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  • प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(5)

    प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(5)

    *जल की कमी और सड़क किनारे लगे चेतावनी बोर्ड, पहाड़ से सिखने की जरूरत * संजय कुमार / यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण बात ने हमारा ध्यान खींचा। काठगोदाम से अल्मोड़ा की ओर जाने वाले मार्ग पर कई जगह वाहनों की धुलाई से संबंधित प्रतिबंधात्मक चेतावनी बोर्ड लगे दिखाई दिए। इन बोर्डों को देखकर पहाड़ी…

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  • शाम को तोते लौटे तो देर तक आशियाने के लिए मंडराते रहे

    शाम को तोते लौटे तो देर तक आशियाने के लिए मंडराते रहे

    इंदौरः मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए रानी सराय में 160 पेड़ों की कटाई शुरू भास्कर न्यूज | इंदौर/ मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए रानी सराय परिसर में पेड़ों की कटाई आखिरकार सोमवार से शुरू हो गई। सुबह पेड़ों से उड़कर दूरदराज के खेतों में गए तोते शाम को वापस लौटे तो कई अपने आशियाने के…

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  • पहाड़ी रास्ते और बदलती जीवनशैली से प्रकृति की ओर

    पहाड़ी रास्ते और बदलती जीवनशैली से प्रकृति की ओर

    “प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए”…(3) संजय कुमार / काठगोदाम से अल्मोड़ा की ओर बढ़ते हुए सड़क के दोनों ओर छोटे-बड़े बाजार, दुकानें, भोजनालय और स्थानीय बस्तियां दिखाई देती हैं। कहीं सड़क के किनारे चाय की दुकान है, तो कहीं स्थानीय लोग अपने घर के आगे ही छोटी-सी दुकान चलाते नजर आते हैं। कुछ…

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  • फ्लेमिंगो  अंडों को बचाने के लिए बनाते  हैं  मिट्टी  का  घरौंदा

    फ्लेमिंगो अंडों को बचाने के लिए बनाते हैं मिट्टी का घरौंदा

    (सांभर झील में पहली बार सफल ब्रीडिंग के पुख्ता सबूत, 4 हजार से अधिक घरौंदे बने; मानवीय दखल से खतरे में प्रवासी पक्षियों का प्राकृतिक आवास) प्रकृति और वन्यजीव का अद्भुत नजारा से राजस्थान की सांभर झील लबरेज है। दूर-दराज के ठंडे प्रदेशों से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर सैकड़ों प्रवासी फ्लेमिंगो (राजहंस) अपनी गुलाबी…

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  • सांसों पर संकट आते ही सख्ती

    नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता।दिल्ली-एनसीआर की हवा दशहरे के अगले दिन बुधवार को खराब श्रेणी में आ गई। इसके साथ ही ग्रुप-1 के प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। इनके तहत बाहरी राज्यों से आने वाली बसों पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही मेट्रो के फेरे भी बढ़ाए गए हैं। केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी, बीएस-6 डीजल बसों…

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  • प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(2)

    प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(2)

    नरीमन चौक पर लोकसंस्कृति की झलक……… छलिया नृत्य की कलाकृति में दिखाई देती है कुमाऊँ की सांस्कृतिक पहचान संजय कुमार / काठगोदाम से आगे बढ़ने पर नरीमन चौक (नरीमन चौक- जिसे नरीमन चौराहा या काठगोदाम सर्कल के नाम से भी जाना जाता है) के पास उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को दर्शाती छलिया नृत्य की कलाकृति दिखाई…

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  • प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(1)

    प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(1)

    काठगोदाम से बिनसर तक का सफर: पहाड़, जंगल, पक्षियों का संगीत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश संजय कुमार | उत्तराखंड प्रकृति से जुड़ना केवल पहाड़ों की सैर करना, खूबसूरत वादियों में तस्वीरें खिंचवाना या ठंडी हवा का आनंद लेना भर नहीं है। प्रकृति से जुड़ने का अर्थ है उसके करीब जाकर जीवन की वास्तविक सुंदरता…

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  • पेड़ों के अनमोल कलाकार गिब्बन को है संरक्षण की पुकार

    पेड़ों के अनमोल कलाकार गिब्बन को है संरक्षण की पुकार

    24 अक्टूबर को मनाया जाता है ‘अंतर्राष्ट्रीय गिब्बन दिवस’ (International Gibbon Day) “जंगल की छतों पर झूलते, लंबी बांहों वाले और अपनी मोहक आवाज़ों से पूरे वन को गुंजायमान करने वाले गिब्बन हमारे पर्यावरण के अनमोल रत्न हैं।” 24 अक्टूबर को पूरे विश्व में ‘अंतर्राष्ट्रीय गिब्बन दिवस’ का आयोजन कर इसके संरक्षण को लेकर जागरूकता…

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  • 31 जल संरक्षकों को मिला ‘जल प्रहरी सम्मान–2026’

    31 जल संरक्षकों को मिला ‘जल प्रहरी सम्मान–2026’

    नई दिल्ली। जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले देशभर के जल संरक्षकों को सम्मानित करने के लिए सातवें ‘जल प्रहरी सम्मान समारोह–2026’ का आयोजन 23 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित विश्व युवक केंद्र में किया गया। समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित जल संरक्षण के…

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  • पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए संजय को मिला ‘जल प्रहरी सम्मान 2026’

    पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए संजय को मिला ‘जल प्रहरी सम्मान 2026’

    नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026।  नई दिल्ली स्थित विश्व युवक केंद्र में आयोजित “7वें जल प्रहरी सम्मान 2026” समारोह में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जलपुरुष–पर्यावरणविद डॉ.राजेन्द्र सिंह के द्वारा पर्यावरण सह जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिहार के संजय कुमार को ‘जल प्रहरी सम्मान 2026’  दिया गया। संजय कुमार विशेष…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन