Category: Blog

  • शुभंकर-गौरैया : संरक्षण का देता सन्देश

    शुभंकर-गौरैया : संरक्षण का देता सन्देश

    संजय कुमार/ घर आँगन में चहकने-फुदकने वाली गौरैया भी शुभंकर बन चुकी है। इसके विलुप्त के मद्देनजर बचपन की नन्ही साथी, किसान मित्र, गौरैया का संरक्षण करने के लिए विश्व भर में मुहिम चल रहे हैं। संरक्षण को लेकर 20 मार्च 2010 को घोषित विश्व गौरैया दिवस से लगातार गौरैया संरक्षण से जन भागीदारी के…

    Continue Reading

  • गौरैया का असली घर खोह, दीवार के छेद

    गौरैया का असली घर खोह, दीवार के छेद

    संजय कुमार/ गौरैया सदियों से इंसानों के सबसे करीब रहने वाला पक्षी रही है।  इन्हें अपने घोंसले के लिए इंसान के घरों के अंदर-बाहर, दीवारों के खोह (सुराख) और वेंटिलेटर जैसी जगहें सबसे ज्यादा पसंद आती हैं। गौरैया को यह जगह इसलिए पसंद आती है क्योंकि उसे सुरक्षा मिलती है। दीवारों के खोह या घरों…

    Continue Reading

  • शिकारी पक्षियों से गौरैया की घटती आबादी

    शिकारी पक्षियों से गौरैया की घटती आबादी

    संजय कुमार / घरेलू गौरैया के संख्या में कमी के पीछे शिकारी पक्षी भी एक कारण हैं। देखा गया है कि इन्सान के आसपास जहाँ-जहाँ गौरैया रहने लगी, वहां देर सवेर शिकारी मांसाहारी पक्षी भी पहुँच जाते हैं। यह सच है कि गौरैया इंसान के साथ और उसके आसपास रहती है क्योंकि यहाँ उसे सुरक्षा…

    Continue Reading

  • दुनिया भर में सबसे अधिक घरेलू गौरैया की है आबादी तकरीबन 50 करोड़ से 150 करोड़

    दुनिया भर में सबसे अधिक घरेलू गौरैया की है आबादी तकरीबन 50 करोड़ से 150 करोड़

    संजय कुमार/ “स्टेट ऑफ इंडियंस बर्ड्स 2023”  ने अपनी रिपोर्ट में भारत के कई पक्षियों की प्रजातियां को खतरे में बता कर सबको चौंका दिया है। साथ ही चिड़ियों के 178  प्रजातियों को संरक्षित करने की बात भी कही है। विलुप्ति के सवालों से लिपटी गौरैया के ऊपर भी मंडराते खतरे की चर्चा होती रहती…

    Continue Reading

  • विश्व की गौरैया: विविधता और अस्तित्व का संसार

    विश्व की गौरैया: विविधता और अस्तित्व का संसार

    विश्व की गौरैया: विविधता और अस्तित्व का संसार संजय कुमार / गौरैया (Sparrow) दुनिया भर में पाई जाने वाली उन चुनिंदा छोटी चिड़ियों में से एक है, जो इंसान के सबसे करीब रही हैं। गाँव की चौपाल हो, शहर की बालकनी, खेत-खलिहान हों या फिर जंगल और रेगिस्तान गौरैया ने हर माहौल को अपना घर…

    Continue Reading

  • भारत में गौरैया : सभी मनमोहक-आकर्षक  

    भारत में गौरैया : सभी मनमोहक-आकर्षक  

    संजय कुमार / भारत में गौरैया परिवार Passeridae की कुल सात  प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यों तो भारत में घरेलू गौरैया का ही बोल बाला है। भारत के सात तरह की गौरैया में – घरेलू गौरैया, ट्री स्पैरो, सिंध गौरैया, रसेट गौरैया, पीली-गर्दन, डेड सी स्पैरो और स्पैनिश गौरैया पाई जाती हैं। गौरैया विश्वभर में…

    Continue Reading

  • गौरैया के पंख: 3 ग्राम में छुपा है कई राज

    गौरैया के पंख: 3 ग्राम में छुपा है कई राज

    संजय कुमार/ घरेलू गौरैया एक बेहद छोटी और फुर्तीली चिड़िया है। वजन सिर्फ 24-30 ग्राम। उसके शरीर में लगभग 2000 पंख होते हैं और सारे पंख मिलाकर सिर्फ 2.5 से 3 ग्राम के होते हैं । शरीर में दो डायना होता है, प्रत्येक में 16-16 पंख और पूँछ में दस पंख,जो उसकी जीवनशैली, सुरक्षा और…

    Continue Reading

  • खेतों में जहरीले कीटनाशक के प्रयोग से गौरैया सहित अन्य पक्षियों को खतरा  

    खेतों में जहरीले कीटनाशक के प्रयोग से गौरैया सहित अन्य पक्षियों को खतरा  

    संजय कुमार / पैदावार को बढ़ाने के उद्देश्य से खेतों में जहरीले कीटनाशकों एवं उर्वरकों के प्रयोग से पक्षियों की मौत हो रही है। इसमें नन्ही गौरैया को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। गौरैय की कमी के पीछे कीटनाशक भी एक बड़ा कारण है।   जहरीले कीटनाशकों एवं उर्वरकों के प्रयोग से पक्षियों की मौत की…

    Continue Reading

  • गौरैया की चीं-चीं में खुशी, गुस्सा, डर, प्यार सब है

    गौरैया की चीं-चीं में खुशी, गुस्सा, डर, प्यार सब है

    संजय कुमार / गौरैया झुण्ड में रहती है। शाम के समय पक्षियों के बसेरे में लौटने और सुबह-सुबह घोंसला छोड़ने से पहले, ये गौरैया सामूहिक गायन करती है, जिसे सामान्य भाषा में चहकना कहा जाता है। गौरैया चहचहाहट के  दौरान  तरह तरह की आवाज निकालते हुए एक दूसरे से संवाद करते है। दाना चुगने, आराम…

    Continue Reading

  • सात समंदर पार गौरैया की ‘चीं-चीं’ हुई कम : दुनिया बचा रही है गौरैया

    सात समंदर पार गौरैया की ‘चीं-चीं’ हुई कम : दुनिया बचा रही है गौरैया

    संजय कुमार / विश्वभर में घरेलू गौरैया पायी जाती है। घरेलू गौरैया यूरोप के यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, नीदरलैंड्स और स्कैंडिनेवियाई सहित लगभग हर देश में पाई जाती है। एशिया में यह बहुत व्यापक रूप से फैली हुई है। भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, चीन, भूटान, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के कई देशों…

    Continue Reading

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन