अब विज्ञापन में भी ‘गौरैया’

संजय कुमार/सिनेमा, साहित्य, लोक गीत कला-कथा के बाद अब विज्ञापन में भी गौरैया नजर आने लगी है। कई शहर-गाँव-मोहल्ला के घर-आँगन में चहकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया के साथ गायब या विलुप्ति जैसे शब्द जुड़ चुकें है तो वही, उसकी घर वापसी के लिए संरक्षण अभियान भी जोरशोर से चल रहा है। और,सफलता भी मिल…

संजय कुमार/सिनेमा, साहित्य, लोक गीत कला-कथा के बाद अब विज्ञापन में भी गौरैया नजर आने लगी है। कई शहर-गाँव-मोहल्ला के घर-आँगन में चहकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया के साथ गायब या विलुप्ति जैसे शब्द जुड़ चुकें है तो वही, उसकी घर वापसी के लिए संरक्षण अभियान भी जोरशोर से चल रहा है। और,सफलता भी मिल रही है। कई घरों -इलाकों में वापसी भी हुई है। 

घर – आँगन छोड़, रूठ कर पलायन कर चुकी गौरैया की घर वापसी के लिए चारों तरफ़ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पर्यावरण एवं गौरैया प्रेमी, देश भर में गौरैया संरक्षण के लिए अभियान चला रहे हैं। जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने में सरकारी-गैरसरकारी संस्थान, फ़िल्मकार, कथाकार, लेखक, पत्रकार और निजी पहल शामिल हैं। इसी कड़ी में विज्ञापन एजेंसी भी शामिल हो गए हैं। टीवी स्क्रीन पर जीवन बीमा से संबंधित एक विज्ञापन “अच्छा किया इंश्योरेंस किया’’ में गौरैया की दमदार भूमिका देखने को मिल रही है। विज्ञापन में गौरैया की उपस्थिति बताती है कि गौरैया अभी भी हमारे आसपास में मौजूद है।

विज्ञापन “अच्छा किया इंश्योरेंस किया” जनरल इंश्योरेंस काउंसिल द्वारा तैयार मोटर क्लेम्स सेटल्डं का विज्ञापन है। और, इसमें गौरैया मुख्य किरदार में है। अच्छी स्क्रिप्ट लिखी गयी है। संभवतः यह पहला विज्ञापन है जिसमें घरेलू गौरैया को दिखाया गया है। वह भी सकारात्मकता के साथ। गौरैया को गुड लक देते हुए दिखाया गया है। विज्ञापन… तार पर बैठी मादा गौरैया के कथन से शुरू होता है।  गौरैया कहती है….जब मनु अंकल अपना स्कूटर  बेचने निकले तो सोचा मैं भी गुडलक दे दूँ…और गौरैया स्कूटर पर बीट कर देती है। मनु अंकल स्कूटर पर बीट देख गौरैया को फ़्लाइंग किस देते हुए कहते है… अरे वाह यह तो गुडलक हो गया। उसी वक्त, गुप्ता अंकल की बेटी ने कार बैक करते हुए स्कूटर में टक्कर मार सब गड़बड़ कर दिया। गुप्ता अंकल की बेटी रोते हुए बोलती है, सॉरी अंकल गलती से रिवर्स लग गया। मनु अंकल बोले कोई बात नहीं…. गाडी पुरानी है लेकिन, हर साल मोटर क्लेम्स इंश्योरेंस रिनुअल करता हूँ, मरमत कवर हो जाएगी। खुश होते हुए, लड़की बोल उठती है, यह तो गुडलक हो गया । वाह मनु अंकल अच्छा किया, इंश्योरेंस लिया…कहते हुए स्कूटर के शीशे पर बैठी गौरैया फुर्र से उड़ जाती है और मनु अंकल उड़ती गौरैया को देखते हुए मुस्कुराते हैं। 30 सेकेण्ड के इस विज्ञापन में गौरैया की भूमिका अहम् है। विज्ञापन में सूत्रधार की भूमिका में गौरैया है। विज्ञापन एजेंसी चाहती तो विज्ञापन में कबूतर या दूसरी चिड़ियाँ का प्रयोग कर लेती। लेकिन, गौरैया का चयन करने के पीछे कारण यह भी हो सकता है कि इन्सान की दोस्त और घर -आँगन या आसपास में गौरैया का रहना शुभ- समृद्धि से जोड़ कर भी देखा जाता हैं। यों तो, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने अपने अन्य विज्ञापनों में भी अन्य पशुओं का भी इस्तेमाल किया है। ‘अच्छा किया, इंश्योरेंस लिया’ भले ही मोटर  इंश्योरेंस की वकालत कर रहा हो लेकिन इसमें गौरैया का इस्तेमाल, गौरैया से हमें जोड़ता है, घर-आँगन की गौरैया को टीवी स्क्रीन पर लाकर जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने बताया है कि गौरैया अभी भी हमारे आसपास रहती है। सन्देश ने  गौरैया संरक्षण को आगे बढाने में एक कदम आगे बढाया है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन