Category: Blog

  • ‘एक ही चिड़िया,दो अलग जिंदगी’ गाँव-शहर की घरेलू गौरैया

    ‘एक ही चिड़िया,दो अलग जिंदगी’ गाँव-शहर की घरेलू गौरैया

    संजय कुमार/ घरेलू गौरैया जो पासर डोमेस्टिकस परिवार की एक छोटी पक्षी है, दुनिया के अधिकांश हिस्सों में ग्रामीण और शहरी इलाकों में पायी जाती है। भले ही एक चिड़ियाँ है लेकिन गाँव और शहर की गौरैया की अलग-अलग जिन्दगी है। बदलते परिवेश में पिछले दो दशक में गांव और शहर की गौरैया की लाइफस्टाइल…

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  • प्रवास बदल रही है घरलू गौरैया

    प्रवास बदल रही है घरलू गौरैया

    संजय कुमार / हमारे घर आंगन में चहकने-फुदकने वाली घरेलू गौरैया नन्ही चिड़ियाँ बचपन की साथी आज कई गाँव और शहर  के घर-आँगन से रूठ कर कहीं और चली गयी है। आमतौर पर दिखने वाली गौरैया कही बड़ी तादाद में दिखती है। कहीं बमुश्किल से दिखती है, तो कहीं बिलकुल नहीं। देश की राजधानी दिल्ली…

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  • दिल्ली में गौरैया : प्रयास को चाहिये पंख

    दिल्ली में गौरैया : प्रयास को चाहिये पंख

    संजय कुमार/ हमारे घर आंगन में चहकने-फुदकने वाली घरेलू गौरैया की स्थिति देश भर में अच्छी नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली की राजकीय पक्षी गौरैया की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। कुछ इलाकों में ही यह दिखती। हाल बेहाल है। खासकर शहरी इलाकों में । ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं है तो कहीं नहीं।…

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  • शुभंकर-गौरैया : संरक्षण का देता सन्देश

    शुभंकर-गौरैया : संरक्षण का देता सन्देश

    संजय कुमार/ घर आँगन में चहकने-फुदकने वाली गौरैया भी शुभंकर बन चुकी है। इसके विलुप्त के मद्देनजर बचपन की नन्ही साथी, किसान मित्र, गौरैया का संरक्षण करने के लिए विश्व भर में मुहिम चल रहे हैं। संरक्षण को लेकर 20 मार्च 2010 को घोषित विश्व गौरैया दिवस से लगातार गौरैया संरक्षण से जन भागीदारी के…

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  • गौरैया का असली घर खोह, दीवार के छेद

    गौरैया का असली घर खोह, दीवार के छेद

    संजय कुमार/ गौरैया सदियों से इंसानों के सबसे करीब रहने वाला पक्षी रही है।  इन्हें अपने घोंसले के लिए इंसान के घरों के अंदर-बाहर, दीवारों के खोह (सुराख) और वेंटिलेटर जैसी जगहें सबसे ज्यादा पसंद आती हैं। गौरैया को यह जगह इसलिए पसंद आती है क्योंकि उसे सुरक्षा मिलती है। दीवारों के खोह या घरों…

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  • शिकारी पक्षियों से गौरैया की घटती आबादी

    शिकारी पक्षियों से गौरैया की घटती आबादी

    संजय कुमार / घरेलू गौरैया के संख्या में कमी के पीछे शिकारी पक्षी भी एक कारण हैं। देखा गया है कि इन्सान के आसपास जहाँ-जहाँ गौरैया रहने लगी, वहां देर सवेर शिकारी मांसाहारी पक्षी भी पहुँच जाते हैं। यह सच है कि गौरैया इंसान के साथ और उसके आसपास रहती है क्योंकि यहाँ उसे सुरक्षा…

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  • दुनिया भर में सबसे अधिक घरेलू गौरैया की है आबादी तकरीबन 50 करोड़ से 150 करोड़

    दुनिया भर में सबसे अधिक घरेलू गौरैया की है आबादी तकरीबन 50 करोड़ से 150 करोड़

    संजय कुमार/ “स्टेट ऑफ इंडियंस बर्ड्स 2023”  ने अपनी रिपोर्ट में भारत के कई पक्षियों की प्रजातियां को खतरे में बता कर सबको चौंका दिया है। साथ ही चिड़ियों के 178  प्रजातियों को संरक्षित करने की बात भी कही है। विलुप्ति के सवालों से लिपटी गौरैया के ऊपर भी मंडराते खतरे की चर्चा होती रहती…

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  • विश्व की गौरैया: विविधता और अस्तित्व का संसार

    विश्व की गौरैया: विविधता और अस्तित्व का संसार

    विश्व की गौरैया: विविधता और अस्तित्व का संसार संजय कुमार / गौरैया (Sparrow) दुनिया भर में पाई जाने वाली उन चुनिंदा छोटी चिड़ियों में से एक है, जो इंसान के सबसे करीब रही हैं। गाँव की चौपाल हो, शहर की बालकनी, खेत-खलिहान हों या फिर जंगल और रेगिस्तान गौरैया ने हर माहौल को अपना घर…

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  • भारत में गौरैया : सभी मनमोहक-आकर्षक  

    भारत में गौरैया : सभी मनमोहक-आकर्षक  

    संजय कुमार / भारत में गौरैया परिवार Passeridae की कुल सात  प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यों तो भारत में घरेलू गौरैया का ही बोल बाला है। भारत के सात तरह की गौरैया में – घरेलू गौरैया, ट्री स्पैरो, सिंध गौरैया, रसेट गौरैया, पीली-गर्दन, डेड सी स्पैरो और स्पैनिश गौरैया पाई जाती हैं। गौरैया विश्वभर में…

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  • गौरैया के पंख: 3 ग्राम में छुपा है कई राज

    गौरैया के पंख: 3 ग्राम में छुपा है कई राज

    संजय कुमार/ घरेलू गौरैया एक बेहद छोटी और फुर्तीली चिड़िया है। वजन सिर्फ 24-30 ग्राम। उसके शरीर में लगभग 2000 पंख होते हैं और सारे पंख मिलाकर सिर्फ 2.5 से 3 ग्राम के होते हैं । शरीर में दो डायना होता है, प्रत्येक में 16-16 पंख और पूँछ में दस पंख,जो उसकी जीवनशैली, सुरक्षा और…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन