केक के बदले तरबूज काट और पौधारोपण कर मना जन्मदिन

पटना/10 मई2026/ राजधानी पटना के गंगा पथ पर ‘पीपल-नीम-तुलसी कृषि अभियान’ के तत्वावधान में प्रसिद्ध शिक्षक एवं मोटिवेटर प्रेम गांधी का जन्म दिवस एक अनूठे और पर्यावरण-अनुकूल अंदाज में मनाया गया। इस अवसर पर ‘पौधारोपण यज्ञ’ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया गया। साथ ही केक की जगह तरबूज काटा गया।…

पटना/10 मई2026/ राजधानी पटना के गंगा पथ पर ‘पीपल-नीम-तुलसी कृषि अभियान’ के तत्वावधान में प्रसिद्ध शिक्षक एवं मोटिवेटर प्रेम गांधी का जन्म दिवस एक अनूठे और पर्यावरण-अनुकूल अंदाज में मनाया गया। इस अवसर पर ‘पौधारोपण यज्ञ’ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया गया। साथ ही केक की जगह तरबूज काटा गया।

अभियान के तहत गंगा पथ के किनारे 51 पीपल और नीम के पौधों का रोपण किया गया। इसके साथ ही, भविष्य में हरियाली को विस्तार देने के उद्देश्य से अमलतास के बीजों का संग्रह कर हवाई छिड़काव भी किया गया।

इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि पाश्चात्य सभ्यता के अनुसार केक काटने के बजाय तरबूज काटकर जन्म दिवस मनाया गया। उपस्थित लोगों ने इस नए और स्वस्थ अंदाज की सराहना की और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। मौके पर पीपल-नीम-तुलसी अभियान के संस्थापक डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. एन.पी. प्रियदर्शी,डॉ. आर.के. ठाकुर,प्रेमलता सिंह, ज्ञानवंती देवी, मीना राय, अन्नपूर्णा झा,मोना, प्रियंका सिंह, राहुल कुमार, सतीश प्रसाद सिंह, इंडियन हॉस्टल ओनर वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य एवं अन्य गणमान्य नागरिक। इस अवसर पर डॉ. धर्मेंद्र कुमार और प्रेम गांधी ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि  “प्रकृति के तांडव और बढ़ते प्रदूषण को रोकने का एकमात्र उपाय पौधारोपण है। हम सभी को अपने प्रत्येक जन्म दिन पर कम से कम पाँच पौधे लगाने चाहिए और उनका संरक्षण करना चाहिए, ताकि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध ‘प्राणवायु’ (ऑक्सीजन) मिल सके।”

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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