संवाददाता ,पटना / ग्रामीण महिलाओं को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निबटने के लिए सशक्त बनाने की दिशा में एक पहल की गयी है. जीविका और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के बीच सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड लैंगिक समानता की स्थापना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है.
यह केंद्र एलएमएनयू के गृह विज्ञान विभाग में स्थापित किया जायेगा. इस केंद्र के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और अनुकूलन कोलेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाये जायेंगे. महिलाओं की नेतृत्व क्षमता विकसित करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित होंगे. साथ ही शोध, प्रशिक्षण के जरिये अकादमिक एवं सामुदायिक समन्वय को मजबूत किया जायेगाकेंद्र के तहत सतत एवं जलवायु-अनुकूल जीविकोपार्जन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भी संचालित की जायेंगी. विश्वविद्यालय परिसर में ‘जीविका दीदी की नर्सरी’ को मॉडल डेमोंस्ट्रेशन और प्रशिक्षण इकाई के रूप में विकसित किया जायेगा. यह नर्सरी जलवायु अनुकूलन, वनीकरण, महिला उद्यमिता और व्यावहारिक शिक्षण का एक सशक्त केंद्र बनेगी. इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी नयी राह खुलेगी.(साभार- प्रभात खबर ,पटना ,18-5-2026)
जलवायु परिवर्तन से लड़ेंगी जीविका दीदी
संवाददाता ,पटना / ग्रामीण महिलाओं को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निबटने के लिए सशक्त बनाने की दिशा में एक पहल की गयी है. जीविका और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के बीच सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड लैंगिक समानता की स्थापना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है.यह केंद्र एलएमएनयू के गृह विज्ञान विभाग…

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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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