Category: Blog
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गौरैया ख़ुद तय करती है कहाँ रहना है उसे
संजय कुमार / सारण जिले के गरखा में सैकड़ों की तादाद में गौरैया का होना लोगों को चौंकाता है। क्योंकि इस इलाके में गौरैया संरक्षण को लेकर न तो कृत्रिम घोंसला है और न ही दानाघर लगा हुआ है और न ही कोई अभियान। गौरैया ग्रामीण परिवेश में रह रही है, जहाँ उसे प्रकृति से…
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चोंच को पंखों के नीचे दबा आराम करती है गौरैया
संजय कुमार / गौरैया आराम करते समय अपनी चोंच को पंखों के नीचे दबा लेती है। इसे “head-tucking” कहते हैं। गौरैया यह इसलिए करती है ताकि अपने शरीर को गर्म रख सकें । गौरैया के चोंच और सिर सबसे ज्यादा गर्मी छोड़ते हैं,इसलिए वह ऐसा करती है । चोंच को पंखों के नीचे दबाने से…
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घरेलू गौरैया : शारीरिक बनावट
संजय कुमार / आइये जानते हैं घरेलू गौरैया के शरीर की जानकारी किसे क्या कहते हैं- upper tail coverts (ऊपरी पूँछ का आवरण), Tail (पूँछ), under tail coverts (पूँछ के आवरण के नीचे), primaries (प्राथमिक), Vent (वायु द्वार-बाहर निकलने का मार्ग), Flank (शरीर का पार्श्व भाग), Belly(पेट), Toe (पैर की अंगुली), Claw (पंजा), Primary coverts…
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घरेलू गौरैया के विलुप्त होने के पीछे सामूहिक हत्या बड़ा कारण
संजय कुमार / कई देशों से घरेलू गौरैया के विलुप्त होने के पीछे कई कारणों में एक बड़ा कारण गौरैया की सामूहिक हत्या भी शामिल है। चौंकाने वाली बड़ी बात यह है कि इतिहास में गौरैया को “कीट” मानकर बड़े पैमाने पर सामूहिक हत्या/कत्लेआम की घटना दर्ज हैं। चीन में “चार कीट अभियान” 1958 से…
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बचपन में चिड़ियाँ मतलब दो ही पक्षी होते थे – गौरैया और कौआ
संजय कुमार / बचपन में चिड़ियाँ मतलब दो ही पक्षी होते थे – गौरैया और कौआ। अंग्रेजी में क्रमश: हाउस स्पैरो और हाउस क्रो। दोनों ही ‘हाउस’ पक्षी यानि कि घरेलू जैसे। कौआ हमें बचपन में शायद उतना नहीं लुभा पाया, जितनी नन्ही गौरैया ने। कारण चाहे जो भी हो – कौए की कांव-कांव हो…
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पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में गौरैया और पर्यावरण
संजय कुमार / पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में गौरैया और पर्यावरण अहम मुद्दा है। विश्व भर में गौरैया की विलुप्त का सवाल उठता रहता है तो वही पर्यावरण के ऊपर बढ़ते खतरे ने विश्व को चिंतित कर रखा है। प्रकृति का फेंफड़ा यानी पेड़ों की बेइंतहा कटाई और उजड़ते वन क्षेत्र से जलवायु परिवर्तन जैसी…
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खास अंदाज से सृजन करती है गौरैया
संजय कुमार / अकसर गौरैया झुण्ड में दिखती है। झुण्ड में इनकी संख्या चार से लेकर सौ तक रहती है। अकेले या इक्का – दुक्का वहीं जाती है जहां वह परिचित होती है। दाना-पानी के लिये एक आती भी है तो दूसरी भी पहुंच जाती है। जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में ये झुण्ड में…
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विश्व में डाक टिकट से गौरैया संरक्षण
संजय कुमार / गौरैया पर भारत सहित तीन दर्जन से अधिक देशों ने डाक टिकट जारी कर गौरैया संरक्षण का सन्देश देने का काम किया है। इनमें भारत, इटली, बांग्लादेश, बेलारूस, एल्डर्नी वेस्ट कोस्ट, बहरीन, असेंशियन द्वीप, बोस्ना और, हर्सेगोविना, बेल्जियम, बुल्गारिया, काबो वर्दे, सेंट यूस्टैटियस, कैरेबियन नीदरलैंड, क्यूबा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, इस्टोनिया, फ़ोरयार (फ़ैरो…
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‘सोनकंठी गौरैया’
संजय कुमार / ‘सोनकंठी गौरैया’ की कहानी कुछ अलग ही है। बिहार के मुंगेर में इसे बड़े झुंड में देखकर पक्षी प्रेमी उत्साहित हैं। यह भारत में दिखती तो है लेकिन इसकी पहुंच हमारी पारम्परिक घरेलू गौरैया की तरह घरों तक नहीं है। हां, इसे छत्तीसगढ़, बस्तर और उड़ीसा आदि के जंगलों में कभी कभार…
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गाय, गोबर और गौरैया
संजय कुमार / गाय और गोबर का संबंध गौरैया संरक्षण में अति महत्वपूर्ण है। जहां गाय और गोबर होगा वहाँ गौरैया होगी बल्कि दिखती है। वजह हैं, गौरैया गाय के गोबर से निकले अपचे भोजन को तो खाती ही है, बाद में जब वह सड़ जाता है तो उसमें से जो निकलने वाले कैटरपिलर्स यानी…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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