मेरिलबोन क्रिकेट क्लब में है ‘स्पैरो ऑफ लॉर्ड्स’ स्मृति चिन्ह

संजय कुमार / यों  तो  विश्व  भर  में  महान  विभूतियों, सैनिकों  और  नेताओं  की  स्मारक  या  मूर्तियां  चौक – चौराहों  या  प्रमुख  स्थलों  पर  लगी  मिल  जायेगी। लेकिन मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के म्यूजियम में रखा ‘स्पैरो ऑफ लॉर्ड्स’ स्मृति चिन्ह अपने आप में में अद्वितीय  है, जो  गौरैया और क्रिकेट के बीच संवेदनशीलता का रिश्ता…

संजय कुमार / यों  तो  विश्व  भर  में  महान  विभूतियों, सैनिकों  और  नेताओं  की  स्मारक  या  मूर्तियां  चौक – चौराहों  या  प्रमुख  स्थलों  पर  लगी  मिल  जायेगी। लेकिन मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के म्यूजियम में रखा ‘स्पैरो ऑफ लॉर्ड्स’ स्मृति चिन्ह अपने आप में में अद्वितीय  है, जो  गौरैया और क्रिकेट के बीच संवेदनशीलता का रिश्ता बताता है।  क्रिकेट गेंद पर बैठी गौरैया का स्मृति चिन्ह ‘स्पैरो ऑफ लॉर्ड्स’ प्रकृति  और  सभी  जीवित  प्राणियों  के  लिए  गहरा  प्रेम  प्रकट  करता है साथ ही संरक्षण का सन्देश देता है।

गौरैया चिड़िया की शहादत का इतिहास क्रिकेट से जुड़ा हुआ है। एक रोचक घटना ने नन्ही सी चिड़िया गौरैया को क्रिकेट से जोड़ते हुए इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा दिया है।

लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड को क्रिकेट का सबसे बड़ा तीर्थ कहा जाता है। यहाँ खेलना तो किसी के लिए उपलब्धि तो है ही, साथ मैच देखना भी बहुत बड़ी खुशकिस्मती की बात है। लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड के साथ ही साथ इसके परिसर में एक बहुत बड़ा म्यूज़ियम है जिसमें क्रिकेट से संबंधित अनेक वस्तुएं यादगार के तौर पर रखी हैं। इसी म्यूज़ियम में एक घरेलू गौरिया, जिसे एक गेंद पर उड़ते हुए माउंट किया गया है, प्रदर्शित है। क्रिकेट म्यूज़ियम में गौरैया सुन कर थोड़ा अजीब लगा न लेकिन यह सच है।

दरअसल, हुआ ये था कि 3 जुलाई, 1936 के दिन जब इंग्लैंड के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर मेरिलबोन क्रिकेट क्लब और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के बीच एक क्रिकेट मैच खेला जा रहा था। इस मैच में भारत के जहांगीर खान कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के लिए खेल रहे थे। मैच के दौरान भारतीय क्रिकेटर जहांगीर खान ने बल्लेबाज़ पीयर्स को घेरने की मंशा से गेंद डाली। इससे पहले की गेंद पीयर्स तक पहुंचती कि फुर्र-फुर्र करती हुई नन्ही गौरैया बीच में आ गयी। और गेंद गौरैया को हिट करते हुए पीयर्स तक पहुंची। पीयर्स ने फॉरवर्ड डिफेंड किया। तभी उसे छप्प की आवाज़ सुनाई दी। जैसे स्टंप्स पर कुछ गिरा हो। पीयर्स ने पीछे मुड़ कर देखा तो स्टंप्स के पास एक घायल गौरैया  गिरी हुई पड़ी थी और बेल्स सही सलामत थीं। गेंद ने गौरैया को हिट किया, ये घटना किसी ने नहीं देखी। तब टीवी कवरेज नहीं हुआ करती थी। छोटा मैच था लिहाज़ा प्रेस फोटोग्राफर भी सावधान नहीं थे। लेकिन अनुमान लगाया गया कि गेंद से गौरैया की चपेट में आई होगी। घायल गौरैया ने कुछ ही पल में दम तोड़ दिया। गेंद से उसके शरीर फट गए थे। घटना के बाद उस गौरैया को बाक़ायदा इज़्ज़त देते हुए स्टफ करके उसी गेंद पर माउंट कर दिया गया और लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड मैनेजमेंट ने मृत गौरैया और उस गेंद को मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के म्यूजियम में रख दिया और नाम दिया गया ‘स्पैरो ऑफ लॉर्ड्स’। आज भी गौरैया और गेंद मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के म्यूजियम की शान है। जो गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करता है। स्मृति चिन्ह की तरह गौरैया और गेंद को बनाया गया है। गेंद पर गौरैया को पंख फैलाये यानी उड़ते हुए प्रदर्शित किया गया है। गौरैया को देखने से साफ़ है कि वह मादा गौरैया है।  स्मृति चिन्ह पर एक पट्टी लगी है जिस पर अंग्रेजी में लिखा  है ।।दीस स्पैरो वास् किल्ड एट लॉर्ड्स बाय ए बॉल बॉलड बाय जहांगीर खान (कैंब्रिज यूनिवर्सिटी) टू टी।एन।पेअर्स(एम सीसी) ओन जुलाई 3थर्ड 1936 ।

यह अद्भुत दृश्य है। जो विश्व से विलुप्त होती गौरैया के संरक्षण का सन्देश देता है। 2006 में एक बार ‘स्पैरो ऑफ लॉर्ड्स’ रॉटरडैम के नेचुरल हिस्ट्री ऑफ़ म्यूज़ियम में भी प्रदर्शन के लिए भेजी गयी थी। क्रिकेट की बाईबिल विसडेन के श्रद्धांजलि ग्रन्थ में स्वर्गवासी इंसानों के अलावा इस गौरैया को भी श्रद्धांजलि दिए जाने का उल्लेख है।

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Hamari Gauraiya and Environment Warriors

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विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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