संजय कुमार/ घरेलू गौरैया के आहार में प्राकृतिक रूप से कच्चे अनाज और बीज प्रमुखता से शामिल है। इसे वह पसंद से खाती है।प्राकृतिक-शारीरिक तौर से गौरैया का पाचन तंत्र कच्चे दानों को पचाने के लिए बेहतर तरीके से अनुकूलित होता है। जबकि कुछ लोग पका हुआ चावल आदि गौरैया को आहार में देते हैं जो उसका प्राकृतिक आहार नहीं है। भले ही गौरैया उसे खा ले, लेकिन पका हुआ चावल थोड़ा भी पुराना हो जाए या नमी के कारण उसमें फंगस लग जाए, तो यह गौरैया के लिए जानलेवा हो सकता है। इसके अलावा, पका हुआ चावल गौरैया की चोंच के आसपास चिपक सकता है, जिससे उसे असुविधा हो सकती है। पके हुए चावल से बेहतर है कि उन्हें कच्चा चावल या टूटा हुआ चावल दिया जाये। यदि आप गौरैया को नियमित रूप से भोजन देना चाहते हैं, तो बाजार में मिलने वाला ‘मिक्स्ड बर्ड फीड’ जिसमें विभिन्न प्रकार के बीज होते हैं, सबसे अच्छा और संतुलित आहार हो सकता है। गौरैया इसे अपनी चोंच से तोड़कर आसानी से पचा लेती है।
प्रोटीन के मामले में कच्चे और पके हुए चावल में बहुत मामूली अंतर होता है। दोनों में प्रोटीन की मात्रा स्थिर रहती है।वैसे पकाने की प्रक्रिया से चावल के दानों के अंदर मौजूद प्रोटीन की मात्रा खत्म नहीं होती है। 100 ग्राम कच्चे चावल में जितना प्रोटीन होता है, पकने के बाद भी उस चावल के वजन में पानी जुड़ जाने के बावजूद कुल प्रोटीन उतना ही रहता है। अंतर केवल नमी का है। पक्षियों के लिए चावल के ‘पके या कच्चे’ होने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि चावल ‘सफेद’ है या ‘ब्राउन’ हो। ब्राउन राइस (छिलके वाला): इसमें सफेद चावल की तुलना में प्रोटीन, फाइबर और विटामिन की मात्रा काफी अधिक होती है। यह गौरैया के लिए अधिक स्वास्थ्यवर्धक है। पॉलिश किया हुआ सफेद चावल, पॉलिशिंग के दौरान इसके बाहरी छिलके और भ्रूण को हटा दिया जाता है, जिससे इसमें प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा काफी कम हो जाती है। यह मुख्य रूप से केवल ‘कार्बोहाइड्रेट’ (ऊर्जा) का स्रोत रह जाता है। गौरैया को उनके दैनिक आहार में पर्याप्त प्रोटीन देने के लिए चावल के बजाय बाजरा, मूंग की दाल (कच्ची), इसमें चावल की तुलना में कहीं अधिक प्रोटीन होता है। सूरजमुखी के बीज, इनमें प्रोटीन और हेल्दी फैट्स दोनों भरपूर होते हैं। कंगनी यह भी प्रोटीन का अच्छा प्राकृतिक स्रोत है।
आप घरेलू गौरैया को पका हुआ चावल और अनाज दे सकते हैं, लेकिन ऐसा करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है, चावल बिल्कुल सादा होना चाहिए। इसमें नमक, तेल, मसाले, प्याज या लहसुन का उपयोग बिल्कुल न करें। ये चीजें गौरैया के छोटे से शरीर के लिए बहुत हानिकारक होती हैं। चावल को कमरे के तापमान पर ठंडा करके ही डालें। गर्म चावल न दें। चावल को मुख्य भोजन न बनाएं। यह केवल कभी-कभार दिया जाने वाला पूरक होना चाहिए। गौरैया के लिए अनाज सबसे अच्छा प्राकृतिक आहार है। बाजरा और ज्वार गौरैया के लिए सबसे पसंदीदा और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। गेहूं का दलिया बिना पका हुआ यह उन्हें बहुत पसंद होता है। कच्चा चावल पके हुए चावल से बेहतर है कि आप उन्हें कच्चा चावल या टूटा हुआ चावल दें।पिसा हुआ या छोटे टुकड़ों में टूटा हुआ मक्का भी अच्छा रहता है।
गौरैया को बासी भोजन न दें, क्योंकि उसमें फंगस लग सकता है, जो पक्षियों के लिए जानलेवा हो सकता है। गौरैया को दाना खिलाने के साथ-साथ एक बर्तन में साफ और ताजा पीने का पानी जरूर रखें। गर्मी के मौसम में यह और भी आवश्यक है। जहां आप खाना डालते हैं, उस जगह को नियमित रूप से साफ करें ताकि गंदगी या संक्रमण न फैले। आहार की कमी से गौरैया का पलायन भी हुआ है ऐसे में हमें दाना पानी की व्यवस्था करनी चाहिए हालांकि गौरैया प्रकृति से आहार खोज लेती है। नहीं मिलने पर इलाका बदलती है।
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