Category: News
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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के प्रवर्तन कार्य बल की 130वीं बैठक
“वायु प्रदूषण को प्रभावी तरीके से कम करने के लिए कड़े प्रवर्तन, बेहतर डेटा की सटीकता में सुधार, मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय एवं निर्धारित पर्यावरणीय मानदंडों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता पर दिया गया बल दिया” नई दिल्ली ,5मई 2026/ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम)…
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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम
पटना /4-5-2026 । देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु 01 अप्रैल, 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के संबंध में जागरूकता अभिवर्धित करने के उद्देश्य से बिहार के सभी शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जनित ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए नियमावली के विभिन्न प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण…
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मेघालय में जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की हुई खोज
मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स (East Khasi Hills) में हाल ही में वैज्ञानिकों ने जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की खोज की है। यह खोज लगभग 100 साल के लंबे अंतराल के बाद हुई है, जिसने भारत में जुगनुओं के संरक्षण और शोध की एक नई राह खोली है। दुर्लभ जुगनू में पहला…
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“सालभर में डेनमार्क जितना जंगल खत्म”
*मैरीलैंड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने किया अहम विश्लेषण* मैरीलैंड, एजेंसी। साल 2025 में दुनिया ने करीब 43 लाख हेक्टेयर (1.06 करोड़ एकड़) वर्षावन खो दिए। यह लगभग पूरे डेनमार्क देश के आकार के बराबर का क्षेत्र है। मैरीलैंड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया ने हर मिनट 11 फुटबॉल मैदानों जितने बड़े वन खत्म हो…
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भारत में हुआ 99 रामसर साइट, जल्द होगा 100 का आंकड़ा
संजय कुमार/ भारत में जल्द ही रामसर साइट का आंकड़ा 100 छूने वाला है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की शेखा झील बर्ड सेंक्चुरी को भारत का 99 वां अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि, रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया है। इस घोषणा के साथ ही देश में रामसर साइट्स की कुल संख्या बढ़कर 99 हो…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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