संजय कुमार/ घरेलू गौरैया की छोटी और मासूम दिखने वाली आँखें वास्तव में प्रकृति की एक बेहतरीन इंजीनियरिंग हैं। इसकी आँखें गौरैया की असाधारण जीवनशैली को समझने में मदद करते हैं। आइए, इसकी आँखों की बनावट और देखने की क्षमता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं:-
3 लाख फोटोरिसेप्टर्स का असली मतलब: “हाई-डेफिनिशन” विज़न होता है।
गौरैया की रेटिना में प्रति वर्ग मिलीमीटर लगभग 3,00000 फोटोरिसेप्टर होते हैं। इंसानों की तुलना में यह संख्या बहुत अधिक है। इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं। जैसे किसी मोबाइल कैमरे का मेगापिक्सल जितना ज़्यादा होता है, उसकी फोटो उतनी ही साफ़ और ज़ूम करने पर भी नहीं फटती। ठीक वैसे ही, इतने सारे फोटोरिसेप्टर्स होने के कारण गौरैया को अपने आसपास की दुनिया अल्ट्रा 4K या एचडी क्वालिटी में दिखाई देती है। इसी वजह से वह हवा में उड़ते हुए या ऊँचाई पर बैठे हुए भी ज़मीन पर पड़े छोटे से छोटे अनाज के दाने या रेंगते हुए कीड़े को साफ़ देख लेती हैं। उनके लिए रंगों और आकृतियों की पहचान करना बहुत आसान हो जाता है। इसे 300 डिग्री का विज़न होता है। इंसान अपनी आँखों से सामने की तरफ लगभग 180 डिग्री तक ही देख सकते हैं। लेकिन बिना मुड़े यह सब कुछ देख लेती है। गौरैया की आँखें उनके सिर के दोनों तरफ स्थित होती हैं। इस वजह से चारों तरफ नज़र रखती है। इस बनावट की वजह से गौरैया का विज़ुअल फ़ील्ड लगभग 300 डिग्री तक फैल जाता है। यानी वे बिना अपना सिर घुमाए, लगभग अपने पीछे की चीज़ों को भी देख सकती हैं। गौरैया एक छोटा पक्षी है, जिसे बिल्ली, बाज़ या कौवे जैसे शिकारियों से हमेशा खतरा रहता है। 300 डिग्री की दृष्टि के कारण, अगर कोई शिकारी पीछे या बगल से भी हमला करने की कोशिश करता है, तो गौरैया को तुरंत पता चल जाता है और वह फ़ुर से उड़ जाती है।

गौरैया का मुख्य भोजन अनाज के दाने और छोटे कीड़े-मकोड़े हैं। कीड़े बहुत तेज़ी से चलते हैं, लेकिन गौरैया की आँखों की ‘मोशन सेंसिटिविटी’ गति को पकड़ने की क्षमता इतनी तेज़ होती है कि वह पलक झपकते ही फ़ुर से उड़ते हुए कीड़े की दिशा भांप लेती है और उसे अपनी चोंच में दबोच लेती है।
गौरैया की आँखें गहरी भूरी या काली होती हैं, जो उनके चेहरे पर चमकती हुई मोतियों जैसी लगती हैं। नर गौरैया की आँखें मादा की तुलना में तेज चमकीला होता है। प्रजनन के दौरान नर की आँखों में अजीब सी चमक दिखती है जबकि मादा की आँख शांत-शीतल दिखती है।
पक्षियों में एक खास पलक होती है जिसे ‘निक्टिटेटिंग मेम्ब्रेन’ या तीसरी पलक कहते हैं। यह एक पारदर्शी परत होती है। जब गौरैया हवा में उड़ती है, तो यह परत उसकी आँखों को धूल-मिट्टी और हवा के थपेड़ों से बचाती है, और साथ ही आँखों में नमी बनाए रखती है, वह भी बिना उसकी दृष्टि को रोके। संक्षेप में कहें, तो गौरैया की आँखें केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व, भोजन ढूंढने और दुश्मनों से बचने के लिए प्रकृति द्वारा दिया गया एक बेहद शक्तिशाली हथियार हैं।
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