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  • पत्तों पर ठहरी बूँदें और चिड़ियाँ

    पत्तों पर ठहरी बूँदें और चिड़ियाँ

    सुबह-सुबह की बात है,भीगी-भीगी सी रात है,पत्तों पर ठहरी बूँदें,हवा में मीठी-सी बात है। दो चिड़ियाँ बैठी डाल पर,जैसे कोई गीत सुनाएँ,एक कहे – “चल उड़ चलें…”दूजी कहे – “पहले दाना खाएँ!” न कोई शिकवा, न कोई डर,न कल की कोई चिंता है,आज की इस छोटी-सी दुनिया में, बस प्यार ही प्यार बचा है। तुम…

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  • “बिहार के पर्यावरण स्तंभ” पुस्तक का हुआ लोकार्पण

    “बिहार के पर्यावरण स्तंभ” पुस्तक का हुआ लोकार्पण

    पटना :-26/08/2026/ बिहार विधान परिषद सभागार में निशांत रंजन अदिति रॉय तथा अमित कुमार पाण्डेय द्वारा लिखित बिहार के पर्यावरणविदों के जीवनी एवं कार्यों पर आधारित पुस्तक “बिहार के पर्यावरण स्तंभ” का लोकार्पण डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, मंत्री, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा खान एवं भूतत्व विभाग बिहार सरकार के करकमलों द्वारा किया गया।मौके…

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  • Nesting  Sparrow conservation

    Nesting  Sparrow conservation

    sanjay kumar / Is engaged in creating house sparrows from this November to August. In view of the housing crisis, set up boxes for them and protect them. The sparrow builds the nest slowly. When the time comes to lay eggs, the sparrow starts nesting in or around human houses. It builds a nest only…

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  • सूखे से निपटने के लिए भारत ने वैश्विक स्तर पर क्षमता निर्माण का आह्वान किया

    सूखे से निपटने के लिए भारत ने वैश्विक स्तर पर क्षमता निर्माण का आह्वान किया

    उलानबटार, 25 अगस्त। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (यूएनसीसीडी) के सीओपी-17 में सूखे से निपटने के लिए सक्रिय, तकनीक आधारित और दीर्घकालिक क्षमता विकसित करने का आह्वान किया। ‘सूखे से निपटने की क्षमता में तेजी लाना’ विषय पर बोलते…

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  • अद्भूत नज़ारे से लबरेज है लोनार क्रेटर झील

    अद्भूत नज़ारे से लबरेज है लोनार क्रेटर झील

    प्रकृति जितनी खूबसूरत है उतनी ही रहस्यों से भरी भी है। मिसाल के तौर पर महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित अद्भूत लोनार क्रेटर देश की धरती पर एक अनोखा प्राकृतिक नजारा है। यह क्रेटर लगभग 35 हजार से 50 हजार साल पहले किसी उल्कापिंड के टकराने से बना था। शुरू में इसे ज्वालामुखी क्रेटर…

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  • गौरैया : एक साथी, पूरी जिंदगी की वफादारी

    गौरैया : एक साथी, पूरी जिंदगी की वफादारी

    संजय कुमार / गौरैया पक्षी प्रजनन के मौसम में जोड़ी में रहते है, हालाँकि ये अक्सर सामूहिक रूप से रहना पसंद करते हैं। गौरैया नियम में बंधी रहती है- प्यार जोड़ी में, और जिंदगी झुण्ड में। नवम्बर से गौरैया जोड़ा बनने लगता है। जोड़ा बनते ही हमेशा साथ-साथ रहना होता है, अगर मादा कही दाना…

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  • एक मौसम में गौरैया के कई बार होते हैं  बच्चे

    एक मौसम में गौरैया के कई बार होते हैं  बच्चे

    संजय कुमार/ गौरैया उड़ते हुए, आंखों में अजीब चमक लिए छोटे अन्तराल, यानि 5, 10 या  20 सेकेंड के कई अन्तराल में मेटिंग करता हैं। यह अन्तराल वैज्ञानिक रूप से या तय समय में नहीं होता यह सब गौरैया के मूड पर निर्भर होता है। अंडो से चूजे बाहर आने के तुरंत बाद प्रजनन के…

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  • गौरैया अपने स्वास्थ्य का खुद रखती है ख्याल

    गौरैया अपने स्वास्थ्य का खुद रखती है ख्याल

    संजय कुमार / गौरैया अपने स्वास्थ्य का खुद ख्याल रखती है। फूल और पत्ते का सेवन कर अपने को स्वस्थ रखती है। गेंदा, तुलसी, नीम के कोमल पत्तों को भी खाती है,जो औषधि के तौर पर जाने जाते हैं।कह सकते हैं, गौरैया अपनी डॉक्टर खुद है। शहरों में पालतू पशुओं के पशु अस्पताल हैं। जहाँ…

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  • अरुणाचल प्रदेश में मिली तितलियों की दुर्लभ प्रजातियां

    अरुणाचल प्रदेश में मिली तितलियों की दुर्लभ प्रजातियां

    ईटानगर / अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले में दो दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान तितलियों की लगभग 85 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। यह खोज जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल ही में किए गए एक दो दिवसीय सर्वेक्षण में प्रकृति प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों की टीम ने तितलियों की…

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  • एक गौरैया का आहार रोज़ाना 2 से 6 ग्राम दाना

    एक गौरैया का आहार रोज़ाना 2 से 6 ग्राम दाना

    संजय कुमार / एक गौरैया रोज़ाना 2 से 6 ग्राम दाना चुगती है। इतना कम क्यों? सवाल रोचक है। दरअसल में गौरैया का शरीर बहुत छोटा है। छोटी चिड़ियाँ के तौर पर जानी जाती है। इन्सान की तरह  बहुत अधिक और बहुत कम वजन की गौरैया नहीं होती। एक आध बीमार हों तो वजन कम…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन