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  • वन्यजीव और जैव विविधता का अद्भुत संगम है बिनसर

    वन्यजीव और जैव विविधता का अद्भुत संगम है बिनसर

    प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(8) संजय कुमार / कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय की गोद में बसा बिनसर एक खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र है, जो अपने जंगलों, शांत वातावरण, पक्षियों और हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचकर ऐसा महसूस हुआ मानो शहरों की भागदौड़ से दूर किसी दूसरी दुनिया…

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  • बिनसर: जंगल, हिमालय और जैव विविधता का संसार

    बिनसर: जंगल, हिमालय और जैव विविधता का संसार

    प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(7) संजय कुमार / हमारी यात्रा का पहला प्रमुख पड़ाव बिनसर था। कुमाऊँ क्षेत्र के अल्मोड़ा जिले में स्थित बिनसर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और हिमालय के मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार, बिनसर लगभग 2,420 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां…

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  • सरदार वल्लभभाई : किसान चेतना और पर्यावरण संरक्षण के अग्रदूत

    सरदार वल्लभभाई : किसान चेतना और पर्यावरण संरक्षण के अग्रदूत

    संजय कुमार / 21वीं सदी के तीसरे दशक में हम आज जिस ‘विकास’ शब्द की चर्चा करते हैं तो उसके साथ अनचाहे ही लेकिन सही मायने में विनाश की परछाइयाँ भी जेहन में उभरने लगती हैं। खेत-खलिहान, किसान और पर्यावरण—ये तीन शब्द आज वैश्विक विमर्श के केंद्र में हैं। विडंबना यह है कि इनकी चर्चा…

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  • पक्षियों की आवाज में छिपा प्रकृति का संगीत

    पक्षियों की आवाज में छिपा प्रकृति का संगीत

    “प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए”…(6) संजय कुमार / बिनसर पहाड़ों की यात्रा का सबसे सुखद अनुभव केवल दूर दिखाई देने वाली चोटियां या घने जंगल नहीं थे बल्कि पेड़ों के बीच से सुनाई देने वाली पक्षियों की आवाजें भी इस अनुभव को खास बनाती मिली। रात में आसमान में टिमटिमाते तारे और धरती…

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  • पवन-I3C केंद्र से होगी प्रदूषण की रियल टाइम निगरानी

    पवन-I3C केंद्र से होगी प्रदूषण की रियल टाइम निगरानी

    “केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने वायु प्रदूषण शमन उपायों की समीक्षा के लिए सीएक्यूएम के ‘पवन-I3C’ एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र का दौरा किया” नई दिल्ली,30 अक्टूबर 26 / केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के नवनिर्मित एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (आई3सी)…

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  • प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(5)

    “कचरा और खाली शराब की बोतलें: सुंदरता पर दाग” संजय कुमार / उत्तराखंड, अल्मोड़ा के पहाड़ी इलाकों में कई जगहों पर प्राकृतिक सुंदरता के बीच यात्रा करते समय कुछ दृश्य ऐसे भी दिखाई दिए, जिन्होंने मन को खिन्न किया। रास्ते में कई स्थानों पर कचरा और खाली शराब की बोतलें फेंकी हुई मिलीं। ये दृश्य…

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  • यमुना का पानी पीने योग्य तो दूर, नहाने के मानकों पर भी नहीं

    यमुना का पानी पीने योग्य तो दूर, नहाने के मानकों पर भी नहीं

    “दिल्ली में यमुना के पानी में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक, कई स्थानों पर BOD निर्धारित सीमा से 10 गुना तक अधिक” नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। नदी का पानी पीने योग्य नहीं है, बल्कि कई स्थानों पर इसकी स्थिति ऐसी है कि…

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  • कैमूर में जंगल की वापसी

    कैमूर में जंगल की वापसी

    कैमूर में, जंगल की सुरक्षा का मतलब सिर्फ अतिक्रमण हटाना नहीं था। इसका मतलब था लोगों के मन में जंगल के प्रति फिर से विश्वास जगाना और,यह विश्वास जगाया आईएफएस विकास अहलावत ने। जंगल को अतिक्रमण से मुक्त कराया और सुरक्षा की पहल की । जब विकास अहलावत ने कार्यभार संभाला था तब वहां का…

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  • ‘ऐनहेंसिंग कोस्‍टल रीजीलिएंस थ्रू अडेप्टिव स्‍ट्रेटेजीज’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला

    ‘ऐनहेंसिंग कोस्‍टल रीजीलिएंस थ्रू अडेप्टिव स्‍ट्रेटेजीज’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला

    नई दिल्ली,29 अक्तूबर 26 / केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) 29-30 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में ‘ऐनहेंसिंग कोस्‍टल रीजीलिएंस थ्रू अडेप्टिव स्‍ट्रेटेजीज’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला की आज शुरुआत हुई । यह कार्यशाला हरित जलवायु कोष (जीसीएफ) की परियोजना ‘भारत के तटीय समुदायों की जलवायु अनुकूलन क्षमता को बढ़ाना’ (जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी) के…

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  • पहाड़ों में गुम हो रही गौरैया की चीं-चीं

    पहाड़ों में गुम हो रही गौरैया की चीं-चीं

    ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरणीय बदलावों से गुम हो रही है गौरैया सहित अन्य चिड़ियों की आवाज संजय कुमार/ घरेलू गौरैया का कम दिखाई देना या कुछ इलाकों से उसका गायब हो जाना केवल मैदानी क्षेत्रों की समस्या नहीं है। पहाड़ी इलाकों में भी गौरैया और अन्य पक्षियों की मौजूदगी और उनके प्राकृतिक आवास को लेकर…

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन