पर्यावरण मित्र सम्मान से नवाजे जाएंगे प्रो. श्याम नंदन प्रसाद

निशांत रंजन / पटना :18 मई 2026/ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट और उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. श्याम नंदन प्रसाद, पर्यावरणविद् का चयन समाजसेवा में अग्रणी, प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्था कमलादेवी जनसेवा संस्थान (रजि.) राजस्थान द्वारा अति प्रतिष्ठित ” पर्यावरण मित्र सम्मान , 2026 ” के लिए किया गया है । संस्था द्वारा राष्ट्रीय…

निशांत रंजन / पटना :18 मई 2026/ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट और उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. श्याम नंदन प्रसाद, पर्यावरणविद् का चयन समाजसेवा में अग्रणी, प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्था कमलादेवी जनसेवा संस्थान (रजि.) राजस्थान द्वारा अति प्रतिष्ठित ” पर्यावरण मित्र सम्मान , 2026 ” के लिए किया गया है ।

संस्था द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय कार्य करने वाले चयनित महानुभावों को दिया जाता है । संस्थान अध्यक्ष डॉ. एस के फगेड़िया ने बताया कि पर्यावरणविद् प्रो. श्याम नंदन प्रसाद का पर्यावरण संरक्षण में काफी सराहनीय योगदान रहा है । यह सम्मान प्रो. प्रसाद को विश्व पर्यावरण दिवस ( 5 जून , 2026 ) को दिया जाएगा । प्रो. प्रसाद ने बताया कि आज मेरे वैवाहिक जीवन की 48 वीं वर्षगांठ पर उक्त प्रतिष्ठित अवॉर्ड के लिए चयन की सूचना से मैं भाव विभोर हूं । आगे उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर मौजूद पर्यावरण संकट से मानव और सभी जीवों को मुक्ति दिलाना उनके जीवन का एक मात्र उद्देश्य हैं । पटना शहर में विलुप्ति के कगार पर खड़ी मानव जीवन के लिए वरदान गौरैया को प्राकृतिक वास और अनुकूल दाना पानी की व्यवस्था कर पटना शहर में वापस लाने में प्रो. प्रसाद ने सफलता पायी है । उनके इस उल्लेखनीय योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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