मेघालय में जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की हुई खोज

मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स (East Khasi Hills) में हाल ही में वैज्ञानिकों ने जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की खोज की है। यह खोज लगभग 100 साल के लंबे अंतराल के बाद हुई है, जिसने भारत में जुगनुओं के संरक्षण और शोध की एक नई राह खोली है। दुर्लभ जुगनू में पहला…

मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स (East Khasi Hills) में हाल ही में वैज्ञानिकों ने जुगनू की दो नई और दुर्लभ प्रजातियों की खोज की है। यह खोज लगभग 100 साल के लंबे अंतराल के बाद हुई है, जिसने भारत में जुगनुओं के संरक्षण और शोध की एक नई राह खोली है।

दुर्लभ जुगनू में पहला है, 1. डायफेनेस मेघालयनस (*Diaphanes meghalayanus) जिसका नामकरण इस प्रजाति का नाम मेघालय’ राज्य के नाम पर रखा गया है, ताकि इसकी क्षेत्रीय पहचान और व्यापक वितरण को दर्शाया जा सके।इसकी विशेषता है कि ये जुगनू आमतौर पर फरवरी के महीने में अर्ध-सदाबहार जंगलों और सुपारी (betel nut) के बागानों में देखे जाते हैं। इसकी चमक, ये ज़मीन से लगभग 10-15 मीटर की ऊँचाई पर उड़ते हुए हल्की हरी रोशनी (pulsating light) छोड़ते हैं।

दूसरे दुर्लभ जुगनू – डायफेनेस मावलिनोंग (*Diaphanes mawlynnong) है जिसका नामकरण मेघालय के प्रसिद्ध गाँव ‘मावलिनोंग’ (एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव) के नाम पर रखा गया है, जहाँ इसे पहली बार देखा गया था। इसकी विशेषता यह है कि यह प्रजाति अपने आवास (habitat) के प्रति बहुत संवेदनशील होती है। ये घने बांस के जंगलों और चट्टानी झरनों के पास पाए जाते हैं।

इसकी खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति की पंखहीन मादा (wingless female) को एक चट्टान के नीचे खोजा था। नर जुगनू ऊपर उड़ते हैं जबकि मादा नीचे रहकर धीमी और लंबी रोशनी उत्सर्जित करती है।

भारत में ‘डायफेनेस’ (Diaphanes) जीनस पर लगभग एक सदी से कोई औपचारिक शोध नहीं हुआ था। एम्मा मैग्डलीन नोंगलांग के नेतृत्व में हुई इस खोज ने उस गैप को भरा है।

इसके पर्यावरण संकेतक भी हैं मसलन, जुगनू केवल वहीं जीवित रहते हैं जहाँ हवा शुद्ध हो और प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) न हो। इन नई प्रजातियों का मिलना यह दर्शाता है कि मेघालय के कुछ हिस्से अभी भी प्राकृतिक रूप से बहुत शुद्ध हैं।

मेघालय में जुगनूओं को स्थानीय खासी भाषा में न्यांगबाडिंग (Niangbading) कहा जाता है। मेघालय में न केवल चमकने वाले जुगनू, बल्कि इलेक्ट्रिक मशरूम (Roridomyces phyllostachydis) भी पाए जाते हैं, जो रात में हरे रंग की रोशनी छोड़ते हैं। अक्सर ये जुगनू और मशरूम एक ही पारिस्थितिकी तंत्र में साथ देखे जाते हैं।

मेघालय अपनी जैव विविधता (biodiversity) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, और यहाँ पाए जाने वाले जुगनू (Fireflies) प्रकृति का एक अद्भुत दृश्य पेश करते हैं। हाल के वर्षों में मेघालय के जुगनू न केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने हैं।

मेघालय के जंगलों में जुगनुओं की कुछ ऐसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं जो ‘सिंक्रोनाइज़्ड फ्लैशिंग’ (एक साथ चमकना) करती हैं। इसका मतलब है कि हज़ारों जुगनू एक ही लय में एक साथ जलते और बुझते हैं, जिससे पूरा पेड़ किसी क्रिसमस ट्री की तरह जगमगा उठता है।

मावलिनोंग (Mawlynnong), जिसे एशिया का सबसे साफ़ गाँव कहा जाता है, यहाँ के आसपास के जंगलों में मानसून के समय जुगनुओं की भारी संख्या देखी जाती है। जयंतिया हिल्स के घने और नम जंगलों में जुगनू सबसे अधिक सक्रिय होते हैं। मेघालय में जुगनू देखने का सबसे अच्छा समय मानसून की शुरुआत (मई से जुलाई) के बीच होता है। जुगनू नमी वाले वातावरण और साफ हवा में पनपते हैं, जो मेघालय में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।

स्थानीय खासी और जयंतिया समुदायों की लोककथाओं में भी इन चमकते कीटों का ज़िक्र मिलता है। इन्हें अक्सर प्राकृतिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।

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(फोटो साभार -गूगल ) 01-05-26

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