गौरैया के तीन स्नान: पानी, धूल और धूप

संजय कुमार / गौरैया सिर्फ चहचहाती नहीं, स्नान भी करती है और एक नहीं, तीन तरह से स्नान करती है।मसलन, पानी, धूल और धूप स्नान । घर आँगन में रखा/जमा पानी, सड़क किनारे जमा पानी, नल के पास जमा पानी या आपके रखे सकोरे के कम गहरे बर्तन में वह फुदक कर उतरती है। सर…

संजय कुमार / गौरैया सिर्फ चहचहाती नहीं, स्नान भी करती है और एक नहीं, तीन तरह से स्नान करती है।मसलन, पानी, धूल और धूप स्नान । घर आँगन में रखा/जमा पानी, सड़क किनारे जमा पानी, नल के पास जमा पानी या आपके रखे सकोरे के कम गहरे बर्तन में वह फुदक कर उतरती है। सर को नीचे रखते हुए, पंखों को तेजी से फड़फड़ाकर पानी को पूरे शरीर पर छिड़कती है। मनमोहक दृश्य होता है। बीच-बीच में पानी से निकल किनारे आती है और फिर तुरंत नहाने भी लगती है। नहाने के बाद तुरंत मुंडेर या तार या पेड़ पर बैठ पंख फैलाकर और देह को फुलाते हुए शरीर को सुखाती है। गौरैया गंदे पानी में स्नान नहीं करती है।

धूल स्नान – खेल-खेल में सफाई

धूल स्नान सबसे रोचक होता है। सूखी रेत-मिट्टी में वह खेलते-खेलते एक छोटा सा गड्ढा बना लेती है, फिर उसी में लोट-पोट होकर देह को रगड़ती है, धूल को अपने ऊपर उड़ाती है। ऐसा कर वह पंख में छुपे परजीवियों को बहार निकालती है। क्योंकि उसका पंख कोई साधारण चीज नहीं, एक अद्भुत और जटिल मशीन हैं। उन्हें कार्यात्मक रखने के लिए निरंतर देखभाल जरूरी होता है। धूल स्नान से त्वचा और पंखों में छिपे परजीवी निकल जाते हैं। शरीर की अतिरिक्त तेलीयता (तेल ग्रंथि से निकला तेल) अवशोषित हो जाती है पंखों की संवारना आसान हो जाती है जितना समय वह स्नान और धूलने में लगाती है, उससे पता चलता है कि पंखों की देखभाल उसके लिए कितनी महत्वपूर्ण है। जितना स्वस्थ्य पंख रहेगा,उसकी उड़ान उतनी बेहतर होगी।

धूप स्नान – सुकून की घड़ी

नहाने के बाद वह धूप में मुंडेर पर बैठ जाती है, देह को गुब्बारे की तरह फुलाकर, आँखें बंद करके सूर्य की रोशनी अपने अंदर पिरोती है। ऐसा करते हुए कई बार छपकी भी मार लेती है। यह धूप उसके शरीर में विटामिन-डी बनाती है और पंखों में नमी से बनी फफूंद को मारती है।

यदि आप गौरैया को बचाना और उसको स्वस्थ रखना चाहते हैं तो तीन चीजें जरूर रखें – एक कम गहरा पानी का बर्तन- नहाने एवं पीने के लिए, एक कोने में थोड़ी सूखी रेत/राख (धूल स्नान के लिए) और धूप वाली खुली मुंडेर। आपके ये तीन छोटे प्रयास ही उसके पंखों की चमक और जीवन की रक्षा करेंगे। गौरैया को जब सड़क किनारे पानी नहीं मिलता तो वह पानी के बर्तन में स्नान करती है और कंक्रीट के सड़क बन जाने से मिटटी /रेत नहीं मिलती है तो वह गमले की मिटटी में लोटपोट कर मिटटी स्नान कर लेती है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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