ईटानगर / अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले में दो दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान तितलियों की लगभग 85 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। यह खोज जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में किए गए एक दो दिवसीय सर्वेक्षण में प्रकृति प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों की टीम ने तितलियों की खोज की है, जो इस क्षेत्र की पारिस्थितिक समृद्धि को दर्शाता है।
इस सर्वेक्षण की सबसे बड़ी उपलब्धि कुछ बेहद दुर्लभ और विशिष्ट तितलियों का मिलना है, जिनमें ‘एम्प्रेस’ (Empress), ‘चाइनीज येलो स्वैलोटेल’ (Chinese Yellow Swallowtail) और ‘फॉल्स तिब्बतन क्युपिड’ (False Tibetan Cupid) शामिल हैं। इन दुर्लभ प्रजातियों का कैमरे में कैद होना शोधकर्ताओं और पर्यावरणविदों के लिए किसी बड़ी सफलता से कम नहीं है।
महत्वपूर्ण है यह खोज
तितलियों को पर्यावरण के स्वास्थ्य का ‘प्रमुख संकेतक’ (Indicator species) माना जाता है। किसी भी क्षेत्र में तितलियों की मौजूदगी और विविधता सीधे तौर पर वहां के पौधों, जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र की शुद्धता को दर्शाती है।
अंजाव जिले में की गई यह खोज न केवल वैज्ञानिक शोध के लिए नए द्वार खोलेगी, बल्कि भविष्य में इन क्षेत्रों के संरक्षण की रणनीति बनाने में भी एक मजबूत आधार प्रदान करेगी। यह खबर यह भी संदेश देती है कि अरुणाचल के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में अभी भी प्रकृति के ऐसे अनमोल खजाने छिपे हैं, जिनका सही संरक्षण करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। (फोटो साभार -Joy Vidyanta के फेसबुक वाल से https://www.facebook.com/groups/1411055385781038/user/100006112830732/)















