दो बाघों का शिकार चारों टांग कटी मिली

हरिद्वार.वास/ वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के जंगल में दो बाघों का शिकार किया गया है। दोनों बाघों के क्षत-विक्षत शव मिलने से वन प्रभाग में हड़कंप मच गया है। मृत बाघों में एक दो वर्ष का नर और एक मादा बाघ शामिल है, जिनके चारों पैर कटे हुए मिले हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार,…

हरिद्वार.वास/ वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के जंगल में दो बाघों का शिकार किया गया है। दोनों बाघों के क्षत-विक्षत शव मिलने से वन प्रभाग में हड़कंप मच गया है। मृत बाघों में एक दो वर्ष का नर और एक मादा बाघ शामिल है, जिनके चारों पैर कटे हुए मिले हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, बाघों को कोई जहरीला पदार्थ देकर मारे जाने की आशंका है। वन विभाग ने इस मामले में मंगलवार को एक वन गुर्जर को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं। इससे पहले वर्ष 2017 में भी चिड़ियापुर में इसी तरह एक बाघ को जहर देकर मारा गया था। वन प्रभाग के अनुसार, रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे सजनपुर बीट (श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या-09) में सर्च ऑपरेशन के दौरान जंगल से मृत बाघ बरामद किया गया था।(साभार -दैनिक हिंदुस्तान.नई दिल्ली-20-5-26)

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 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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