गौरैया एक सर्वहारा पक्षी है मांसाहारी नहीं

संजय कुमार/ घरेलू गौरैया एक सर्वाहारी पक्षी है। मांसाहारी जीव नहीं है। इसके आहार में किट,पतंगा शामिल है। खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों का भक्षण करना गौरैया पसंद करती है और उसे अपने बच्चों को भी खिलाती हैं। साथ ही इन्सान के घरों में प्रवेश कर अनाज के साथ कीड़े-मकोड़े को खाती…

संजय कुमार/ घरेलू गौरैया एक सर्वाहारी पक्षी है। मांसाहारी जीव नहीं है। इसके आहार में किट,पतंगा शामिल है। खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों का भक्षण करना गौरैया पसंद करती है और उसे अपने बच्चों को भी खिलाती हैं। साथ ही इन्सान के घरों में प्रवेश कर अनाज के साथ कीड़े-मकोड़े को खाती हैं। इस लिये गौरैया को किसान मित्र भी कहते है।

गौरैया अपने बच्चे को फसल-सब्जी और गोबर के सड़ने से निकलने वाले कीड़े को भी खिलाती है। कीड़ा से बच्चे को प्रोटीन मिलता है और पोषण अच्छा होता है। घरेलू गौरैया एक छोटी और आकर्षक पक्षी है, जो अक्सर घरों के आसपास रहती या देखी जाती है। गौरैया एक सर्वहारा पक्षी है, जिसका मतलब है कि यह विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों को खाती है, जैसे कि बीज, फल, अनाज, और छोटे कीड़े-मकोड़े। गौरैया मांसाहारी पक्षी नहीं है और न ही मांसाहारी जीव का शिकार करती है, बल्कि यह एक सर्वहारा है, जो पौधों और कीड़ों को आहार बनाता है। गौरैया के आहार में मुख्य रूप से बीज, अनाज, कुन्नी और फल-फूल अड्डी शामिल है, लेकिन यह कीड़े-मकोड़े, छोटे स्पाइडर, और अन्य छोटे जानवरों को भी खाती है। गमले और मिटटी में लगने वाले नन्हे कीड़ों को खाती है।

गौरैया का आहार बहुत विविधता लिए होता है, जो मौसम और उपलब्धता के अनुसार बदलता रहता है। गौरैया का मुख्य आहार बीज और अनाज होता है। अन्य खाद्य पदार्थ में गौरैया अन्य खाद्य पदार्थ भी खाती है, जैसे कि रोटी, ब्रेड, बिस्किट, और अन्य मानव खाद्य पदार्थ। गौरैया का आहार मौसम के अनुसार बदलता रहता है। सर्दियों में गौरैया अधिक बीज और अनाज खाती है। जबकि गर्मियों में गौरैया अधिक फल-फूल-पत्तियां और सब्जियां खाती है।धान  के मौसम में इसका पसंदीदा आहार होता है। वर्षा ऋतु में गौरैया अधिक कीड़े-मकोड़े खाती है। गौरैया कैटरपिलर, जैसे कि पत्ती खाने वाले कीड़े, और अन्य प्रकार के कैटरपिलर को पसंद से खाती है। गौरैया एक सामाजिक पक्षी है, जो अक्सर समूह में रहती है। यह विभिन्न प्रकार के वातावरण में रह सकती है। साथ ही गौरैया बीजों को फैलाने और कीड़े-मकोड़ों को नियंत्रित करने में मदद करती है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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