पटना। गौरैया के पलायन के पीछे ध्वनि प्रदूषण अहम है। वाहनों हो या डीजे की कानफाड़ू शोर। इससे घरेलू गौरैया प्रभावित होती है। पटना के रामकृष्णनगर में साहित्यकार अशोक कुमार के घर और आसपास सैकड़ो की संख्या में गौरैया थी । सालों से अशोक कुमार दाना-पानी रखते थे। लेकिन वर्ष 2024 में गौरैया इलाके को छोड़ गई। वजह था बारातघर में लगातार डीजे का शोर वह भी उसके अंडे देने के मौसम में।
अशोक कुमार बताते हैं, घर में गैरेज के शटर, बॉक्स और पेड़ों पर बड़ी संख्या में गौरैया रहती थी लेकिन लगातार बारातघर में शादी या अन्य कार्यक्रम के दौरान बजने वाले डीजे की आवाज से परेशान हो कर गौरैया कहीं चली गई। लेकिन, मैंने दाना-पानी रखना नहीं छोड़ा। अचानक डेढ़ साल बाद पच्चीस से पचास की संख्या में गौरैया वापस आयी और फिर से गौरैया की चहचहाहट सुनाई पड़ने लगी है। गौरैया के जाने से बहुत दुखी था। लेकिन, दाना-पानी रखना नहीं छोड़ा।
गौरैया के लिए आप दाना-पानी रखते हैं। कृत्रिम बॉक्स लगाते हैं, तो उसे भूलती नहीं है। एक न एक दिन अपने पुराने परिवेश में लौटती है। रामकृष्णनगर में गौरैया की घर वापसी इसी बात का संकेत हैं। साथ ही अगर परिवेश उसके अनुकूल न हो तो वह पलायन कर जाती है और एक दिन वापस लौटकर देखती है कि परिवेश ठीक है या नहीं । अगर उसे अच्छा लगता है तो वह पुन: रहने लगती है ।
अशोक कुमार कहते हैं, अक्सर गौरैया अपना घोंसला शटर के होल में बनाती ठी । उसे तब तक नहीं खोलता हूँ जब तक गौरैया के बच्चे उड़ नहीं जाते। उनके बंद घर में बिजली के स्वीच बोर्ड के होल और वेंटिलेशन पर घास-फूस-तिनका रख घोंसला बनाती है। अंडे दिये, बच्चे निकले और फिर अपने परिवार के संग उड़ती है।















