Category: Blog

  • गौरैया के लिए लगायें झाड़ीनुमा पेड़

    गौरैया के लिए लगायें झाड़ीनुमा पेड़

    संजय कुमार/ गौरैया को झाड़ी पसंद है, इसलिए क़ि उसके लिये छुपने, आराम और सुरक्षा के लिये बेहतर जगह है। झाड़ी में वह शिकारी पशु-पक्षियों जैसे  बिल्ली, सांप, बाज आदि के हमले से आसानी से अपना बचवा करती है। बाड़, देशी झाड़ियाँ, बोगनवेलिया, कनेल, सूरजमुखी, कॉसमॉस, मेहंदी, मधुमालती, करौंदा आदि की झाड़ी इनको खास पसंद…

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  • जब इंसान ने प्रकृति से जंग हारी : गौरैया का नरसंहार

    जब इंसान ने प्रकृति से जंग हारी : गौरैया का नरसंहार

    “चीन में 1958 में माओ त्से-तुंग ने ग्रेट लीप फॉरवर्ड के तहत अभियान शुरू किया और, चूहे,मक्खी,मच्छर और गौरैया को मारने का आदेश दिया “ संजय कुमार/चीन में जब गौरैया को चुन-चुन कर मारा जा रहा था, तब गौरैया छुपने के लिए सुरक्षित स्थान पर जाने लगी थी। झुंड बनाकर गौरैया, पीकिंग स्थित पोलैंड के…

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  • बिहार का शिवकुंड गांव बना “गौरैया गाँव”

    बिहार का शिवकुंड गांव बना “गौरैया गाँव”

    दिल्ली के बाद यह दूसरा “गौरैया गाँव” है शिवकुंड गांव का “स्पैरो विलिज” संजय कुमार /  बिहार के मुंगेर जिले के शिवकुंड गांव की पहचान के साथ अब “स्पैरो विलिज” यानि गौरैया गाँव के रूप में हो गई है। दिल्ली के बाद यह दूसरा “गौरैया गाँव” है। 20 मई 2022 को दिल्ली में देश का…

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  • गौरैया में परजीवी मिलते हैं पर उससे मौत नहीं होती

    गौरैया में परजीवी मिलते हैं पर उससे मौत नहीं होती

    संजय कुमार / गौरैया में परजीवी मिलते हैं। यह बात सही है कि गौरैया परजीवियों से संक्रमित होकर बीमार होती है लेकिन उससे उनकी मौत नहीं होती । मौत के पीछे कीटनाशक, खाना न मिलना आदि कारण हो सकते हैं । वेब साईट pubmed.ncbi.nlm.nih.gov की माने तो तुर्की में 48 गौरैया की जांच में 85.4%…

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  • दुर्लभ जीव की सुरक्षा के हो रहे प्रयास

    दुर्लभ जीव की सुरक्षा के हो रहे प्रयास

    सुमन सिंह/ कछुआ एक ऐसा जीव है, जिसके शरीर पर हड्डियों और केराटिन से बना खोल होता है, जो उसे शिकारियों से बचाता है। निस्संदेह, पृथ्वी के इस सबसे पुराने जीव का जीवन प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, आवास के विनाश और अवैध तस्करी के कारण खतरे में है और इसकी कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार…

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  • -गौरैया जैव विविधता का संकेतक है।

    -गौरैया जैव विविधता का संकेतक है।

    विश्व जैव विविधता दिवस 22 मई संजय कुमार / गौरैया जैव विविधता का संकेतक है। गौरैया का परिवेश में रहना बताता है कि  आस-पास का इकोसिस्टम कितना स्वस्थ है। गौरैया दिखे यानि पर्यावण स्वस्थ्य, हवा साफ है, कीड़े-मकोड़े हैं, पेड़-झाड़ियां हैं आदि है। मतलब वहां का जैव विविधता ठीक है। अगर गौरैया गायब है तो…

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  • गौरैया का आहार में प्राकृतिक आहार

    गौरैया का आहार में प्राकृतिक आहार

    संजय कुमार/ घरेलू गौरैया के आहार में प्राकृतिक रूप से कच्चे अनाज और बीज  प्रमुखता से शामिल है। इसे वह पसंद से खाती है।प्राकृतिक-शारीरिक तौर से गौरैया का पाचन तंत्र कच्चे दानों को पचाने के लिए बेहतर तरीके से अनुकूलित होता है। जबकि कुछ लोग पका हुआ चावल आदि गौरैया को आहार में देते हैं…

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  • बढ़ता तापमान : गौरैया के लिए जीना मुहाल

    बढ़ता तापमान : गौरैया के लिए जीना मुहाल

    संजय कुमार / बचपन की यादों में मई-जून की वह तपती दोपहरी आज भी जिंदा है, जब दादी कहती थीं,घर से बाहर मत निकलो, लू लग जाएगी।उस तपती धूप में भी घर के आंगन में रखी नांद या पानी से भरी बाल्टी पर कई गौरैया चोंच खोले पानी पीती दिख जाती थीं। आज भी वही…

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  • गंभीर संकट बना महासागरों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा

    गंभीर संकट बना महासागरों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा

    जनसत्ता संवाद/ महासागरों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है। इस संकट पर काबू पाने के लिए तकनीकी उपाय पर जोर दिया जा रहा है। इसका असली समाधान प्लास्टिक की खपत घटाने और टिकाऊ विकल्प अपनाने में है।समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण इस सदी की सबसे बड़ी पर्यावरणीय और नीतिगत चुनौतियों में से एक…

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  • गौरैया के लिए कितना कारगर हैं रंगे कृत्रिम घोंसले?

    गौरैया के लिए कितना कारगर हैं रंगे कृत्रिम घोंसले?

    संजय कुमार/ घरेलू गौरैया का हमारे घर-आँगन से मुँह मोड़ने के पीछे आवासीय संकट एक बड़ा कारण है। बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के जंगलों ने गौरैया के प्राकृतिक ठिकानों को छीन लिया है। ऐसे में गौरैया की ‘घर वापसी’ के लिए कृत्रिम घोंसले लगाने का अभियान ज़ोर-शोर से चल रहा है। आज बाज़ार में प्लाईवुड,…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन