चित्रकारी एवं क्विज प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को मिला पुरस्कार

पटना/ बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा पर्यावरण संरक्षण  के लिए  जागरूकता अभिवर्धित के लिए पटना में चित्रकारी व क्विज प्रतियोगिता का आयोजन 01 जून, 2026 को ज्ञान भवन के बहुउद्देशीय हाॅल में आयोजित किया गया। चित्रकारी प्रतियोगिता में राज्य के 16 जिलों- बेगूसराय, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गयाजी, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, नालंदा नवादा, पटना, पूर्णियाँ, सहरसा,…

पटना/ बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा पर्यावरण संरक्षण  के लिए  जागरूकता अभिवर्धित के लिए पटना में चित्रकारी व क्विज प्रतियोगिता का आयोजन 01 जून, 2026 को ज्ञान भवन के बहुउद्देशीय हाॅल में आयोजित किया गया। चित्रकारी प्रतियोगिता में राज्य के 16 जिलों- बेगूसराय, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गयाजी, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, नालंदा नवादा, पटना, पूर्णियाँ, सहरसा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, वैशाली तथा पश्चिम चम्पारण से कुल 1066 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसमें 523 छात्र तथा 543 छात्राएं थीं। इसके अतिरिक्त राज्य के बाहर कोलकाता, धनबाद तथा हरिद्वार के विद्यार्थी भी शामिल थे।

5 वर्ग समूहों में विभक्त इस प्रतियोगिता के वर्ग समूह 1 (कक्षा 01 एवं 02) में 08 जिलों के 81 विद्यालयों के 170 विद्यार्थी; वर्ग समूह 2 (कक्षा 03 एवं 04) में 12 जिलों के 40 विद्यालयों के 225 विद्यार्थी; वर्ग समूह 03 (कक्षा 05 एवं 06) में 08 जिलो के 51 विद्यालयों के 219 विद्यार्थी ; वर्ग समूह 4 (कक्षा 07 एवं 08) में 13 जिलों के 94 विद्यालयों के 229 विद्यार्थी तथा वर्ग समूह 5 (कक्षा 09 एवं 10) में 10 जिलोें के 78 विद्यालयों के 223 के प्रतियोगियों / विद्यार्थीयों ने भाग लिया।

प्रतियोगिता की चित्रकारियों को कला एवं शिल्प महाविद्यालय, पटना के प्राचार्य की अध्यक्षता में गठित निर्णायक मंडल द्वारा पुरस्कार हेतु चयन किया गया जिन्हें आज राज्य पर्षद् के पटना स्थित मुख्यालय परिवेश भवन में पर्षद् अध्यक्ष डाॅ. डी.के. शुक्ला एवं सदस्य-सचिव, नीरज नारायण,भा.व.से., द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कृत छात्र-छात्राओं की सूची संलग्न की गयी है।  क्विज प्रतियोगिता में कुल 163 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिनमें 54 टीमें और 55 एकल प्रतिभागी थे। स्क्रीनिंग एवं सेमी फाइनल चक्र के पश्चात दो सदस्यीय 4 टीमों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। शेष 4 टीमों को प्रोत्साहन पुरस्कार हेतु चयनित किया गया। जिनकी सूची संलग्न है। पुरस्कृत प्रतिभागियों को पुरस्कार स्वरूप ट्राॅफी, प्रमाण पत्र व पुस्तके दी गई।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ के अन्तर्गत राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 19,472 पौद्या रोपण किया गया।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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