-गौरैया जैव विविधता का संकेतक है।

विश्व जैव विविधता दिवस 22 मई संजय कुमार / गौरैया जैव विविधता का संकेतक है। गौरैया का परिवेश में रहना बताता है कि  आस-पास का इकोसिस्टम कितना स्वस्थ है। गौरैया दिखे यानि पर्यावण स्वस्थ्य, हवा साफ है, कीड़े-मकोड़े हैं, पेड़-झाड़ियां हैं आदि है। मतलब वहां का जैव विविधता ठीक है। अगर गौरैया गायब है तो…

विश्व जैव विविधता दिवस 22 मई

संजय कुमार / गौरैया जैव विविधता का संकेतक है। गौरैया का परिवेश में रहना बताता है कि  आस-पास का इकोसिस्टम कितना स्वस्थ है। गौरैया दिखे यानि पर्यावण स्वस्थ्य, हवा साफ है, कीड़े-मकोड़े हैं, पेड़-झाड़ियां हैं आदि है। मतलब वहां का जैव विविधता ठीक है। अगर गौरैया गायब है तो समझ लीजिये खतरे की घंटी है। कीटनाशक बढ़ गए, कंक्रीट बढ़ गया, पेड़ कट रहे हैं। यानी पूरी जैव विविधता की श्रृंखला टूट रही है। विशेषग कहते हैं  गौरैया को बचाएं,बायोडायवर्सिटी को बचाएं। दरअसल में गौरैया खुद जैव विविधता का हिस्सा है। एक अहम्  कड़ी है गौरैया। गौरैया कीड़ों को आहार बना कर कीट नियंत्रण करती है। सही शब्दों में गौरैया प्राकृतिक पेस्ट कंट्रोल है। गौरैया न हो तो फसलों पर कीड़े बढ़ जाएंगे। साथ ही गौरैया घास और अन्य बीज खाकर दूर-दूर फैलाती है। इससे नए पौधे उगते हैं। वहीँ, गौरैया बाज, बिल्ली, सांप का भोजन भी है। गौरैया न हो तो उनकी आबादी भी पप्रभावित होगी। इसलिए गौरैया बचेगी तो पूरी जैव विविधता बचेगी। हमें गौरैया को बचाने के लिए प्रयास करने होंगे। पानी रखना, पेड़ लगाना, कीटनाशक कम करना, अहम् है जिसका  फायदा सिर्फ गौरैया को नहीं मिलता। बल्कि उससे मधुमक्खी, तितली, गिलहरी से लेकर छोटे पौधे तक सब बचते हैं। बड़ी बात यह कि गौरैया जैव विविधता की पहली सीढ़ी है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन