Category: Blog

  • गौरैया का घर: 4 इंच का संसार

    गौरैया का घर: 4 इंच का संसार

    संजय कुमार / घरेलू गौरैया कई तरह की जगहों पर घोंसला बनाती हैं, हालाँकि वह इमारतों और इंसानों द्वारा बनाई गई दूसरी संरचनाओं में बनी खाली जगहों  को ज़्यादा पसंद करती हैं। ये घोंसलों के लिए  कृत्रिम बक्सों का भी इस्तेमाल करते हैं। घरेलू गौरैया अक्सर लोगों के आस-पास घोंसला बनाती हैं। वे अक्सर ऐसी…

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  • गौरैया के लिए जब लगाएं घोंसला, कुछ बातों का रखें ध्यान

    गौरैया के लिए जब लगाएं घोंसला, कुछ बातों का रखें ध्यान

    संजय कुमार / कंक्रीट के जंगल ने घर-आंगन की दोस्त गौरैया के सामने आवासीय संकट पैदा कर दिया है। गौरैया की घर वापसी को लेकर हर प्रयास जारी है। गौरैया को आवासीय संकट से उबारने के लिए कृत्रिम घोंसला लगाया जा रहा है। ताकि, उसमें गौरैया आये और तिनका-तिनका रख घोंसला बनाये, अंडे दे और…

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  • घोंसला  लगाकर  करें  गौरैया  का  संरक्षण

    घोंसला  लगाकर  करें  गौरैया  का  संरक्षण

    संजय कुमार / इन नवंबर से अगस्त तक  घरेलू गौरैया सृजन में जुटी रहती  है। आवासीय संकट को देखते हुये इनके लिए बॉक्स यानि कृत्रिम घोंसला लगाएँ और  इनका संरक्षण करें। गौरैया जैसे-तैसे घोंसला बनाती है। जब अंडे देने का समय आता है, गौरैया इंसान के घरों या आसपास में घोंसला बनाने में जुट जाती…

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  • घरेलू गौरैया का जीवन चक्र

    घरेलू गौरैया का जीवन चक्र

    संजय कुमार / झुंड में इनकी संख्या चार से लेकर सौ तक होती है। दाना-पानी के लिए एक आता है तो दूसरा भी पहुँच जाता है। यह जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में झुंड में उड़ती है। इसका कारण यह है कि गौरैया के परिवार में नए सदस्य जुड़ते हैं। गौरैया अपने बच्चों के साथ…

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  • गौरैया के कान है रडार सिस्टम

    गौरैया के कान है रडार सिस्टम

    संजय कुमार / घरेलू  गौरैया  दिखने  में  छोटी, पर उसका हर अंग एक महत्वपूर्ण है। और, सबसे कमाल का अंग है उसके कान। गौरैया के कान सिर के दोनों तरफ, आंखों के ठीक पीछे होते हैं। और वो बारीक पंखों की एक परत से हमेशा ढके रहते हैं। इसीलिए हमें बाहर से गौरैया का कान…

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  • अमेरिका में गौरैया का आना

    अमेरिका में गौरैया का आना

    संजय कुमार/ 1800 के दशक में, यूरोप की कई पक्षी प्रजातियों को अमेरिका में लाने की कोशिशें की गईं। इनमें से कुछ ही प्रजातियां बच पाईं, लेकिन घरेलू गौरैया (हाउस स्पैरो) एक अपवाद रहा। 1850 के दशक में, न्यूयॉर्क शहर के सेंट्रल पार्क में घरेलू गौरैया को इसलिए लाया गया था ताकि कीड़ों से पेड़ों…

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  • गौरैया  830 से ज़्यादा तरह की चीज़ें खाती हैं

    गौरैया  830 से ज़्यादा तरह की चीज़ें खाती हैं

    संजय कुमार / घरेलू गौरैया सहभोजी पक्षी (कमैन्सल बर्ड) यानी इंसान पर निर्भर रहने वाली चिड़िया हैं। गौरैया अपना 90 प्रतिशत समय घोंसले और भोजन स्थल से दो से पांच किलोमीटर के दायरे में ही बिताती है। गौरैया के आहार में प्रमुख बीज होता है लेकिन 830 से ज़्यादा तरह की चीज़ें खाती है। कस्टो…

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  • ‘एक ही चिड़िया,दो अलग जिंदगी’ गाँव-शहर की घरेलू गौरैया

    ‘एक ही चिड़िया,दो अलग जिंदगी’ गाँव-शहर की घरेलू गौरैया

    संजय कुमार/ घरेलू गौरैया जो पासर डोमेस्टिकस परिवार की एक छोटी पक्षी है, दुनिया के अधिकांश हिस्सों में ग्रामीण और शहरी इलाकों में पायी जाती है। भले ही एक चिड़ियाँ है लेकिन गाँव और शहर की गौरैया की अलग-अलग जिन्दगी है। बदलते परिवेश में पिछले दो दशक में गांव और शहर की गौरैया की लाइफस्टाइल…

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  • प्रवास बदल रही है घरलू गौरैया

    प्रवास बदल रही है घरलू गौरैया

    संजय कुमार / हमारे घर आंगन में चहकने-फुदकने वाली घरेलू गौरैया नन्ही चिड़ियाँ बचपन की साथी आज कई गाँव और शहर  के घर-आँगन से रूठ कर कहीं और चली गयी है। आमतौर पर दिखने वाली गौरैया कही बड़ी तादाद में दिखती है। कहीं बमुश्किल से दिखती है, तो कहीं बिलकुल नहीं। देश की राजधानी दिल्ली…

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  • दिल्ली में गौरैया : प्रयास को चाहिये पंख

    दिल्ली में गौरैया : प्रयास को चाहिये पंख

    संजय कुमार/ हमारे घर आंगन में चहकने-फुदकने वाली घरेलू गौरैया की स्थिति देश भर में अच्छी नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली की राजकीय पक्षी गौरैया की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। कुछ इलाकों में ही यह दिखती। हाल बेहाल है। खासकर शहरी इलाकों में । ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं है तो कहीं नहीं।…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन