जैव विविधता: धरती की सांस, हमारी ज़िंदगी

*रिम्पी ऐश्वर्य/ जैव विविधता (Biodiversity) एक ऐसी प्रणाली जिसमें विभिन्न प्रकार के जीव (जैसे- पौधे, जानवर, सूक्ष्म जीव, कवक, इत्यादि) एक-दूसरे के साथ परस्पर संबंध स्थापित कर हमारे आस-पास के परिस्थितिक तंत्र(Ecosystem)और पर्यावरण को स्वस्थ और अनुकूल बनाते हैं। हम सभी की जिंदगी एक दूसरे के बराबर सहयोग पर आश्रित है। इसके बहुत उदहरण हैं…

*रिम्पी ऐश्वर्य/ जैव विविधता (Biodiversity) एक ऐसी प्रणाली जिसमें विभिन्न प्रकार के जीव (जैसे- पौधे, जानवर, सूक्ष्म जीव, कवक, इत्यादि) एक-दूसरे के साथ परस्पर संबंध स्थापित कर हमारे आस-पास के परिस्थितिक तंत्र(Ecosystem)और पर्यावरण को स्वस्थ और अनुकूल बनाते हैं। हम सभी की जिंदगी एक दूसरे के बराबर सहयोग पर आश्रित है। इसके बहुत उदहरण हैं जैसे फसल परागण(Crop pollination ),ये फसलों और पौधों में होने वाली एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है,जिसके बिना पौधे, फल या बीज पैदा नहीं कर सकते हैं और यह प्रक्रिया छोटे-छोटे कीट (जैसे- मधुमक्खी, तितली) और पक्षियों के बिना संभव नहीं है।

इसके अन्य उदारण हैं, जैसे- खाद्य शृंखला(Food chain), जो यह दर्शाती है कि ऊर्जा और भोजन एक जीव से दूसरे जीव तक कैसे प्रवाहित होते हैं और ये हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिर और संतुलित रखते हैं। इसके अलावा समुद्र और जंगल, जो सबसे बड़े प्राकृतिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषक हैं, जो जलवायु पर होने वाले खतरनाक प्रभाव को रोकते हैं ।

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक –
-80% से ज्यादा ग्रामीण निवासी अपने इलाज के लिए पारंपरिक पौधों पर आश्रित रहते हैं।

-विश्व की आधी से ज्यादा GDP(सकल घरेलू उत्पाद), प्रकृति (कृषि, वानिकी,मत्स्यपालन इत्यादि) पे सीधे तौर पर आश्रित है।

-75% से अधिक वैश्विक खाद्य फसलें (Global food crops)परागकों (Pollinators) पर आश्रित हैं।

इसके अलावा भी बहुत सारे उदहरण हैं, जिनके माध्यम से हम जैव विविधता(Biodiversity )के महत्व को और गहराई से समझ सकते हैं। इस संदर्भ में जैव-विविधता को लेकर लोगों में गहरी शिक्षा और जागरुकता की आवश्यकता है। तो आइए, हम सभी मिलकर खुद से वायदा करें कि जैव-विविधता को सुरक्षित बनाने में अपना ज्यादा से ज्यादा योगदान देंगे।|
*छात्रा,पटना विमेंस कॉलेज

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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