ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम

पटना /4-5-2026 । देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु 01 अप्रैल, 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के संबंध में जागरूकता अभिवर्धित करने के उद्देश्य से बिहार के सभी शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जनित ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए नियमावली के विभिन्न प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण…

पटना /4-5-2026 । देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु 01 अप्रैल, 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के संबंध में जागरूकता अभिवर्धित करने के उद्देश्य से बिहार के सभी शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जनित ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए नियमावली के विभिन्न प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् पटना द्वारा ऑनलाईन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कई चरणों में नगर निकाय से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक किया जा रहा है।
15 अप्रैल से प्रारंभ प्रशिक्षण के 8 चरणों में 29 अप्रैल 2026 तक निम्नांकित 25 जिलों पटना, जहानाबाद, बक्सर, रोहतास, भोजपुर, नालंदा, कैमूर, गयाजी, नवादा, औरंगाबाद, अरवल, सारण, सिवान, गोपालगंज, भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, शेखपुरा, सहरसा, मधेपुरा तथा सुपौल के लिए आयोजित ऑनलाईन प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 17,000 से ज्यादा प्रक्षिशुओं ने भाग लिया।
सोमवार 04 मई 2026 को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के 9 वें सत्र में दरभंगा, मधुबनी एवं समस्तीपुर जिलों के माननीय मुखियागण, पंचायत स्तर के पदाधिकारीगण तथा प्रखंडस्तर के पंचायती राज पदाधिकारियों एवं अन्य ने भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् के सदस्य-सचिव, नीरज नारायण, भा.व.से., ने कहा कि 2016 की नियमावली के स्थान पर करीब 10 वर्षों के बाद नयी नियमावली को 27 जनवरी, 2026 को अधिसूचित किया गया है, जो 01.अप्रैल 2026 से लागू है।
उन्होंने बताया गया कि सर्वोच्चय न्यायालय द्वारा सिविल अपील नंबर- 6174/2023 में दिनांक – 19-02-2026 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के कार्यान्वयन हेतु सभी हितधारकों के लिए एक विस्तृत निर्देश जारी किया गया है, जिसका सर्वोच्चय न्यायालय द्वारा लगातार अनुश्रवण किया जा रहा है। उपुर्यक्त जारी आदेश में कहा गया है कि इन नियमों का पालन न करना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं माना जायेगा बल्कि तीन स्तरों पर प्रवर्तन हेतु किए गए प्रावधान में जो पदाधिकारी अपने कर्त्तव्यों का पालन नहीं करेंगे, उन पर मुकदमा भी चलाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित हितधारकों यथा- थोक अपशिष्ट उत्पादकों, सुविधा प्रदाताओं के संचालक आदि द्वारा केन्द्रीकृत ऑलाइन पोर्टल पर प्रत्येक वर्ष 30 जून तक वार्षिक प्रतिवेदन समर्पित किया जाना है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रबंधित एक केन्द्रीकृत ऑनलाइ्रन पोर्टल पूरे देश, राज्य तथा जिला स्तर पर कचरा प्रबंधन को अनुश्रवण करेगा।
यह ऑनलाईन प्रशिक्षण राज्य पर्षद् के वैज्ञानिक, नलिनी मोहन सिंह द्वारा दिया जा रहा है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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