Author: admin
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बाघ, जंगल और भारतीय अस्मिता का प्रतिक
(अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस) 29 जुलाई को जैव विविधता के लिए अहम् बाघ के संरक्षण अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस केवल एक वैश्विक उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के सबसे भव्य और ताकतवर जीवों में से एक के संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का दिन है। भारत के…
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विलुप्ति के कगार पर मालवी ऊंट, बचाने की मुहिम शुरू
‘रेगिस्तान के जहाज’ ऊँटों खासकर भारत में स्थिति चिंताजनक है उनके संरक्षण के लिए उठाए जा रहे नए कदमों के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते सरकार और अनुसंधान केंद्र इनके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। इधर खबर…
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Why is sparrow conservation important?
The International Union for Conservation of Nature listed it as an endangered species in 2002 Year-old fossil evidence from a cave in Bethlehem State of Indian’s Birds 2020 – Range, Trends and Conservation status report: Sparrow population in India stable for 25 years, not threatened by mobile towers UK’s Royal Society for the Protection of…
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विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस: प्रकृति और अस्तित्व का संतुलन
“प्रकृति हमारी सभी ज़रूरतें पूरी कर सकती है, लेकिन हमारे लालच को नहीं।” — महात्मा गांधी हर साल 28 जुलाई को ‘विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस’ (World Nature Conservation Day) के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति के महत्व के प्रति जागरूक करना और पृथ्वी के प्राकृतिक…
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कावर झील की बिगड़ती स्थिति पर केंद्र-राज्य को एनजीटी का नोटिस
नई दिल्ली। 26 जुलाई 2026/ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बिहार में एशिया की सबसे बड़ी ऑक्सबो झील कही जाने वाली कावर झील की बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एनजीटी ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की।एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश…
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यूके की घरेलू गौरैया में गिरावट : कारण, इतिहास और वर्तमान स्थिति
संजय कुमार / घरेलू गौरैया की घटती आबादी एक देश की तस्वीर नहीं है बल्कि पूरा विश्व शामिल है खासकर जहाँ गौरैया बड़ी संख्या में रहती थी या रहती है। बात ब्रिटेन की जहाँ कभी ब्रिटेन की घरों की छतों तक इसकी चहचहाहट आम बात थी।लेकिन कुछ दशकों में इसकी संख्या में इतनी तेज़ गिरावट…
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जलवायु परिवर्तन से गौरैया को खतरा
संजय कुमार / गौरैया की संख्या में कमी या विलुप्ति के पीछे के कारणों में आहार की कमी, बढ़ता आवासीय संकट, कीटनाशक का व्यापक प्रयोग, जीवनशैली में बदलाव, प्रदूषण और मोबाइल फोन टावर से निकलने वाले रेडिएशन को दोषी बताया जाता रहा है, वहीँ एक बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन भी है। केवल गौरैया ही नहीं,…
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“ओ री गौरैया” पुस्तक गागर में सागर
नीतीश कुमार / श्री संजय कुमार जी द्वारा रचित ओ री गौरैया पुस्तक गागर में सागर है। इस पुस्तक में 17 चैप्टर हैं और हर चैप्टर 1 से बढ़कर एक। पहले तो मुझे लगा था कि कुछ खास नहीं होगा। लेकिन मंगाते हैं पढ़ते हैं, जो थोड़ा बहुत ही जानने को मिलेगा। लेकिन जितनी गहराई…
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गौरैया का घर: 4 इंच का संसार
संजय कुमार / घरेलू गौरैया कई तरह की जगहों पर घोंसला बनाती हैं, हालाँकि वह इमारतों और इंसानों द्वारा बनाई गई दूसरी संरचनाओं में बनी खाली जगहों को ज़्यादा पसंद करती हैं। ये घोंसलों के लिए कृत्रिम बक्सों का भी इस्तेमाल करते हैं। घरेलू गौरैया अक्सर लोगों के आस-पास घोंसला बनाती हैं। वे अक्सर ऐसी…
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गौरैया के लिए जब लगाएं घोंसला, कुछ बातों का रखें ध्यान
संजय कुमार / कंक्रीट के जंगल ने घर-आंगन की दोस्त गौरैया के सामने आवासीय संकट पैदा कर दिया है। गौरैया की घर वापसी को लेकर हर प्रयास जारी है। गौरैया को आवासीय संकट से उबारने के लिए कृत्रिम घोंसला लगाया जा रहा है। ताकि, उसमें गौरैया आये और तिनका-तिनका रख घोंसला बनाये, अंडे दे और…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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