Author: admin
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टेक्नोलॉजी और नेचर-बेस्ड समाधानों से शहरों में जैव विविधता बढ़ाने पर एक दिवसीय विचार-मंथन सत्र”
पटना, 16 मई 2026/ राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना, अशोक राजपथ में शनिवार को “प्रौद्योगिकी संचालित एवं प्रकृति आधारित समाधानों के माध्यम से बुनियादी ढांचे और परिदृश्य वास्तुकला योजना में शहरी जैव विविधता का एकीकरण” विषय पर एक दिवसीय विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया गया।मौके पर एनआईटी पटना के एचएजी प्रोफेसर प्रो. रमाकर झा ने कहा…
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पर्यावरण संकट से जूझती पूरी दुनिया
प्रो. (डॉ.) श्याम नंदन प्रसाद/ आज सम्पूर्ण विश्व गंभीर पर्यावरण संकट का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग तथा प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन मानव अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुका है। यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि मुख्यतः मानव जनित गतिविधियों का परिणाम है। यदि समय रहते ठोस…
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गौरैया संरक्षण के लिए कानूनी ढाल है वन्यजीव(संरक्षण)अधिनियम
संजय कुमार/ घर-आँगन में चहकने-फुदकने, बचपन की साथ और किसान मित्र घरेलू गौरैया के संरक्षण को लेकर भारत में कोई अलग से ‘गौरैया अधिनियम’ यानि कानून नहीं बना है, लेकिन इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव कानून और विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। खेतों में बढ़ता कीटनाशक का…
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गौरैया एक सर्वहारा पक्षी है मांसाहारी नहीं
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया एक सर्वाहारी पक्षी है। मांसाहारी जीव नहीं है। इसके आहार में किट,पतंगा शामिल है। खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों का भक्षण करना गौरैया पसंद करती है और उसे अपने बच्चों को भी खिलाती हैं। साथ ही इन्सान के घरों में प्रवेश कर अनाज के साथ कीड़े-मकोड़े को खाती…
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अमेरिकी जादूगर के नीले जादू की क़ैद में हिमाचल..!!
संजीव शर्मा / दुनिया भर के लोगों को अपने श्वेत-बर्फीले हुस्न, आकाश छूते चीड़-देवदार और प्रकृति के हरियाली भरे श्रृंगार से अपनी ओर खींचने वाला हिमाचल प्रदेश इन दिनों एक अमेरिकी जादूगर के नीले जादू के मोहपाश में बंधा हुआ है। आमतौर पर जादूगर वैसे तो काला जादू करते हैं लेकिन इस विदेशी जादूगर ने…
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‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम गुजरात के सासन गिर में
“शेर भारत के गौरव, साहस और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है; प्रोजेक्ट लायन गिर क्षेत्र में एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण को मजबूत कर रहा है: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री” नई दिल्ली: 14 MAY 2026 / अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) शिखर सम्मेलन 2026 से पहले आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला के…
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‘Lion’ Species Spotlight Programme at Sasan Gir Gujarat,
*‘Gir’ a living example of how Economic Progress can go hand in hand with Wildlife Conservation through an Ecological Approach: Chief Minister (Gujarat)*. Lion is a symbol of India’s pride, courage and natural heritage; Project Lion strengthening Long-Term Conservation of Asiatic Lions in Gir Landscape: Bhupender Yadav,Union Minister for Environment, Forest and Climate Change. New…
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लौट आओ नन्हे दोस्त गौरैया
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया और इंसान की दोस्ती नई नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी है। इन्सान जहाँ-जहाँ गया पीछे-पीछे नन्ही गौरैया उसके घर-आँगन या आसपास चली आई और साथ-साथ रहने लगी। बच्चों का बचपन उसके साथ गुजरा, तो खेतों में लगी फसलों एवं बाग़-बगीचा के फल-फूल-सब्जी को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों को अपना आहार बना…
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देश भर में गूंजेगी ‘प्रोजेक्ट बिग कैट’ की दहाड़
नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बड़ी बिल्लियों (Big Cats) के संरक्षण में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित करने के लिए एक मेगा अभियान की शुरुआत की है। मंत्रालय देश के विभिन्न हिस्सों में पांच प्रमुख प्रजातियों—बाघ, एशियाई शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता—पर आधारित विशेष विषयगत कार्यक्रमों का…
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गौरैया के लिए मोबाइल फोन टावर कितना खतरनाक ?
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया की संख्या में कमी के पीछे के कारणों में एक बड़ा कारण मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन को बताया जाता है। स्टेट ऑफ इंडियंस बर्ड्स ने इसे पुख्ता सबूत नहीं माना है। जबकि गौरैया की संख्या में कमी के पीछे आहार की कमी, बढ़ता आवासीय संकट, कीटनाशक का व्यापक प्रयोग,…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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