Author: admin
-

यूरोप में भीषण गर्मी से इस साल 10 हजार से अधिक लोगों की हुई मौत
यूरोप ने इस साल अप्रत्याशित रूप से भीषण गर्मी का सामना किया और पूरे महाद्वीप से 10 हजार से अधिक लोगों की जान गई है। आंकड़ों के अनुसार जून के आखिर में इसमें तेजी से तब वृद्धि हुई जब यूरोप के कुछ हिस्सों में तापमान ने रिकार्ड तोड़ दिया। हालाँकि, कई मौतों को आधिकारिक तौर…
-

“बिहार के पर्यावरण स्तंभ” पुस्तक
पर्यावरण संरक्षण के अखंड ज्योति को करेगा प्रज्वलित पुस्तक चर्चा / बिहार के पर्यावरणविदों ने अपने अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी पहचान बनाते हुए लोगों को सन्देश देने का काम किया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का सन्देश दूर-दूर तक जाए और लोग जुड़ें । ऐसे ही पर्यावरण स्तंभों को…
-

घोंसला लगाकर करें गौरैया का संरक्षण
संजय कुमार / इन नवंबर से अगस्त तक घरेलू गौरैया सृजन में जुटी रहती है। आवासीय संकट को देखते हुये इनके लिए बॉक्स यानि कृत्रिम घोंसला लगाएँ और इनका संरक्षण करें। गौरैया जैसे-तैसे घोंसला बनाती है। जब अंडे देने का समय आता है, गौरैया इंसान के घरों या आसपास में घोंसला बनाने में जुट जाती…
-

घरेलू गौरैया का जीवन चक्र
संजय कुमार / झुंड में इनकी संख्या चार से लेकर सौ तक होती है। दाना-पानी के लिए एक आता है तो दूसरा भी पहुँच जाता है। यह जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में झुंड में उड़ती है। इसका कारण यह है कि गौरैया के परिवार में नए सदस्य जुड़ते हैं। गौरैया अपने बच्चों के साथ…
-

गौरैया के कान है रडार सिस्टम
संजय कुमार / घरेलू गौरैया दिखने में छोटी, पर उसका हर अंग एक महत्वपूर्ण है। और, सबसे कमाल का अंग है उसके कान। गौरैया के कान सिर के दोनों तरफ, आंखों के ठीक पीछे होते हैं। और वो बारीक पंखों की एक परत से हमेशा ढके रहते हैं। इसीलिए हमें बाहर से गौरैया का कान…
-

बेंगलुरु के स्पैरो मैन : एडविन जोसेफ
बेंगलुरु : एडविन जोसेफ बेंगलुरु के स्पैरो मैन हैं । और उन्हें उन पक्षियों की याद आती है जो कभी आईटी शहर में हजारों की संख्या में पाए जाते थे। लेकिन अब बहुत कम ही देखे जाते हैं। उन्होंने अपने घर को गौरैया के लिए एक सुरक्षित कोना बना दिया है। वे चाहते हैं कि…
-

अमेरिका में गौरैया का आना
संजय कुमार/ 1800 के दशक में, यूरोप की कई पक्षी प्रजातियों को अमेरिका में लाने की कोशिशें की गईं। इनमें से कुछ ही प्रजातियां बच पाईं, लेकिन घरेलू गौरैया (हाउस स्पैरो) एक अपवाद रहा। 1850 के दशक में, न्यूयॉर्क शहर के सेंट्रल पार्क में घरेलू गौरैया को इसलिए लाया गया था ताकि कीड़ों से पेड़ों…
-

गावं के लिए जानकी तांती ने कुआं को ए.टी.एम तो तालाब को बैंक बनाया
संजय कुमार / बिहार का जमुई जिला का केडिया गाँव के ग्रामीण कुआं को अपना ए.टी.एम और तालाब को अपना बैंक मानते हुये इसका जल संरक्षण करते हैं। गाँव को पानी की समस्या से उबारने और जल संचय-संरक्षण के लिए संघर्षरत केडिया के ग्रामीण जानकी बाबा से चर्चित जानकी तांती ने ग्रामीणों की मदद से…
-

गौरैया 830 से ज़्यादा तरह की चीज़ें खाती हैं
संजय कुमार / घरेलू गौरैया सहभोजी पक्षी (कमैन्सल बर्ड) यानी इंसान पर निर्भर रहने वाली चिड़िया हैं। गौरैया अपना 90 प्रतिशत समय घोंसले और भोजन स्थल से दो से पांच किलोमीटर के दायरे में ही बिताती है। गौरैया के आहार में प्रमुख बीज होता है लेकिन 830 से ज़्यादा तरह की चीज़ें खाती है। कस्टो…
-

‘एक ही चिड़िया,दो अलग जिंदगी’ गाँव-शहर की घरेलू गौरैया
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया जो पासर डोमेस्टिकस परिवार की एक छोटी पक्षी है, दुनिया के अधिकांश हिस्सों में ग्रामीण और शहरी इलाकों में पायी जाती है। भले ही एक चिड़ियाँ है लेकिन गाँव और शहर की गौरैया की अलग-अलग जिन्दगी है। बदलते परिवेश में पिछले दो दशक में गांव और शहर की गौरैया की लाइफस्टाइल…
Latest News

संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें 📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com
🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
You May Have Missed









