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‘द वाइल्ड कॉल’ को सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म का पुरस्कार
दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 नई दिल्ली। बिहार के राजगीर जू सफारी की फिल्म ‘द वाइल्ड कॉल’ को दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 में सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म का पुरस्कार मिला है ‘द वाइल्ड कॉल’ 12 मिनट की अत्याधुनिक 180 डिग्री इमर्सिव एनीमेटेड वन्यजीव फिल्म है। 16वां दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026, 30…
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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के प्रवर्तन कार्य बल की 130वीं बैठक
“वायु प्रदूषण को प्रभावी तरीके से कम करने के लिए कड़े प्रवर्तन, बेहतर डेटा की सटीकता में सुधार, मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय एवं निर्धारित पर्यावरणीय मानदंडों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता पर दिया गया बल दिया” नई दिल्ली ,5मई 2026/ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम)…
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कम हो रही है गौरैया की आबादी?
संजय कुमार/ गौरैया / घर-आँगन, छत और मुंडेर पर बैठ चींचीं करने वाली गौरैया आज कहीं दिखती है, तो कहीं एक दम से नहीं दिखती है। पर्यावरणविदों के लिए गौरैया का गायब होना चिंता का विषय है कि पिछले कुछ दशकों में गौरैया की आबादी में 60% से 80% तक की भारी गिरावट देखी गई…
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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम
पटना /4-5-2026 । देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु 01 अप्रैल, 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के संबंध में जागरूकता अभिवर्धित करने के उद्देश्य से बिहार के सभी शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जनित ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए नियमावली के विभिन्न प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण…
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प्रकृति के संग लद्दाख की गौरैया ‘चिपा ग्याओ’
संजय कुमार/ गौरैया / केंद्र शासित राज्य लद्दाख के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ‘चिपा ग्याओ’ पाई जाती है। लद्दाख में घरेलू गौरैया को दिलचस्प नाम ‘चिपा ग्याओ’ से पुकारा जाता है। हिमायल रेंज की पहाड़ियों से घिरे लद्दाख के लोग भले ही घरेलू गौरैया को ‘चिपा ग्याओ’ से पुकारते हैं लेकिन…
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गौरैया सिर्फ पक्षी नहीं पारिस्थितिक संकेतक है
संजय कुमार /गौरैया / छोटे आकार वाली खूबसूरत गौरैया का ज़िक्र आते ही बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं। कभी घर-आंगन का अभिन्न हिस्सा रही यह चिड़िया आज कंक्रीट के जंगलों में अपना अस्तित्व तलाश रही है। 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ के रूप में मना कर हम इसके संरक्षण का संकल्प लेते…
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यादों के झरोखे में गौरैया
संजय कुमार/ शायद ही कोई हो जिसने नन्ही गौरैया के साथ अपना बचपन न गुजारा हो। घर-आँगन में जमीन पर पड़े दाने को चुगने आने वाली गौरैया को टोकरी में फंसा कर उसे पकड़ना और फिर उस पर रंग लगा कर उड़ा देना। और, जब दूबारा आती तो ताली बजा-बजा कर बताना, मेरी वाली गौरैया।…
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तपती धरती:कारण और समाधान
निर्मल रानी/ पर्यावरण / उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,ओडिशा व प. बंगाल जैसे राज्य इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इन राज्यों में कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री से लेकर 44 डिग्री तक पहुंच गया है। पिछले दिनों भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा हीटवेव अलर्ट भी…
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सपनों को पंख देना मैंने गौरैया से सीखा : आशा प्रसाद
गौरैया संरक्षक /आशा प्रसाद : बिहार, पटना, के अंबेडकर पथ की आशा प्रसाद जो आम्रपाली इनर व्हील क्लब की प्रेसिडेंट रही हैं। जो पिछले 6 सालों से “Save Sparrow” प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया है। शुरुआत में मेरे घर पर सिर्फ़ तीन या चार गौरैया आती थीं। वे बताती हैं कि छह महीने की…
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मेघालय में जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की हुई खोज
मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स (East Khasi Hills) में हाल ही में वैज्ञानिकों ने जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की खोज की है। यह खोज लगभग 100 साल के लंबे अंतराल के बाद हुई है, जिसने भारत में जुगनुओं के संरक्षण और शोध की एक नई राह खोली है। दुर्लभ जुगनू में पहला…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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