गौरैया संरक्षण के लिए कानूनी ढाल है वन्यजीव(संरक्षण)अधिनियम

संजय कुमार/ घर-आँगन में चहकने-फुदकने, बचपन की साथ और किसान मित्र घरेलू गौरैया के संरक्षण को लेकर भारत में कोई अलग से ‘गौरैया अधिनियम’ यानि कानून नहीं बना है, लेकिन इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव कानून और विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। खेतों में बढ़ता कीटनाशक का…

संजय कुमार/ घर-आँगन में चहकने-फुदकने, बचपन की साथ और किसान मित्र घरेलू गौरैया के संरक्षण को लेकर भारत में कोई अलग से ‘गौरैया अधिनियम’ यानि कानून नहीं बना है, लेकिन इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव कानून और विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। खेतों में बढ़ता कीटनाशक का प्रयोग, प्रदूषण, शिकार सहित अन्य कारणों से गौरैया को हो रहे नुकसान से बचाने के लिए भारत सरकार सामने आयी और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में गौरैया को संरक्षित करने को लेकर पहल की।
“स्टेट ऑफ इंडियंस बर्ड्स 2023” ने अपनी रिपोर्ट में भारत के कई पक्षियों की प्रजातियां को खतरे में बता कर सबको चौंका दिया। चिड़ियों के 178 प्रजातियों को संरक्षित करने की बात भी कही। विलुप्ति के सवालों से लिपटी गौरैया के ऊपर भी मंडराते खतरे की चर्चा होती रहती है। हालाँकि, अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि गौरैया लाल सूचि में शामिल हो, हालाँकि स्थिति अच्छी भी नहीं हैं। इसके बावजूद खतरा तो है ही, क्योंकि यह कई इलाकों से विलुप्त हो चुकी है। गौरैया की घटती संख्या यानि विलुप्ति की ओर बढ़ने के मद्देनजर इसके संरक्षण के प्रति केंद्र सरकार ने सजगता दिखाई है ताकि इसकी संख्या में गिरावट नहीं आये और गौरैया को वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (अंतिम अद्यतन 1-4-2023) की अनुसूची-IV (संशोधन के बाद अब अनुसूची-II का हिस्सा) के तहत रखा गया है। इनमें यूरेशियन ट्री स्पैरो (पासर मोंटैनस), हाउस स्पैरो (पासर डोमेस्टिकस), रॉक स्पैरो पेट्रोनिया (पेट्रोनिया), रसेट स्पैरो (पासर सिनामोमियस), सिंध स्पैरो (पासर पाइरहोनोटस), स्पैनिश स्पैरो (पासर हिस्पानियोलेंसिस), पीले गले वाली गौरैया (जिमनोरिस ज़ैंथोकोलिस), जो भारत में पाई जाती है, शामिल है। कह सकते हैं गौरैया को खतरे से बचाना है। पहले गौरैया अनुसूची-III में शमिल थी। लेकिन अब अनुसूची-II में आने से इसकी सुरक्षा-संरक्षा और बढ़ गयी है। इसके तहत जीव को उच्च सुरक्षा प्रदान की जाती है। मानव जीवन को खतरे के अलावा गौरैया का शिकार करना, उन्हें पकड़ना या उनके घोंसलों को नुकसान पहुँचाना कानूनी अपराध है। इसके तहत इसको एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए चीफ वाइल्ड लाइफ़ वार्डन की अनुमति जरुरी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कारावास और जुर्माने का भी प्रावधान है।गौरैया संरक्षण को लेकर ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार अपने कार्यक्रमों में नागरिकों से गौरैया के लिए दाना-पानी रखने और कृत्रिम घोंसले लगाने की अपील की है।
गौरैया के नुकसान को लेकर मोबाइल टावर को दोषी ठहराया जाता रहा है। ऐसे में मोबाइल टावर रेडिएशन गाइडलाइंस को पालन करने को लेकर दूरसंचार मंत्रालय का दिशा-निर्देश भी है उसका पालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान है। भारतीय संविधान के माध्यम से भी प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है कि वह वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करे। साथ ही यह राज्य का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण की रक्षा और सुधार करे तथा देश के वन्यजीवों की रक्षा करे। घरेलू गौरैया के कम होती संख्या और उसके संरक्षण को लेकर 20 मार्च 2010 को विश्व गौरैया दिवस घोषित हुआ, ताकि संरक्षण को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ें। दिल्ली सरकार ने 2012 और बिहार सरकार ने 2013 में घरेलू गौरैया को राजकीय पक्षी का दर्जा दिया। तो पहल सरकार जरुर करें लेकिन आम आदमी को भी आगे आना होगा क्योंकि गौरैया दोस्त है, हमारे घर-आँगन की पक्षी है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन