Author: admin
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खास अंदाज से सृजन करती है गौरैया
संजय कुमार / अकसर गौरैया झुण्ड में दिखती है। झुण्ड में इनकी संख्या चार से लेकर सौ तक रहती है। अकेले या इक्का – दुक्का वहीं जाती है जहां वह परिचित होती है। दाना-पानी के लिये एक आती भी है तो दूसरी भी पहुंच जाती है। जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में ये झुण्ड में…
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विश्व में डाक टिकट से गौरैया संरक्षण
संजय कुमार / गौरैया पर भारत सहित तीन दर्जन से अधिक देशों ने डाक टिकट जारी कर गौरैया संरक्षण का सन्देश देने का काम किया है। इनमें भारत, इटली, बांग्लादेश, बेलारूस, एल्डर्नी वेस्ट कोस्ट, बहरीन, असेंशियन द्वीप, बोस्ना और, हर्सेगोविना, बेल्जियम, बुल्गारिया, काबो वर्दे, सेंट यूस्टैटियस, कैरेबियन नीदरलैंड, क्यूबा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, इस्टोनिया, फ़ोरयार (फ़ैरो…
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‘सोनकंठी गौरैया’
संजय कुमार / ‘सोनकंठी गौरैया’ की कहानी कुछ अलग ही है। बिहार के मुंगेर में इसे बड़े झुंड में देखकर पक्षी प्रेमी उत्साहित हैं। यह भारत में दिखती तो है लेकिन इसकी पहुंच हमारी पारम्परिक घरेलू गौरैया की तरह घरों तक नहीं है। हां, इसे छत्तीसगढ़, बस्तर और उड़ीसा आदि के जंगलों में कभी कभार…
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संशोधित पीएम उत्सर्जन मानकों की समय-सीमा 1 अक्टूबर तक बढ़ी
दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों को राहत नई दिल्ली, 31 जुलाई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए संशोधित पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन मानकों के कार्यान्वयन की समय-सीमा बढ़ा दी है। आयोग ने अपने वैधानिक निदेश संख्या-98 में संशोधन करते…
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गाय, गोबर और गौरैया
संजय कुमार / गाय और गोबर का संबंध गौरैया संरक्षण में अति महत्वपूर्ण है। जहां गाय और गोबर होगा वहाँ गौरैया होगी बल्कि दिखती है। वजह हैं, गौरैया गाय के गोबर से निकले अपचे भोजन को तो खाती ही है, बाद में जब वह सड़ जाता है तो उसमें से जो निकलने वाले कैटरपिलर्स यानी…
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एनसीएपी के तहत 130 शहरों में स्वच्छ हवा की मुहिम तेज, 11,108 उद्योगों ने अपनाया स्वच्छ ईंधन
नई दिल्ली, 30 जुलाई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत देश के 130 शहरों के लिए शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य मिट्टी एवं सड़क की धूल, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, कचरा जलाने, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों तथा हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे प्रमुख वायु प्रदूषण स्रोतों…
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सौन्दर्यीकरण के नाम पर मिट्टी भराई पर लगी रोक
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पुष्यमित्र / “आप सुंदरता बढ़ाने के नाम पर जलाशयों को पाट नहीं सकते. पानी के तालाबों को न छुएं, उनसे दूर रहें और अपने अधिकारियों से भी कहें कि वे तालाबों को न छुएं।” यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की है और उन्होंने यह निर्देश दरभंगा के तीन ऐतिहासिक तालाबों गंगासागर, हराही…
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बाघ है तो जंगल है, जो जैव विविधिता के लिये अहम्
संजय कुमार/ अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर दुनिया भर में बाघों के संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। भारत ने प्रोजेक्ट टाइगर के जरिए बाघों की संख्या बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। बाघ के संरक्षण की इस मुहिम ने तस्वीर भी बदली है। दुनिया के करीब 70…
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12 वर्षों में भारत में बढ़े बाघ और बाघ अभ्यारण्य
भूपेंद्र यादव–बाघ संरक्षण को मिली नई दिशा। वैश्विक बाघ दिवस पर एनटीसीए का इको-टूरिज्म वेबपेज लॉन्च नई दिल्ली, 29 जुलाई। वैश्विक बाघ दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा आयोजित समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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