संजय कुमार / बचपन की यादों में मई-जून की वह तपती दोपहरी आज भी जिंदा है, जब दादी कहती थीं,घर से बाहर मत निकलो, लू लग जाएगी।उस तपती धूप में भी घर के आंगन में रखी नांद या पानी से भरी बाल्टी पर कई गौरैया चोंच खोले पानी पीती दिख जाती थीं। आज भी वही दोपहरी है, वही जानलेवा लू है, पर घर-आंगन से वो दृश्य और गौरैया गायब है। अब न वो नांद बची है, न पानी की बाल्टी।
घरेलू गौरैया का शरीर का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फ़ारेनहाइट) होता है, जो मनुष्यों की तुलना में काफी अधिक होता है। इसलिए नन्ही गौरैया गर्मी को अच्छी तरह से सहन नहीं कर सकती है। इसका शरीर तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। इसलिए गर्मियों में यह सुबह-सुबह दिखती है और जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, तापमान बढ़ता है। गरमी से बचने के लिए संघर्ष करती हैं। और, पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगती हैं। पानी नहीं मिलता है तो जमीन पर गिर जाती है, एक-दो बार पंख फड़फड़ाकर उठने की नाकाम कोशिश करती है और दम तोड़ देती है।

पशु चिकित्सक डॉ संजीत कुमार बताते हैं, गौरैया का शरीर का सामान्य शरीर तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस होता है। इंसान का सिर्फ 37 डिग्री सेल्सियस। गौरैया का दिल छोटा होता है और एक मिनट में 400 बार धड़कता है, इंसान का 72 बार। जितनी छोटी चिड़ियाँ होती है उसका दिल उतना तेज धडकता है।
गौरैया चहकती उडती है। इंसान तापमान को सहने के लिए उपाय कर लेता है लेकिन पशु चिकित्सक बताते हैं, गौरैया कुछ नहीं कर पाती है। 45 डिग्री सेल्सियस की गरमी / लू में उसका शरीर 44°C पहुंचते ही हीट स्ट्रोक से बंद होने लगता है। और, चोंच खुल जाता है जीफ बाहर(पेंटिंग-हलका लार निकलने लगता है) वह हांफने लगती है और गिरती है, फिर उठने की कोशिश करती है एक बार, दो बार और नहीं उठ पाती। उसे डीहाईरेशन हो जाता हैं। इंसान के शरीर से पसीना निकलता है और थोड़ी सी हवा लगने से शरीर को राहत मिलती है, लेकिन गौरैया को पसीने की ग्रंथियां नहीं होती है। वह सिर्फ चोंच खोलकर तेज़-तेज़ सांस लेती हांफती है। यही जान लेवा होता है।
आज कटते पेड़ और बढ़ते कंक्रीट के जंगल में गौरैया तापमान को झेल नहीं पाती। पहले ऐसा नहीं था। कच्चे घरों, फूस के छप्परों, खपरैल के घरों और घने बाग-बगीचों में छुपकर खुद को लू से बचा लेती थीं। अब जब सब कुछ सीमेंट का हो चुका है, तो सवाल उठता है कि गौरैया उड़े तो कहाँ, छुपे कहाँ और बैठे तो कहाँ?
बढ़ते तापमान के बीच 40 डिग्री सेल्सियस से 45 डिग्री सेल्सियस होने पर गौरैया के शरीर को 50 प्रतिशत ज़्यादा पानी चाहिए। पर पानी कहाँ है? घर आँगन की बाल्टी भी नहीं, कहीं नल से पानी टपकता मिल जाए तो जान बच जाए। इंसान के लिए जगह-जगह पनशाला या पानी का घड़ा रखा मिल जाता है, लेकिन पक्षियों के लिए बहुत कम। कुछ लोग पानी रखते हैं। जबकि घर-घर यह व्यवस्था होनी चाहिए । गरमी में आपके रखे पानी के बर्तन में ये पानी पीती है और उसमें स्नान भी कर अपने शरीर के तापमान को संतुलित रखती है। बारिश या घरों से निकला रोड पर जमे पानी में गौरैया खूब स्नान करती है।
गौरैया सहित अन्य चिड़ियों को गरमी से निजात दिलाने के लिए के लिए मिट्टी का बर्तन छत, दीवार, खुले या मुंडेर पर रखें। मिट्टी का के बर्तन में पानी ठंडा रखता है। प्लास्टिक या स्टील के बर्तन धूप में खुद गरम हो जाते हैं। पानी हमेशा ताजा रखें, कोशिश हो बर्तन को छाया दें। गौरैया और अन्य चिड़ियों को एसी नहीं चाहिए और न ही मांगती है। वह बेजुबान है बस चुपचाप आती और चली जाती है। एक कटोरी पानी, एक मुट्ठी अनाज,छाया के लिए पेड़ बस इतना ही उसे चाहिए है।
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