जबड़े होते हैं और अंडे देते हैं’। लेकिन इन्सान के जीवन से मिलते जुलते हैं, चिड़ियों के जीवन में नाटक, रोमांच, खतरा और रोमांस भी इन्सान की तरह है, पक्षियों पर फिल्माये गए दृश्य देख आप चिहुंक जायेंगे। जब आप उन्हें करीब से देखना शुरू करते हैं, तो आपको पता चलता है कि एक इंसान के तौर पर आपके लिए उनमें बहुत कुछ है जिससे आप जुड़ सकते हैं। पक्षियों को देखने या उनके साथ समय बिताने पर ही पता चलेगा। खान-पान को देखें तो ये इन्सान की तरह ही शाकाहारी और माँसाहारी होते हैं। कोईं ज्यादा खाता है तो कोई कम या संतुलित। प्यार -रोमांस जबरदस्त करते हैं। कौआ, गौरैया, तोता, मैना, पंडुक, बुलबुल, दहियर आदि  प्यार-रोमांस में माहिर है। कौआ, गौरैया, तोता तो गजब प्यार करते हैं। संगीत भी बहुत रोचक है यों तो कई चिड़ियाँ गजब गाती है। मैना,गौरैया,बुलबुल,शकरखोरा,कोयल को अकसर सुनता हूँ। मनमोहक गीत कई लय में गाते हैं।

प्यार-रोमांस में माहिर:

गौरैया: नर गौरैया मादा को रिझाने के लिए पंख फुलाकर, चहचहाकर डांस करता है। जोड़ा बनने के बाद ये जीवन भर साथ निभाते हैं। नर और मादा मिलकर घोंसला बनाते हैं, अंडे सेते हैं।

कौआ: कौए सबसे वफादार पक्षियों में से हैं। एक बार जोड़ा बन गया तो जिंदगी भर साथ। अगर एक मर जाए तो दूसरा कई दिन तक शोक मनाता है, खाना-पीना छोड़ देता है।

तोता-मैना: तोते तो प्यार में ‘चुंबन’ भी करते हैं – एक-दूसरे की चोंच से दाना खिलाना इनका रोमांस है। मैना का नर मादा के लिए गीत गाता है।  

. खान-पान में इंसानों जैसी विविधता: शाकाहारी: गौरैया, बुलबुल, शकरखोरा – बीज, फल, फूल का रस।

मांसाहारी: दहियर, शिकरा – कीड़े, छिपकली। सर्वाहारी: कौआ तो इंसान जैसा ही है – रोटी से लेकर मरे हुए जानवर तक सब खाता है। इसी वजह से इसे ‘प्रकृति का सफाईकर्मी’ कहते हैं।

संगीत और लय: आपने बिल्कुल सही सुना है।

बुलबुल: इसे ‘भारत की कोकिला’ कहते हैं। 200 से ज्यादा तरह की आवाजें निकाल सकती है। शकरखोरा – Sunbird: मधुर और तेज आवाज में लगातार गाता है, खासकर फूलों का रस पीते समय। मैना: ये तो इंसान की आवाज की नकल भी कर लेती है। इसी वजह से इसे ‘बातूनी चिड़िया’ कहते हैं।

गौरैया: नर गौरैया की ‘चूं-चूं’ सिर्फ शोर नहीं, उसकी प्रेम की कविता है। अलग-अलग मूड के लिए अलग धुन।

नाटक, झड़प, रोमांच: झड़प: कौओं को लड़ते देखा है? इलाके के लिए, खाने के लिए, घोंसले के लिए ये जमकर झगड़ते हैं। बिल्कुल मोहल्ले के झगड़े जैसा। खतरा और होशियारी: पंडुक – Dove बहुत डरपोक है, खतरा देखते ही उड़ जाती है। वहीं दहियर अपनी टेरिटरी में किसी को घुसने नहीं देता, जमकर लड़ता है। रोमांच: बाज की नजर से बचकर दाना चुगना, आंधी-बारिश में घोंसला बचाना – इनकी जिंदगी हर दिन एक एडवेंचर है।

इंसान और पक्षी: कहां मिलते हैं? इंसानी गुण पक्षियों में उदाहरण

परिवार- गौरैया-तोता का जोड़ा, कौए का पूरा कुनबा मिलकर बच्चों को

पालना- भावनाएं कौए का शोक मनाना, तोते का अपने साथी के लिए उदास होना

संचार- बुलबुल के गीत, मैना का बोलना, कौए की अलग-अलग आवाजें खेलना कौओं को छत से फिसलते, डंडे से खेलते देखा होगा – ये मनोरंजन के लिए खेलते हैं

बिल्कुल इंसानी दिमाग सबसे बड़ी बात: आपने कहा “जब आप उन्हें करीब से देखते हैं, तो पता चलता है कि उनमें बहुत कुछ है जिससे आप जुड़ सकते हैं” – ये 100% सच है। जापान में ‘बर्ड वॉचिंग’ को डिप्रेशन की थैरेपी माना जाता है। वैज्ञानिक कहते हैं 20 मिनट चिड़ियों को देखने से स्ट्रेस हार्मोन 60% कम हो जाता है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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