पटना:12-5-2026 / पटना कॉलेज में एनवायरनमेंट वॉरियर्स एवं हमारी गौरैया के द्वारा वृक्षारोपण एवं पक्षियों के लिए घोंसला एवं सकोरा लगाने का कार्यक्रम रजनीश कुमार के नेतृत्व में मंगलवार को किया गया। जिसमें पटना कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार के द्वारा वृक्षारोपण किया गया साथ ही महाविद्यालय परिसर में पक्षियों के लिए दाना-पानी के…
पटना:12-5-2026 / पटना कॉलेज में एनवायरनमेंट वॉरियर्स एवं हमारी गौरैया के द्वारा वृक्षारोपण एवं पक्षियों के लिए घोंसला एवं सकोरा लगाने का कार्यक्रम रजनीश कुमार के नेतृत्व में मंगलवार को किया गया। जिसमें पटना कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार के द्वारा वृक्षारोपण किया गया साथ ही महाविद्यालय परिसर में पक्षियों के लिए दाना-पानी के लिए सकोरा लगाया गया।
मौके पर प्राचार्य ने कहा की जल ही जीवन है एवं वृक्ष मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है हमारे देश में पक्षियों के कई प्रजाति गायब हो गए या हो रहे है। उसे संरक्षित करने हेतु एक वातावरण बनाना होगा तभी हम लोग विलुप्त प्रजातियों को संरक्षित कर सकते है।इस कार्य में भूगोल विभाग के डॉ. राकेश कुमार गोंड, डॉ.रणजीत कुमार, डॉ. अनिल कुमार अकेला, डॉ.उदय शंकर, डॉ. मोहम्मद सलीम अख्तर एवं अन्य कॉलेज कर्मी उपस्थित थे। एनवायरनमेंट वॉरियर्स से शानू कुमार राज ,निश्चल कुमार ,रिम्पी ऐश्वर्य, प्रिया कुमारी, प्रियांशु रंजन ,राज कुमार ,संजन कुमार , दानिश अख्तर आदि उपस्थित थे
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारागौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
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