Category: Blog
-

प्रकृति के संग लद्दाख की गौरैया ‘चिपा ग्याओ’
संजय कुमार/ गौरैया / केंद्र शासित राज्य लद्दाख के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ‘चिपा ग्याओ’ पाई जाती है। लद्दाख में घरेलू गौरैया को दिलचस्प नाम ‘चिपा ग्याओ’ से पुकारा जाता है। हिमायल रेंज की पहाड़ियों से घिरे लद्दाख के लोग भले ही घरेलू गौरैया को ‘चिपा ग्याओ’ से पुकारते हैं लेकिन…
-

गौरैया सिर्फ पक्षी नहीं पारिस्थितिक संकेतक है
संजय कुमार /गौरैया / छोटे आकार वाली खूबसूरत गौरैया का ज़िक्र आते ही बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं। कभी घर-आंगन का अभिन्न हिस्सा रही यह चिड़िया आज कंक्रीट के जंगलों में अपना अस्तित्व तलाश रही है। 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ के रूप में मना कर हम इसके संरक्षण का संकल्प लेते…
-

यादों के झरोखे में गौरैया
संजय कुमार/ शायद ही कोई हो जिसने नन्ही गौरैया के साथ अपना बचपन न गुजारा हो। घर-आँगन में जमीन पर पड़े दाने को चुगने आने वाली गौरैया को टोकरी में फंसा कर उसे पकड़ना और फिर उस पर रंग लगा कर उड़ा देना। और, जब दूबारा आती तो ताली बजा-बजा कर बताना, मेरी वाली गौरैया।…
-

कबूतरों के आतंक से घरेलू गौरैया सहित अन्य चिड़िया प्रभावित
संजय कुमार/शहरों में कबूतरों की बढ़ती संख्या ने जहां इंसान को परेशान कर रखा है वहीँ घर -आंगन की चिड़ियां घरेलू गौरैया और दूसरी चिड़ियों को हमसे दूर कर रहा है। शहरी इलाकों में कबूतर को दाना डालने की प्रवृत्ति ने इंसान और गौरैया का जीना मुहाल कर रखा है। गांव में घर के बाहर…
-

गौरैया का आहार में प्राकृतिक आहार
संजय कुमार/ गौरैया / घरेलू गौरैया के आहार में प्राकृतिक रूप से कच्चे अनाज और बीज प्रमुखता से शामिल है। इसे वह पसंद से खाती है।प्राकृतिक-शारीरिक तौर से गौरैया का पाचन तंत्र कच्चे दानों को पचाने के लिए बेहतर तरीके से अनुकूलित होता है। जबकि कुछ लोग पका हुआ चावल आदि गौरैया को आहार में…
-

गौरैया बचाओ, जीवन बचाओ
संजय कुमार / गौरैया / पर्यावरण संरक्षण में सिर्फ इंसानों की भूमिका अहम् नहीं है बल्कि इस प्रकृति में वास करने वाले हर जीव-जंतुओं की भूमिका अहम् है। और, इसमें नन्ही चिड़ियाँ गौरैया को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। अक्सर हम जब पर्यावरण संरक्षण की बात करते हैं तो पृथ्वी का आवरण-पर्यावरण, वायुमंडल ,…
-

घर-आँगन की नन्ही परी गौरैया
संजय कुमार/ गौरैया / अनायास ही वह दौर याद आता है जब नींद किसी अलार्म या मोबाईल के रिंग टोन से नहीं, बल्कि घर-आँगन,मुंडेर, खिड़की या बाग़-बगीचा में बैठी नन्ही गौरैया की ‘चीं-चीं’ से खुला करती थी। वह नन्ही सी चिड़ियाँ हमें केवल नींद से जगती ही नहीं बल्कि घर-आंगन में उसका फुदकना, चहकना, फुर्र …
-

कहाँ खो गई गौरैया की चीं-चीं
संजय कुमार/ गौरैया / वह भी क्या दिन थे, जब सुबह की पहली किरण के साथ खिड़की के रोशनदान या आँगन या फिर मुंडेर या घर से सटे बाग़-बाड़ी के पेड़ों पर से एक मधुर संगीत गूँजा करता था, ‘चीं-चीं, चीं-चीं’। यह हमारी नन्ही दोस्त गौरैया की चहचाहट होता थी। गौरैया की ‘चीं-चीं, चीं-चीं’ सिर्फ…
-

गौरैया संरक्षण क्यों ?
गौरैया एक छोटा और आकर्षक पक्षी है, जो अपने चहचहाने और झुंड में रहने के लिए जाना जाता है। यह पक्षी लगभग 10-15 सेमी लंबा होता है और इसका वजन लगभग 20-30 ग्राम होता है। गौरैया की सबसे बड़ी विशेषता इसका भूरे और सफेद रंग का पंख होता है, जो इसे एक अनोखा और आकर्षक…
-

आई लव स्पैरो
“आई लव स्पैरो” कोई राजनीतिक नारा नहीं है बल्कि इंसान के घर-आँगन में चह्कने – फुदकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया को संरक्षित करने का सन्देश है। इसकी शुरुआत 2010 में तब हुआ था, जब नेचर फॉर एवर सोसाइटी ऑफ इंडिया और इको-सिस एक्शन फाउंडेशन ऑफ फ्रांस ने 20 मार्च 2010 को विश्व गौरैया दिवस की…
Latest News

संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें 📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com
🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
You May Have Missed











