*मैरीलैंड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने किया अहम विश्लेषण*
मैरीलैंड, एजेंसी। साल 2025 में दुनिया ने करीब 43 लाख हेक्टेयर (1.06 करोड़ एकड़) वर्षावन खो दिए। यह लगभग पूरे डेनमार्क देश के आकार के बराबर का क्षेत्र है।
मैरीलैंड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया ने हर मिनट 11 फुटबॉल मैदानों जितने बड़े वन खत्म हो रहे हैं। यह नुकसान एक दशक पहले की तुलना में अब भी 46% अधिक है। 2021 के जलवायु शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक देशों ने वादा किया था कि वे 2030 तक वनों की कटाई पूरी तरह रोक देंगे, लेकिन वर्तमान गति को देखते हुए दुनिया इस लक्ष्य से 70 फीसदी पीछे चल रही है।
दुनिया के सबसे बड़े वर्षावन, अमेजन के दो-तिहाई हिस्से को समेटने प्रदर्शन किया है। ब्राजील में प्राथमिक जंगलों के नुकसान में 42 फीसदी की कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, 2022 की तुलना में 2025 में वनों की कटाई में 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2024 में भीषण सूखे और अल नीनो के कारण अमेजन में आग की घटनाएं रिकॉर्ड स्तर पर थीं ।लेकिन 2025 में बेहतर प्रबंधन और 380 मिलियन डॉलर के बजट के साथ आग पर काबू पाया गया। जंगलों के विनाश के बड़े कारण वनों की हानि के पीछे केवल आग ही नहीं, बल्कि इंसानी जरूरतें भी बड़ी वजह रही हैं। कांगो बेसिन जैसे इलाकों में गरीबी से लकड़ी के ईंधन की मांग और खेती के पुराने तरीकों से जंगलों को नुकसान पहुंचा।

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कितना बड़ा है डेनमार्क
डेनमार्क का कुल क्षेत्रफल लगभग 42,933 वर्ग किलोमीटर है। अगर हम फुटबॉल मैदानों की बात करें तो डेनमार्क में लगभग 60 लाख फुटबॉल मैदान समा सकते हैं। इसका मतलब है कि धरती ने एक साल में 43,000 वर्ग किलोमीटर हरियाली खो दी है।
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साल 2024 में जंगल की आग और वनों की कटाई के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद 2025 में प्राथमिक वनों (आदिम जंगलों) के नुकसान में 36 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। नए आंकड़ों के अनुसार, यह सुधार पर्यावरण के प्रति बढ़ती सजगता का संकेत है। हालांकि, चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।
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(साभार-दैनिक हिंदुस्तान दिल्ली 30-4-26)















