Author: admin
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गंभीर संकट बना महासागरों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा
जनसत्ता संवाद/ महासागरों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है। इस संकट पर काबू पाने के लिए तकनीकी उपाय पर जोर दिया जा रहा है। इसका असली समाधान प्लास्टिक की खपत घटाने और टिकाऊ विकल्प अपनाने में है।समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण इस सदी की सबसे बड़ी पर्यावरणीय और नीतिगत चुनौतियों में से एक…
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पर्यावरण संरक्षण के लिए डॉ.नंदीपति तिवारी तथा प्रो.अवध किशोर पाण्डेय का चयन
निशांत रंजन/पटना :19.5.20 26 / र्यावरण संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी डॉ. नंदीपति तिवारी तथा प्रो. अवध किशोर पाण्डेय का चयन समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रणी एवं प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्था कमलादेवी जनसेवा संस्थान द्वारा प्रदान किए जाने वाले अति प्रतिष्ठित “पर्यावरण मित्र सम्मान 2026” के लिए किया…
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जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा लोगों में अकेलापन
अधिक गर्मी से लोगों को बाहर निकलना हो रहा मुश्किल सिडनी, एजेंसी। जलवायु परिवर्तन को पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा माना जाता था, लेकिन दावा किया गया कि यह लोगों के सामाजिक रिश्तों और आपसी जुड़ाव को भी कमजोर कर रहा है। सिडनी विश्वविद्यालय के नए अध्ययन में पाया गया कि बढ़ती गर्मी,…
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सोनपुर मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर पर्यावरण जन जागरूकता
सोनपुर : 18 मई 2026/ विश्व पर्यावरण दिवस के मद्देनजर सोमवार को सोनपुर मंडल के अंतर्गत विभिन्न प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के बीच व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा स्वच्छ एवं हरित जीवनशैली को बढ़ावा देना था। अभियान के दौरान यात्रियों…
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गौरैया के लिए कितना कारगर हैं रंगे कृत्रिम घोंसले?
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया का हमारे घर-आँगन से मुँह मोड़ने के पीछे आवासीय संकट एक बड़ा कारण है। बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के जंगलों ने गौरैया के प्राकृतिक ठिकानों को छीन लिया है। ऐसे में गौरैया की ‘घर वापसी’ के लिए कृत्रिम घोंसले लगाने का अभियान ज़ोर-शोर से चल रहा है। आज बाज़ार में प्लाईवुड,…
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100 में 80 मछलियों की किस्में विलुप्ति के कगार पर
संवाददाता, पटना/ बिहार की नदियों, चौर, आर्द्रभूमि और झीलों से समृद्ध बिहार में कभी 100 से अधिक छोटी-बड़ी देसी मछली प्रजातियां प्राकृतिक रूप से पायी जाती थीं. लेकिन, अब इनमें से कई प्रजातियां तेजी से गायब हो रही हैं. सौ में लगभग 20 प्रजाति की मछली ही बिहार में मिल रही है. वर्तमान में रोहू…
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जलवायु परिवर्तन से लड़ेंगी जीविका दीदी
संवाददाता ,पटना / ग्रामीण महिलाओं को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निबटने के लिए सशक्त बनाने की दिशा में एक पहल की गयी है. जीविका और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के बीच सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड लैंगिक समानता की स्थापना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है.यह केंद्र एलएमएनयू के गृह विज्ञान विभाग…
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गौरैया के लिए कितना कारगर हैं पेंटेड कृत्रिम घोंसले?
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया का हमारे घर-आँगन से मुँह मोड़ने के पीछे आवासीय संकट एक बड़ा कारण है। बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के जंगलों ने गौरैया के प्राकृतिक ठिकानों को छीन लिया है। ऐसे में गौरैया की ‘घर वापसी’ के लिए कृत्रिम घोंसले लगाने का अभियान ज़ोर-शोर से चल रहा है। आज बाज़ार में प्लाईवुड,…
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पर्यावरण मित्र सम्मान से नवाजे जाएंगे प्रो. श्याम नंदन प्रसाद
निशांत रंजन / पटना :18 मई 2026/ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट और उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. श्याम नंदन प्रसाद, पर्यावरणविद् का चयन समाजसेवा में अग्रणी, प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्था कमलादेवी जनसेवा संस्थान (रजि.) राजस्थान द्वारा अति प्रतिष्ठित ” पर्यावरण मित्र सम्मान , 2026 ” के लिए किया गया है । संस्था द्वारा राष्ट्रीय…
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गौरैया एक पत्नीक होती है
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया के रोचक पक्षी है। जो इंसान के बेहद करीब और कई मायने में मिलती – जुलती छवि लिए रहती है। गौरैया एक पत्नीक होती हैं, और वे अपने साथी के साथ एक मजबूत बंधन बनाती हैं। साथ ही वे अपने घोंसले के स्थान से भी बहुत जुड़ी हुई होती हैं। प्रजनन…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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